पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

अनदेखी:24 साल से टिकरापारा के 30 % लाेगों को मुआवजा का इंतजार, बिना भू-अर्जन एसईसीएल निकाल रहा कोयला

चिरमिरी11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
जहां से लोगों को विस्थापित किया मुआवजा मिलने के बाद वहीं बना लिए पक्के मकान। - Dainik Bhaskar
जहां से लोगों को विस्थापित किया मुआवजा मिलने के बाद वहीं बना लिए पक्के मकान।
  • विस्थापितों ने मुआवजा लिया, विस्थापन में मिली जमीन बेचकर टिकरापारा में पक्के मकान बना लिए
  • 24 साल पहले 220 लोगों का मुआवजा प्रकरण किया गया था तैयार
  • वहीं दूसरी ओर 24 साल से चल रहा अवैध कब्जा का खेल, इस दौरान एक बार भी कार्रवाई नहीं की गई

कुरासिया ओपन कास्ट के तहत 24 साल पहले टिकरापारा से कोयला खनन करने भू-अर्जन कर 220 लोगों को विस्थापित करने मुआवजा प्रकरण तैयार किए गए थे। जिनमें से कुछ का भू-अर्जन किए बिना ही एसईसीएल ने कोयला खनन कर लिया।

220 लोगों को विस्थापित करने करीब 4 करोड़ का मुआवजा राज्य शासन को सौंपा था। विस्थापितों में 150 लोगों ने मुआवजा लेने के बाद टिकरापारा में ही पक्के मकान बना लिए। वहीं विस्थापन वाली न्यू टिकरापारा की जमीन बेच दी। जानकारी के अनुसार वर्ष 1996 से 98 के बीच कुरासिया ओपन कास्ट का विस्तार करने के लिए टिकरापारा बस्ती को विस्थापित कराया गया था। मुआवजा और गोदरीपारा लिटिल फ्लावर स्कूल के सामने नई बस्ती न्यू टिकरापारा के नाम से विस्थापितों काे बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए एसईसीएल अाैर राज्य शासन के संयुक्त प्रयास से विस्थापन किया जाना था। एसईसीएल प्रबंधन ने 220 लोगों के प्रकरण का करीब 4 कराेड़ राज्य शासन के माध्यम से जिला प्रशासन को मुआवजा दिया था।

बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने पूरा मुआवजा प्रबंधन व जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर ले लिया था। वहीं कुछ को 10 फीसदी और कुछ को आधा मुआवजा ही मिला था। 24 साल के अंतराल में आधे लोग जहां से विस्थापित हुए थे। उसी स्थान पर फिर कब्जा कर पक्के मकान बना लिए हैं। वहीं 24 वर्ष से अब तक राजस्व विभाग और एसईसीएल प्रबंधन द्वारा दोनों जगह अवैध कब्जा कर रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि एसईसीएल श्रमिक संघ के कुछ नेता के साथ सांठगांठ कर न्यू टिकरापारा के जमीन की खरीदी-बिक्री करा रहा है। इसके साथ ही कालरी के बिजली और पानी का भी उपयोग कर रहे हैं। इससे प्रबंधन विवश है।

4 लाख मिलना था मुआवजा सिर्फ डेढ़ लाख ही मिला
केस 1.
कुछ ऐसे परिवार भी हैं, जिन्हें विस्थापन के बाद नौकरी मिलनी थी। वहीं नौकरी तो दूर पूरा मुआवजा तक नहीं मिला। मामला कोर्ट में है। अफजल के बेटे बबलू ने बताया उनको करीब 4 लाख मुआवजा मिलना था, 1 लाख 40 हजार ही मिला। नौकरी के लिए कोर्ट में केस चल रहा है।

एसईसीएल ने 90 प्रतिशत मुआवजा अब नहीं नहीं दिया
केस 2.
ऋषभ जैन ने बताया कि टिकरापारा में उनके परिवार के 6 मकान हैं। जिसके लिए 10 फीसदी मुआवजा करीब 50 हजार मिला था। समतलीकरण के बाद शेष 90 फीसदी राशि मिलनी था, जो एसईसीएल ने अब तक नहीं दी है। वहीं मकान भी नहीं तोड़ा है।

मुआवजा लिया, विस्थापन में मिली जमीन भी बेच दी
220 प्रकरण में 150 ऐसे थे, जिन्होंने विस्थापन के नाम पर मुआवजा लिया और टिकरापारा में ही पक्का मकान बना लिया। वहीं विस्थापन वाले क्षेत्र में मिले प्लाट को बेच दिया। 70 में से 69 प्रकरण ऐसे थे। जिन्हें 10 से 20 फीसदी मुआवजा मिला। वहीं एक प्रकरण में एसईसीएल ने बिना भू-अर्जन के कोयला खनन कर लिया।

अफसर बोले- जांच के बाद कराएंगे कार्रवाई
कलेक्टर एसएन. राठौर ने कहा कि मामला बहुत पुराना है। फाइल निकलवा कर केस स्टडी करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है। एसईसीएल चिरमिरी जीएम घनश्याम सिंह ने कहा मामले की जानकारी लेने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज जीवन में कोई अप्रत्याशित बदलाव आएगा। उसे स्वीकारना आपके लिए भाग्योदय दायक रहेगा। परिवार से संबंधित किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार विमर्श में आपकी सलाह को विशेष सहमति दी जाएगी। नेगेटिव-...

    और पढ़ें