परंपरा के अनुसार मनाया दीप पर्व:शोभायात्रा निकाल कर गौरा-गौरी का किया विसर्जन

बरबसपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

दीपावली का पर्व गुरुवार को अंचल में उत्साह के साथ मनाया गया। दीपावली पर कवर्धा जिले के समीपस्थ ग्राम पंचायत बरबसपुर क्षेत्र में सभी वर्ग के लोगों ने यह त्योहार मनाया। व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों में पूजा-अर्चना की। घर में प्रथम पूजनीय श्रीगणेश, धन की देवी मां लक्ष्मी और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई। कई प्रकार के व्यंजन और मिठाइयों से मुंह मीठा कराया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में शोभायात्रा निकाल गौरा-गौरी का विसर्जन किया गया। अंचल में यह त्योहार छत्तीसगढ़ी परंपरा अनुसार मनाई गई। कोरोना काल में दीपावली को लेकर शहर सहित इलाके में उत्साह कम नहीं हुआ। शाम को घरों में रंग-रोगन, आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ लक्ष्मी-कुबेर पूजन के बाद त्योहार मनाया गया। बरबसपुर क्षेत्र के हर इलाके में पटाखों की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही। इधर गौरी-गौरा की मूर्तियों को लकड़ी के आसन पर बिठाया व सजाया जाता है। गौरा-गौरी के आसन को सिर पर रखकर चलते हैं, जिसे गांव के तालाब में विसर्जित किया गया।

भगवान के आसन को सिर पर लेकर चले
ग्रामीण अंचल में गौरा-गौरी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह शिव व पार्वती को समर्पित है। यह लोक उत्सव प्रत्येक वर्ष दीपावली और लक्ष्मी पूजा के बाद मनाया जाता है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या के वक्त यह उत्सव मनाया जाता है। इस पूजा में सभी जाति समुदाय के लोग शामिल होते हैं। लोग गांव के बाहर एक निर्धारित जगह से पूजा कर उसी स्थान की मिट्टी लेकर गांव वापस आते हैं। उस मिट्टी से शिव पार्वती (गौरा-गौरी) की मूर्ति बनाते हैं।

गोवर्धन पूजा कर गायों को खिलाई खिचड़ी
दीपावली के दूसरे दिन अंचल के सभी गांव में गोवर्धन पूजा में लाेग शामिल हुए। दिन में घर में पशुधन को पशुपालकों के द्वारा खिचड़ी प्रसाद खिलाया गया। गोवर्धन का प्रतीक गोबर से बनाया गया, जिसे सिलयारी, मेमरी, फूलों व धान की बालियों से सजाया गया। उसके बाद विधिवत पूजा किया गया। यदुवंशियों द्वारा पशुधन को रंग-बिरंगी सोहाई पहनाई गई। गांव के देव स्थल में सामूहिक आतिशबाजी की गई। शनिवार को भाई दूज भी मनाया गया।

खबरें और भी हैं...