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धोखाधड़ी:बागवानी को विकसित करने किसानों के सवा करोड़ बीज निगम ने दूसरे काम पर किए खर्च

बैकुंठपुर18 दिन पहले
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उद्यान विभाग में पहुंची जांच टीम। - Dainik Bhaskar
उद्यान विभाग में पहुंची जांच टीम।
  • पीएमओ से शिकायत पर राज्य से पहुंची ज्वाइंट डायरेक्टर की टीम, अब शासन करेगी कार्रवाई

बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराने केंद्र सरकार से मिले सवा कराेड़ की बजट राशि के साथ बड़ी हेराफेरी की गई है। मामला सामने आने के बाद विभागीय जांच शुरू हो गई है। मंगलवार को रायपुर से 4 सदस्यीय टीम जांच करने जिला मुख्यालय पहुंची थी।

टीम के सदस्य दिनभर उद्यानिकी कार्यालय में कागजात खंगालते रहे। आरोप है कि बजट में मिली राशि समय बीतने के बाद सरकार को लौटाने की बजाय सहायक संचालक उद्यान ने खर्च कर दी है। अब मामले में उद्यान और बीज निगम के अधिकारी घेरे में हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार से बागवानी विकास मिशन में डेढ़ साल पहले उद्यान विभाग काे बजट में एक कराेड़ 24 लाख 60 हजार रुपए मिले थे, लेकिन वित्तीय वर्ष 2019-20 के नवंबर में मिली राशि को विभाग खर्च नहीं कर सका।

साल बीतने के बाद बजट में मिली राशि को नियम अनुसार सरकार को लौटाना था, लेकिन विभाग के सहायक उप संचालक ने यह राशि सरकार को लौटाने की बजाय मनमाने ढंग से चुनिंदा किसानाें के लिए पावर ट्रिलर खरीदी के साथ शेड नेट व प्लास्टिक मल्चिंग कार्यों पर खर्च कर दी। अब मामले में सरकारी राशि की हेराफेरी के साथ अनियमितता के आराेप लग रहे हैं।

राशि कहां-कहां खर्च की, स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं, जांच में जुटी टीम

मामले में सहायक उप संचालक उद्यान कार्यालय का तर्क है कि लक्ष्य पूर्ति समयावधि में नहीं होने से बीज निगम को पत्र लिखकर राशि वापसी की मांग की थी। इस पर छग राज्य बीज और कृषक विकास निगम कार्यालय ने सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग बैकुंठपुर को यह राशि चेक के माध्यम से वापस लौटा दी थी। यदि बीज निगम से यह राशि वापस नहीं मिलती तो वे इसे खर्च नहीं करते। इससे मामले में दोनों विभाग के अधिकारी जांच के घेरे में हैं।

जिम्मेदार की सफाई- गलत कार्यों पर राशि नहीं की गई है खर्च

मामले में उद्यान विभाग के सहायक उप संचालक का कहना है कि राशि गलत कार्यों पर खर्च नहीं किए हैं। बजट राशि से 5 ब्लॉक में किसानों को कटाई के लिए पावर ट्रिलर उपलब्ध करवाने के साथ बागवानी के लिए शेड नेट व प्लास्टिक मल्चिंग कार्य करवाए गए हैं, लेकिन इससे कितने किसान लाभान्वित हुए हैं और कार्यों पर अलग-अलग कितनी राशि खर्च हुई है, इसका लेखा-जोखा विभाग कार्यालय में स्पष्ट नहीं है।

पीएमओ के निर्देश पर पहुंची टीम बड़ी गड़बड़ी का होगा खुलासा

विभागीय कर्मचारी से मामले की जानकारी मिलने के बाद आरटीआई में इसका खुलासा हुआ। एमएलए नगर के दिलीप पांडेय ने मामले की शिकायत पीएमओ से ऑनलाइन पोर्टल पर की थी। इसके बाद राज्य से गठित जांच टीम जिला मुख्यालय पहुंची। अब जांच में बड़ी गड़बड़ी के खुलासे का अनुमान जताया जा रहा है।

डायरेक्टरेट को सौंपेंगे रिपोर्ट: ज्वाइंट डायरेक्टर

जांच टीम में पहुंचे संचालनालय रायपुर से संयुक्त संचालक वीके चतुर्वेदी का कहना है कि शिकायत पर विभागीय जांच चल रही है। कागजात इकट्‌ठा कर जांच रिपोर्ट संचालनालय रायपुर को सौंपी जाएगी। इसके बाद शासन से नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

नियम अनुसार हुई खरीदी: सहायक उपसंचालक

मामले में उद्यान विभाग के सहायक उप संचालक सतीश सिंह का कहना है कि बजट राशि नियम अनुसार ही खर्च की गई है। इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। कहां कि बीज निगम से रुपए वापस मिलने के बाद खरीदी की है। अन्य जानकारी पर कहा कि स्पष्ट जानकारी तैयार कर बता पाएंगे।

2 से 3 महीने में सवा करोड़ खर्च

6 नवंबर 2020 को शासन से मिली बजट राशि चेक को सहायक उप संचालक उद्यान ने इसे उद्यान विभाग के खाते में जमा करवाया था। 31 मार्च को वित्तीय वर्ष पूरा होने तक राशि खर्च नहीं हो सकी। इसके बाद नियम अनुसार इसे लौटाना था, लेकिन सहायक उप संचालक उद्यान सतीश सिंह ने अप्रैल में राशि खर्च कर दी। हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि विभाग ने दो से तीन महीनों में सवा करोड़ खर्च कर डाली।

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