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फैल रहा संक्रमण:कोरोना के 30 % लक्षण वाले मरीज बढ़े, 10 बेड के आईसीयू में मरीजों की अल्टरनेट शिफ्टिंग की नौबत

अंबिकापुर11 दिन पहले
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सरगुजा जिले में कोरोना के नए केस में लक्षण वाले मरीजों की संख्या 30 फीसदी पहुंचने से अब खतरनाक स्थिति बनती जा रही है और मेडिकल काॅलेज अस्पताल के 10 बेड के आईसीयू में जगह की कमी बनने लगी है। बेड कम पड़ने से कई बार अब आईसीयू में स्टेबल वाले मरीज को एचडीयू में शिफ्ट कर दूसरे गंभीर मरीज को भर्ती किया जा रहा है, ताकि गंभीर की जान बचाई जा सके। अस्पताल प्रबंधन के पास आईसीयू में अपने मरीज को बेड दिलाने परिजन एप्रोच लगाने लगे हैं। यह स्थिति इसलिए बन रही है कि लक्षण वाले मरीजों में 8 फीसदी ऐसे मरीज रहते हैं, जिनको सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे मरीजों के लिए आईसीयू में बेहतर इलाज संभव है। जानकार बताते हैं कि जल्द आईसीयू व आक्सीजन वाले बेड की संख्या नहीं बढ़ाई तो लक्षण वाले मरीजों की बढ़ती संख्या मुसीबत खड़ी कर देगी। सिर्फ सितंबर में ही 7885 लोगों की जांच में 615 कोरोना संक्रमित मिले हैं, जिनमें करीब 200 लोगों में कोरोना के लक्षण (सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने मेंे दिक्कत) थे।

मेडिकल काॅलेज में भर्ती 52 मरीज, 22 में कोरोना के लक्षण
कोरोना में लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मेडिकल काॅलेज में 16 सितंबर तक 52 कोरोना मरीज भर्ती थे, जिनमें 22 में सर्दी, बुखार, खांसी के अलावा अन्य तरह की परेशानी थी। इनमें भी 10 मरीजों की हालत गंभीर होने से आईसीयू में रखा गया है। बाकी के 9 लोगों में श्वास लेने में दिक्कत थी।

बुखार पीड़ित महिला की मौत के बाद रिपोर्ट पाॅजिटिव
सीतापुर क्षेत्र की कोरोना पीड़ित महिला की बुधवार को मौत हो गई। 65 वर्षीय महिला को बुखार आने पर परिजन ने 13 सितंबर को अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भर्ती कराया। सांस लेने में परेशानी होने पर महिला को कोविड आइसोलेशन में भर्ती किया। बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसके बाद कोरोना रिपोर्ट आई जिसमें वह पाॅजिटिव निकली।

जिले में कोरोना संक्रमितों के इलाज की यह सुविधा

जिले में 384 बेड स्वास्थ्य विभाग व मेडिकल काॅलेज की देखरेख में हैं। मेडिकल काॅलेज में 100 बेड है, जिसमें 10 बेड का आईसीयू है। यहां 15 बेड का एचडीयू है, जिसमें अभी आक्सीजन सप्लाई की सुविधा शुरू हुई है। जनरल वार्ड में 75 बेड है, लेकिन आक्सीजन वाले नहीं है।

लोग जांच कराने में कर रहे देरी इसलिए बढ़ रहे लक्षण वाले मरीज
"कोरोना के केस अब जिले में बढ़ने की सबसे मुख्य वजह जांच में देरी है। हल्का बुखार होने पर लोग खुद दवा लेकर खा ले रहे हैं। इससे कुछ दिन आराम लगता है, लेकिन वे ठीक नहीं होते हैं। ऐसे लोगों में कोरोना वायरस का लोड बढ़ते जाता है और जब तबीयत फिर बिगड़ती है तो उनमें कोरोना का लक्षण दिखने लगते हैं। इससे अभी लक्षण वाले मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। यदि लोग जांच कराने से बचेंगे तो लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ते जाएगी जो दूसरे लोगों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होगा। इससे आने वाले समय में समस्या और बढ़ेगी।"
-डाॅ. रोशन वर्मा, श्वास रोग विशेषज्ञ, मेडिकल काॅलेज अस्पताल

सीधी बात
डाॅ. लखन सिंह, एमएस, मेडिकल काॅलेज

सवाल - आईसीयू में मरीजों को भर्ती करने बेड कम पड़ रहे हैं, इसे और क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है?
-इसका काम शुरू हो गया है। आईसीयू को 25 बेड की क्षमता की जा रही है। इसके अलावा जनरल वार्ड में सेंट्रलाइज आक्सीजन सप्लाई की जाएगी। इससे सभी बेड में मरीज को आक्सीजन मिलेगा।
सवाल - आईसीयू में बेड लेने के लिए मरीज के परिजन एप्रोच लगा रहे है, इन्हें कैसे बेड उपलब्ध कराते हैं।
-लोगों का अपने मरीजों के लिए आईसीयू में भर्ती कराने फोन आता है तो है लेकिन उनके कहने पर किसी को बेड नहीं देते हैं। मरीज की हालत गंभीर होने पर हमारे डाक्टर समय के अनुसार काम करते हैं। यदि आईसीयू में पहले से भर्ती कोई मरीज स्टेबल है और उसकी हालत में सुधार है तो उसे एचडीयू में शिफ्ट कर गंभीर मरीज को आईसीयू में भर्ती करते हैं।

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