तीन साल पूरे:लेकिन हसदेव एक्सप्रेस तीन माह तक रूट पर नियमित नहीं चली

कोरबा20 दिन पहले
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प्लेटफाॅर्म पर खड़ी हसदेव एक्सप्रेस। - Dainik Bhaskar
प्लेटफाॅर्म पर खड़ी हसदेव एक्सप्रेस।
  • 24 सितंबर 2018 को तत्कालीन रेल मंत्री ने की थी नियमित चलाने की घोषणा

जिले के यात्रियों को हसदेव एक्सप्रेस की सौगात मिले 6 अक्टूबर को तीन साल पूरा हो गया है। नियमित ट्रेन के रूप में चलाने की घोषणा के बाद यह दुर्भाग्य ही है कि रेल प्रशासन इसे 3 माह भी नियमित नहीं चला पाया। यह कोरोना महामारी के बाद शुरू तो हुई, लेकिन स्पेशल बनाकर इसे सप्ताह में सिर्फ 4 दिन ही चलाया जा रहा है। रूट पर कोरबा से रायपुर जाने व उसी दिन रायपुर से वापस कोरबा आने के लिए इससे बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

जनशताब्दी या इंटरसिटी की तरह एक ट्रेन चलाने की मांग कोरबा जिले के लोगों लंबे से कर रहे थे। इन मांगों को रेल प्रशासन तवज्जो नहीं दे रहा था। यहां तक कि जिले के जनप्रतिनिधियों की ओर से भी कोई पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इसी बीच 24 सितंबर 2018 को विधानसभा व लोकसभा चुनाव के पहले तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल का दौरा जिले में हुआ। हरदीबाजार में आयोजित एक सभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिले के लोकसभा सांसद, विधायक भी शामिल हुए। चुनावी फायदा को देखते हुए रेल मंंत्री ने सभा में हसदेव एक्सप्रेस तीन महीना की बजाय रोज चलाने और इसका लाभ कोरबा जिले के यात्रियों को दिलाने का वादा किया। दौरे के कुछ अरसा बाद 6 अक्टूबर 2018 को कवर्धा में आयोजित रेल कॉरिडोर परियोजना का शिलान्यास करने पहुंचे और वहां से ही वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से हसदेव एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। कोरबा के लोगों को नई ट्रेन तो मिल गई, लेकिन रेल अधिकारियों को यह रास नहीं आया। शुरू होेने के एक पखवाड़े बाद से ही कोई न कोई बहाना बनाकर इस ट्रेन को बाधित किया जाने लगा।

रेल अफसरों ने कोरोना महामारी काे बनाया ढाल
अफसरों को अन्य ट्रेनों के साथ हसदेव एक्सप्रेस को भी बंद करने का मौका कोरोना महामारी में मिल गया। पूरे देश में स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई है, लेकिन रेलवे की नजर में कोरबा में कोरोना मरीजों की संख्या आज भी बढ़ रही है। यही कारण है कि यहां पूर्व से मिली ट्रेनों को चलाने से बच रहे हैं। काफी प्रयास के बाद रेल प्रशासन हसदेव एक्सप्रेस को शुरू तो किया लेकिन सप्ताह में 4 दिन के लिए ही। इससे यहां के लोगों को घाेषणा के मुताबिक नियमित के रूप में इस ट्रेन का लाभ नहीं मिल पाया है।

12 दिन बाद ही होने लगी थी अफसरों को तकलीफ
जिला चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड एंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष व रेल मामलों के जानकार रामकिशन अग्रवाल ने बताया कि हसदेव एक्सप्रेस को शुरू हुए 12 दिन भी नहीं हुए थे कि रेलवे के वरिष्ठ अफसरों की ओर से यात्रियों की संख्या कम बताने की चर्चा शुरू कर दी गई थी,जबकि हकीकत यह थी कि हसदेव एक्सप्रेस के शुरू होने के साथ ही उसमें यात्रियों की संख्या बढ़ती चली गई। जैसे-जैसे लोगों को इस ट्रेन के शुरू होने की जानकारी होती गई, लाेगाें ने इसमें सफर करना शुरू कर दिया।

त्योहार में भी नहीं मिली स्थानीय यात्रियों को राहत
त्योहारी सीजन शुरू हो गया है, दशहरा, दीपावली, क्रिसमस तक जारी रहेगा। इसके बाद भी रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बंद ट्रेनों को शुरू नहीं किया जा सका है, जबकि अबतक जो ट्रेनें चल रही हैं, उनमें यात्रियों की इतनी भीड़ हो रही है कि सफर के दौरान बैठने के लिए सीट तक नहीं मिल पा रही।

सीपीटीएम ने कहा- कुछ दिनों के बाद रोज चलाएंगे
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मुख्य यात्री परिचालन प्रबंधक (सीपीटीएम) यशवंत कुमार चौधरी ने एक पखवाड़े पूर्व मिलने गए प्रतिनिधियों से कहा था कि हसदेव एक्सप्रेस रोज चलेगी इसके लिए कुछ दिन का समय दें। वे अपनी इस बात पर अभी भी अडिग हैं। मगर कब से शुरू होगी हसदेव एक्सप्रेस, इसकी एक निश्चित तिथि की जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। उनका कहना है कि फिर से हमारी ओर से इस ट्रेन को चलाने के लिए बोर्ड के पास प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही चलाया जाएगा।

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