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शहर की पहली फोरलेन:वैकल्पिक मार्ग फिर भी फाेरलेन पर भारी वाहनाें की आवाजाही, दबाव में उखड़ रही

काेरबा7 दिन पहले
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दबाव के कारण उखड़ रही सड़क। - Dainik Bhaskar
दबाव के कारण उखड़ रही सड़क।
  • सीएसईबी चाैक से मेजर ध्यानचंद चाैक तक 46 कराेड़ से बनी है 5.50 किमी सड़क
  • एक महीने पहले ही फोरलेन से आवाजाही शुरू की, अब ये हाल

शहर में सीएसईबी चाैक से मेजर ध्यानचंद चाैक तक लगभग 46 कराेड़ की लागत से पहला फाेरलेन बना है, लेकिन इस फाेरलेन के खुलते ही भारी वाहनाें की आवाजाही शुरू हाे गई है। इससे यातायात का दबाव पड़ने से सड़क पर ग्रहण लगने भी लगा है। भारी वाहनाें में ज्यादातर काेयला लदे ट्रेलर के चलने के कारण भार पड़ रहा है।

इससे फाेरलेन पर सड़क जगह-जगह उखड़ने लगी है। वह भी तब जब फाेरलेन काे खुले मुश्किल से 1 माह हुआ है। ऐसे में फाेरलेन पर भारी वाहनाें की आवाजाही जारी रहेगी ताे शहर के स्टेडियम राेड समेत अन्य सड़काें के जैसा हाल हाे सकता है। दूसरी ओर भारी वाहनाें के फाेरलेन से गुजरने के कारण राहगीराें काे भी परेशानी हाे रही है, क्याेंकि एक ताे सड़क पर भारी वाहनाें के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है, दूसरी ओर धूल का गुबार उठता रहता है। ऐसा नहीं कि दर्री बराॅज की ओर से भारी वाहनाें के शहर में आवाजाही के लिए दूसरा मार्ग नहीं है। राताखार से दर्री बराॅज तक गेरवाघाट बाइपास वैकल्पिक मार्ग है। बावजूद इसके ज्यादातर भारी वाहन फाेरलेन से हाेकर आवाजाही कर रहे हैं।

पहले सड़क थी टू-लेन: 5.50 किमी की फाेरलेन पहले थी हादसाें की सड़क
शहर से दर्री और आगे कटघाेरा की ओर जाने वाले सड़क पर शहर के सीएसईबी चाैक से दर्री बराॅज के दूसरे छाेर पर मेजर ध्यानचंद चाैक तक की दूरी 5.50 किमी है। नगर निगम ने इसे फाेरलेन बनवाया है। फाेरलेन से पहले सड़क टू-लेन थी। इसमें यातायात का दबाव ज्यादा हाेने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हाेती थी। इससे काेहड़िया के आसपास हादसाें की सड़क बन गई थी। फाेरलेन बनने के बाद फिर से भारी वाहनाें की आवाजाही जारी रही ताे आगे भी हादसाें का दाैर जारी रह सकता है।

नो एंट्री का झंझट भी नहीं: बाइपास पर गड्ढे-ब्रेकर इसलिए फाेरलेन का उपयाेग
दर्री बराॅज पुल समेत गेरवाघाट बाइपास पर जगह-जगह गड्ढे हैं। साथ ही दुर्घटना राेकने के लिए ब्रेकर भी बने हैं। दूसरी ओर नई फाेरलेन चकाचक है। ब्रेकर भी नहीं है। इसलिए दर्री बराॅज से शहर की ओर आवाजाही करने वाले ट्रेलर चालक फाेरलेन का उपयाेग कर रहे हैं। इससे एक ताे डीजल भी कम खपत हाे रही है। दूसरी ओर वैकल्पिक मार्ग गेरवाघाट बाइपास से पहले फाेरलेन से शहर पहुंच रहे हैं। साथ ही दर्री बराॅज से स्टेडियम राेड की ओर आवाजाही के दाैरान नाे एंट्री की झंझट भी नहीं है।

एक साल की देरी से पूरा हुआ फाेरलेन निर्माण कार्य
फाेरलेन सड़क बनाने के लिए वर्ष 2018 में प्रक्रिया शुरू हुई थी। टेंडर में विलंब हाेने से दिसंबर में काम शुरू हुआ। निर्माण कार्य अहमदाबाद गुजरात की कंपनी बैकबोन इंटरप्राइजेस प्राइवेट लिमिटेड ने पूरा किया है। फाेरलेन निर्माण पूर्ण करने की तय अवधि जुलाई 2020 थी, लेकिन काेराेना काल में लाॅकडाउन की वजह से काम ठप रहा। इसलिए दिसंबर 2020 तक का माैका दिया गया। इसके बाद मार्च 2021 तक कार्य पूरा करने काे कहा गया, लेकिन जुलाई तक कार्य पूरा हुआ। इस तरह फाेरलेन निर्माण में करीब सालभर की देरी हुई।

प्रशासनिक व्यवस्था के तहत वाहनाें की आवाजाही
डीएसपी ट्रैफिक शिवचरण सिंह परिहार के मुताबिक शहर समेत जिले की सड़काें पर भारी वाहनाें की आवाजाही प्रशासन द्वारा तय यातायात व्यवस्था के तहत हाेती है। शहर से बुधवारी बाजार-मुड़ापार हाेते उरगा की ओर जाने वाले मार्ग पर नाे एंट्री का टाइमिंग निर्धारित है। इसका विधिवत पालन कराया जा रहा है। सीएसईबी चाैक से दर्री बराॅज की ओर जाने वाले फाेरलेन पर नाे एंट्री नहीं लगे हाेने से उस पर भारी वाहनाें की आवाजाही पर राेक नहीं लगाई जा सकती।

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