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महंगाई की मार:जिले में सब्जी का 50 प्रतिशत घटा रकबा, कीमतें हुई दोगुनी से अधिक

अंबिकापुरएक महीने पहले
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  • त्योहार नजदीक आते ही सब्जियों की कीमतों में उछाल, आवक कम होने से बाहर से मंगानी पड़ रही सब्जियां

त्योहार का मौसम नजदीक आते ही सब्जियों की कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले एक हफ्ते के दौरान सब्जियों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि जिले में सब्जी उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो जाने के कारण कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। स्थानीय सब्जियों की आवक बाजार में कम होने के कारण बाहर से सब्जियां मंगानी पड़ रही हैं। वहीं कोरोना महामारी का असर भी सब्जियों की कीमतों पर दिख रहा है। पिछले तीन महीनों के दौरान सब्जियों की कीमतें लगभग दोगुनी से अधिक हो गई हैं। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन लगने के बाद से सब्जियों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं त्योहार का सीजन आते ही इनकी कीमतों में और तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। सब्जी व्यापारियों ने बताया कि स्थानीय सब्जियां बाजार में नहीं पहुंचने के कारण बाहर से मंगानी पड़ रही हैं। इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान किसानों को हुए नुकसान के कारण पूरे देश में सब्जियों की पैदावार का रकबा भी घट गया है। इससे बाहर से भी सब्जियां महंगी ही आ रही हैं। सरगुजा जिले में लगभग पचास प्रतिशत सब्जियों का रकबा कम हुआ है। व्यापारियों ने बताया कि सरगुजा जिले में सब्जियों की बड़ी मात्रा में पैदावार होती है। यहां की जलवायु में हर तरह की सब्जी की पैदावार हो जाती है। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ी और कई किसानों के खेत में ही सब्जियां सड़ गईं। इसके बाद डर के कारण किसानों ने सब्जियों की खेती ही नहीं की। यही कारण है कि जिले में पैदा होने वाली सब्जियां बाजार में नहीं पहुंच रही हैं।

थोक बाजार में यह हैं सब्जियों की कीमतें
पुराना आलू 37, नया आलू 35, प्याज 45, टमाटर 36, लहसुन 100, लौकी 15, परबल 45, तरोई 25, बरबट्टी 30, बैगन 20, मिर्च 70, अदरक 35 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है। जबकि फुटकर बाजार में इन सब्जियों की कीमतें पांच से दस रुपए अधिक हैं।

डरे हुए हैं किसान, सरकार भी नहीं दे रही इस पर ध्यान
भारत कृषक समाज के महामंत्री लक्ष्मी गुप्ता ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सब्जियों की फसल बर्बाद होने के कारण किसान डरे हुए हैं। इस ओर सरकार ने भी ध्यान नहीं दिया। कई किसान कर्ज लेकर सब्जियों की पैदावार करते हैं, उनके ऊपर कर्ज बढ़ गया है। यही कारण है कि रकबा 50 प्रतिशत तक कम हो गया, जबकि सरकार ने उनके ब्याज को भी माफ नहीं किया।

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