मनमानी:पर्यावरण मंडल की बिना अनुमति ठेकेदार अवैध खुदाई कर बेच रहा रेत, फर्जी पिट पास देकर वसूली

अंबिकापुर6 महीने पहले
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नदी से अवैध खनन करते हुए- इनसेट फर्जी पिट पास - Dainik Bhaskar
नदी से अवैध खनन करते हुए- इनसेट फर्जी पिट पास
  • जिला प्रशासन के अफसर कार्रवाई तो दूर मौके पर जाकर जांच तक करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे
  • बलरामपुर की 4 खदानों के लिए टेंडर होने के बाद पर्यावरण मंडल की मंजूरी अटकी, परसवार कला रेत घाट का मामला

बलरामपुर जिले में चार रेत खदानों की मंजूरी के बाद भी पर्यावरण मंडल से अनुमति नहीं मिली है। इसके बाद भी परसवार कला घाट से ठेकेदार रेत का अवैध खनन व भंडारण कर बेच रहा है। जबकि उसे लीगल खदान से रेत खरीदकर ही भंडारण की अनुमति है, लेकिन वह अवैध रेत को वैध बताकर बेच रहा है। इसके लिए खनिज विभाग ने उसे पीट पास भी जारी कर दिया है।

इस तरह अवैध कारोबार इस रेत घाट में माह भर से चल रहा है, लेकिन जिला प्रशासन के अफसर कार्रवाई तो दूर मौके पर जाकर जांच तक करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वहीं खनिज निरीक्षक तो इस मामले में निरीह अफसरों की तरह चुप बैठने विवश दिख रहे हैं।

जिले के राजपुर ब्लाॅक में परसवार कला, धंधापुर, नरसिंहपुर व शंकरगढ़ ब्लाॅक के करासी में रेत खदान के लिए टेंडर फाइनल हो चुका है, लेकिन खनन से पहले उन्हें पर्यावरण मंडल से मंजूरी लेनी होती है जो अब तक नहीं मिली है। फिर भी परसवार कला महान नदी में सड़क बनाकर 10-15 फीट गड्ढे कर मशीन से खनन किया जा रहा है। बता दें कि एक माह पहले अवैध माइनिंग की जानकारी संबंधित अफसर को मिली तो वह तत्काल मौके पर पहुंचा।

रोज 50 ट्रक रेत अवैध खनन कर यूपी भेजी जा रही

मशीनों के ऑपरेटर ने नदी से मशीनों काे बाहर निकाल दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर तब यहां ऑपरेटर को कैसे पता चला कि कुछ देर में यहां खनिज निरीक्षक पहुंच रहे हैं। इसके बाद उस निरीक्षक के बारे में उल्टे शिकायत करने की भी खबर बाहर आई, इससे प्रतीत होता है कि विभाग के अफसरों व कर्मचारियों की रेत तस्करों से मिलीभगत है और अब रोज 50 ट्रक से अधिक रेत की माइनिंग कर यहां से यूपी भेजी जा रही है। जबकि यहां से रेत लेकर निकलने पर रास्ते में यूपी बार्डर तक कई खनिज बैरियर व चेकपोस्ट हैं, लेकिन उनकी गाड़ियां नहीं रोकते।

माइनिंग प्लान नहीं बना, ठेकेदार नहीं कर सकता खनन

खनिज विभाग के निरीक्षक सुब्रत साना ने बताया कि चार रेत खदान के लिए टेंडर के बाद अभी माइनिंग के लिए प्लान व पर्यावरण मंडल की अनुमति नहीं मिली है। दफ्तर में पर्यावरण स्वीकृति का पत्र नहीं आया है। इसके बाद माइनिंग प्लान बनेगा, फिर ठेकेदार को मौके पर जाकर स्थल दिखाया जायेगा, तब राजस्व विभाग के भी अफसर होंगे। इससे पहले माइनिंग गलत है। ठेकेदार को लीगल खदान से रेत लाकर सिर्फ भण्डारण व उसके बाद बेचने के लिए रायल्टी बुक जारी हुई है, लेकिन महान नदी से खनन नहीं कर सकता है।

कोरे कागज में फर्जी पिट पास तैयार कर बेच रहे रेत

रेत ठेकेदार यहां से फर्जी पिट पास जारी कर रहा है जो पेन से लिखा है, जिसमें गाड़ी नंबर, मालिक का नाम व रेत की मात्रा के साथ राशि लिखी जा रही है। यहां 120 फीट रेत पर 500 रुपए वसूल किए जा रहे हैं। वहीं इसके बिना इस नदी से रेत तस्कर आसपास के लोगों को भी रेत निकालने नहीं दे रहे हैं। इससे लोगों में गुस्सा है तो पंचायत प्रतिनिधि भी खामोश हैं। वहीं अनुभाग स्तर के एसडीएम व तहसीलदार कार्रवाई हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

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