बड़ी लापरवाही:अंतरराज्यीय बसों में दूसरे राज्यों से आने वालों की कोरोना जांच नहीं, कांटेक्ट ट्रेसिंग करने तैयार करा रहे सिर्फ लिस्ट

बैकुंठपुर6 महीने पहले
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  • बिहार, उप्र व झारखंड से हर दिन बसों में पहुंच रहे हैं सैकड़ों यात्री, कोरिया जिले में कहीं जांच की व्यवस्था नहीं
  • सीमा चेकपोस्ट पर यात्रियों के नाम, मोबाइल नंबर व पता नोट करा रहे, कोरोना की जांच नहीं कर रहे, इससे यात्री अपने जिला में आने के बाद सीधे घर पहुंच रहे, इससे परिवार को भी खतरा

प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद अंतर जिला चलने वाली लगभग सभी बसें बंद हो चुकी हैं, लेकिन अंतरराज्यीय बसें रोज सैकड़ों यात्रियों को उप्र, बिहार और झारखंड के अन्य शहरों से कोरिया जिले में ला रही हैं। बड़ी परेशानी तो यह है कि इन बसों से आने वाले यात्रियों की छग सीमा पर कोरोना जांच नहीं की जा रही है।

सिर्फ कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए यात्रियों के नाम, मोबाइल नंबर और पता का लिस्ट सीमा चेकपोस्ट पर जमा करवाया जा रहा है, जबकि निजी वाहन से आने वाले यात्रियों को रोककर उनका कोरोना जांच किया जा रहा है। इस नियम के कारण कई यात्री निजी वाहन के बजाय बसों में सफर करना पसंद कर रहे हैं, जबकि यहां सोशल डिस्टेंस नहीं होने से संक्रमण का खतरा अधिक है।

बता दें कि कोरिया जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जिले में मप्र सीमा से आने जाने वाले यात्री बसों पर सरकार ने रोक लगा दी है, लेकिन उप्र, छग सीमा पर यह प्रतिबंध नहीं है। निजी ट्रेवल्स संचालक न सिर्फ पड़ोसी राज्यों से रोज यात्रियों को ला और ले जा रहे हैं, बल्कि एजेंट ऑफलाइन टिकट की बुकिंग भी कर रहे हंै। जिले से उप्र, बिहार व झारखंड के बीच मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी के रास्ते करीब 15 बसें रोजाना पड़ोसी राज्यों से आ जा रहीं हैं। इनमें आने जाने वाले यात्रियों से बस संचालक न कोरोना निगेटिव जांच का प्रमाण मांगते हैं, न ही रास्ते में कहीं कोरोना जांच किया जाता है। इस कारण बस संचालक निजी वाहनों से होने वाले पूछ परख के कारण बसों में आना जाना बेहतर समझ रहे हैं।

बिना जांच कराए सीधे घर जा रहे यात्री, जांच के इंतजाम नहीं

हैरानी की बात यह है कि दिशा निर्देशों का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी जिन जिन प्रशासनिक अधिकारियों पर है, वह भी जिम्मेदारी नहीं िनभा रहे हैं। अंतराज्यीय बसों से यात्री पटना से चिरमिरी, मनेंद्रगढ़ के बीच जगह-जगह उतरते हैं, लेकिन बस स्टैंड पर भी जांच के कोई इंतजाम नहीं होते हैं। बैकुंठपुर के अंतर राज्यीय बस स्टैंड में बाहर के राज्यों से कई यात्री बसों में सफर कर रहे हैं, लेकिन यहां भी न जांच की व्यवस्था नहीं है। इससे यात्री बिना जांच सीधे घर जा रहे हैं।

बस में कुछ दूर सफर करने के बाद मास्क निकाल देते हैं यात्री

वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच लोगों की लापरवाही भी चरम पर है। बसों में कुछ दूर के सफर के बाद यात्री भी मास्क उतारकर बेपरवाह हो जाते हैं। बस यात्रा करने के बाद वे लक्षण दिखाई देने के बाद भी न तो कोरोना जांच करवाते हैं, न ही डॉक्टरी परामर्श लेते हैं। ऐसे लोगों का संक्रमण से बचाव व रोकथाम को लेकर सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने से कोई वास्ता नहीं रह गया है। यात्री बसों में इक्के दुक्के लोग ही मास्क पहने नजर आते हैं।

परेशानी : जगह-जगह उतरते ही निकल रहे यात्री

दरअसल अंतरराज्यीय बसों का जिले में लौटने का समय ही कुछ ऐसा है कि यात्रियों की जांच नहीं की जाती। उप्र बनारस से आने वाली सांई बाबा ट्रेवल्स, झारखण्ड रांची से आने वाली बसें सुबह 7 से साढ़े 7 बजे तक चिरमिरी के अंतिम पड़ाव तक पहुंच जाती हैं। इस बीच बसों में सवार 30 से अधिक यात्री बैकुंठपुर से चिरमिरी के बीच जगह-जगह उतर कर घर चले जाते हैं, जिनकी कोरोना जांच नहीं हो पाती।

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