स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही उजागर:माह भर के भीतर एक ही पंडो परिवार के तीन सदस्यों की मौत, पहले पिता फिर दादी और अब पोते ने तोड़ दिया दम

अंबिकापुर2 महीने पहले
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बलरामपुर जिले में एक पंडो जनजाति के युवक की मौत में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हुई है। युवक को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसके बाद उसकी गंभीर हालत के बाद भी उसे जिला अस्पताल रेफर नहीं किया गया। इसके बाद घर में उसकी मौत हो गई।

इस तरह एक माह के भीतर इस परिवार में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वाड्रफनगर के वीरेंद्रनगर निवासी 25 वर्षीय नकुल पंडो पिता रामप्यारे पंडो की मौत हो गई। उसकी तबीयत उसके कुपोषित होने की वजह से खराब थी। इसलिए उसे 17 सितंबर को मुरकौल स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां जांच कर उसे घर भेज दिया गया। 28 सितंबर को सुबह 3.30 बजे उसकी मौत हो गई। परिजन तबीयत खराब होने पर स्वास्थ्य केंद्र ले जाने से पहले तक उसकी झाड़-फूंक करा रहे थे। इसके बाद पंडो समाज के प्रदेश अध्यक्ष उदय पंडो ने ग्राम पंचायत बिरेंद्र नगर में शिविर आयोजित कराकर जागरूक करने का प्रयास किया था। तब पता चला था कि नकुल पंडो बीमार है और खून की उल्टी हो रही है और दूसरी समस्या भी है। इसके बाद उसे अस्पताल भेजा था। बता दें कि उसके पिता रामप्यारे पंडो की मौत 5 सितंबर और दादी की मृत्यु 16 सितंबर को घर पर ही हो गई थी।

बलरामपुर रेफर किए होते तो बच जाती नकुल की जान

जब नकुल बीमार था, तब स्वास्थ्य केंद्र में जांच की गई थी। इसके बाद उसे घर भेज दिया था। इसके बाद नकुल के घर जाकर फॉलोअप नहीं लिया और न ही रेफर कर भर्ती करा इलाज कराया। उसकी शारीरिक स्थिति को विभाग के लोग नहीं समझ पाए और घर भेज दिया था।

कलेक्टर के निर्देश का भी स्वास्थ्य विभाग पर असर नहीं

तत्कालीन कलेक्टर इंद्रजीत सिंह ने जब एक ही परिवार के दो लोगों की मौत की खबर सामने आई थी, उसके बाद उन्होंने वीरेंद्र नगर का दौरा किया था और स्वास्थ्य कर्मियों को पंडो जनजाति के लोगों के सही इलाज के निर्देश दिए थे, लेकिन स्वास्थ्य महकमा ने लापरवाही बरती और फिर नकुल नामक पंडो युवक की जान चली गई। बता दें कि पंडो जनजाति के लोगों की लगातार मौत के बाद कलेक्टर इंद्रजीत सिंह का राज्य सरकार ने तबादला कर दिया है।

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