शारदीय नवरात्र:नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नगर में इस साल 110 छोटे-बडे़ पंडालों में विराजेंगी आदिशक्ती मां दुर्गा

चिरमिरी17 दिन पहले
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स्कूल पारा में स्थापित मां की प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
स्कूल पारा में स्थापित मां की प्रतिमा।
  • जिले में 20 से अधिक पूजा पंडालों के पट खुले, 180 से अधिक पंडाल बन रहे, सजावट पर 80 लाख से 1 करोड़ रुपए तक हुए खर्च

जिले में दुर्गा पूजा उत्सव की रौनक कोलकाता से कम नहीं होती है। खासतौर पर कॉलरी क्षेत्रों में पर्व पर लाखों रुपए खर्च कर पंडालों को तैयार किया जाता है। पूरे जिले में 110 से अधिक छोटे-बड़े पंडाल बन रहे हैं, लेकिन इनमें सबसे अधिक 35 पंडाल चिरमिरी में तैयार हाे रहे हैं। इन पंडालों की सजावट पर 80 लाख से एक करोड़ रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं।

शारदीय नवरात्र की एकम तिथि को जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में सात पूजा पंडालों सहित जिले में 20 से अधिक पूजा पंडालों के पट खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही माता के दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। कोरोना से बचाव के मद्देनजर पूजा पंडालों में अन्य वर्षों की तुलना में इस वर्ष विद्युत लाइटों की साज-सज्जा कम की गई है। वहीं लाउडस्पीकर की आवाज को भी कम रखा गया है। दर्शनार्थियों के बीच सामाजिक दूरी बनी रहे इसे लेकर पूजा पंडालों में सुरक्षा व सावधानी के लिए रस्सी से घेरे बनाए गए हैं। कोरिया जिले में दुर्गा पूजा का इतिहास 76 साल पुराना है।

चिरमिरी के छोटा बाजार के बंगला स्कूल से विभूति भूषण लाहिड़ी ने दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। इसके बाद पूरे जिले में दुर्गोत्सव मनाने की परंपरा शुरू हुई थी। इस दौरान कोलकाता से मालगाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमा को स्पेशल वैगन की बुकिंग कर मंगवाया जाता था। इस साल कोरोना के चलते दुर्गा उत्सव के आयोजन में गाइडलाइन है कि 8 फीट तक ऊंची प्रतिमा ही पंडालों में बिठाई जाएगी। प्रसाद के रूप में फलों के वितरण को प्राथमिकता दी जा रही है। नवरात्र के पहले ही दिन जगह-जगह पंडालों में मां की प्रतिमा स्थापित हुई तो उसी के साथ आसपास का वातावरण भी देवीमय हो गया है। जिला मुख्यालय में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का पट्ट खुलते ही गुरूवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

मुख्यालय के स्कूलपारा, भवानी तिगड्डा महलपारा रोड, बाजारपारा, गढ़ेलपारा व एसईसीएल चौक में मां दुर्गा की स्थापित प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चारण से आचार्य पंडित मां दुर्गा का पट्ट जैसे ही खोले श्रद्धालु उमड़ पड़े। जिले में कोलकाता के मूर्तिजापुर के कलाकार मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाते हैं। माता की पूजा के लिए ज्यादातर क्षेत्रों में पंडित हर साल कोलकाता से आते हैं। इस वर्ष पंडित और मूर्तिकार दोनों ही बहुत दुखी है क्याेंकि कोविड के कारण कई जगह वे नहीं पा रहे हैं। समिति ने भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन्हें इस वर्ष नहीं आने को कहा है।

ढाक वाले पखांजूर, कोलकाता से आते हैं
चिरमिरी के ज्यादातर पंडालों में माता की पूजा में ढाक बजाने के लिए ढाक वाले हर साल पखांजूर, कोलकाता से आते हैं। इसके बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजा शुरू होने से पहले ही हर साल ढाक बजाने वाले आ जाते हैं। पूजा की शुरुआत होने के साथ ही ढाक की आवाज से माहौल भक्ति हो जाता है। इन सब बातों के कारण ही कोरिया में दुर्गा पूजा का विशेष स्थान है।

मंदिरो में मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित
चिरमिरी की देवी मंदिरों में घट स्थापना के साथ गुरूवार को शारदीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत हुई। मां विराजमान हो गई है। अन्य जगहों पर षष्ठी व सप्तमी से पट खुलेंगे। महामाया चनवारीडांड, कालीबाड़ी, सोनावनी काली मंदिर, बैगापारा, संकट मोचन मंदिर डोमनहिल में मनोकामना जोत प्रज्ज्वलित किया गया है। नवरात्र का पावन पर्व शुरू होते ही चिरमिरी सहित खड़गवां ग्रामीण अंचलों का माहौल भक्तिमय हो गया है।

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