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त्यौहारी सीजन में राहत:184 दिन बाद चलेगी छत्तीसगढ़ और वैनगंगा एक्सप्रेस

कोरबा8 महीने पहले
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  • 20 अक्टूबर से गेवरारोड-अमृतसर सप्ताह में 3 तो वैनगंगा एक्सप्रेस 1 दिन चलेगी

त्यौहारी सीजन में रेलवे की ओर से बड़ी राहत 2 एक्सप्रेस ट्रेनों को चलाने की घोषणा से दी है। इन दोनों ट्रेनों के चलने से नवरात्रि, दशहरा के साथ दीपावली में अपने घर गांव तक आसानी से पहुंच सकेंगे। कोविड के कारण बंद ट्रेनों को पटरी पर लाने की कवायद रेलवे बोर्ड ने शुरू कर दी है, लेकिन अभी भी एक बड़ी आबादी ट्रेन के सफर से वंचित रहेगी। इस वर्ग की जरूरत हसदेव एक्सप्रेस के शुरू होने से पूरी हो सकती है, जिसके शुरू होने का लोगों को अब भी इंतजार रहेगा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर से रोज चलने वाली गेवरारोड-अमृतसर छत्तीसगढ़ को रेलवे बोर्ड ने त्यौहारी सीजन में चलाने की घोषणा कर दी है। यह ट्रेन रोज की बजाय सप्ताह में 3 दिन चलेगी। वहीं एक द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस गाड़ी यशवंतपुर-कोरबा-यशवंतपुर को सप्ताह में एक चलाया जाएगा। ये दोनों यात्री ट्रेनों को 20 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलाने की अधिकृत जानकारी रेलवे बोर्ड ने बिलासपुर जोन के साथ साझा की है। लॉक डाउन के कारण बंद कर दी गई ये दोनों एक्सप्रेस ट्रेनें 184 दिन बाद फिर से पटरी पर आ जाएंगी। इन दोनों के चलने से कोरबा ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ के साथ अन्य प्रदेश के यात्रियों को सफर करने मिलने लगेगा।

आस्था, शिक्षा व इलाज की दृष्टि से जरूरी
रेलवे बोर्ड ने जिन दो ट्रेनों को चलाने की घोषणा की है। वह दोनों शहरों के रहने वालों के लिए ही नहीं वरन उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो आस्था के नाम से अमृतसर जाना चाहते हैं। बेंगलुरू एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है। जिले से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं वहां पढ़ाई करने जाते हैं। यही नहीं आपातकालीन स्थिति (चिकित्सा) में इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां जाते हैं। वहां के चिकित्सकों से अपाइंटमेंट बड़ी मुश्किल से मिल पाता है, ऐसे में जिन्हें मिला है, उनके लिए ये यशवंतपुर बहुत ही राहत देने वाली साबित होगी।

रोज चलने वाली ट्रेन की पड़ रही जरूरत
कोरबा में रहने वाला एक बड़ा वर्ग जिन्हें अपने ही प्रदेश की शहरों में आना-जाना पड़ता है। ऐसे लोग एक दिन में अपने काम निपटाकर लौट आते हैं। वहीं त्यौहार शुरू होने के साथ शैक्षणिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। इसलिए सबकी जरूरत एक ऐसी ट्रेन की है, जो सुबह यहां से रायपुर व दुर्ग तक जाए और उसी दिन शाम को लौटे। मलाल इस बात है कि लॉक डाउन के साढ़े 6 माह बाद भी ऐसी ट्रेन शुरू नहीं हो सकी है। अगस्त में गिनती के दिन हसदेव एक्सप्रेस को शुरू तो किया, लेकिन जैसे ही फेस्टिवल सीजन की शुरुआत हुई उसे बंद कर दिया गया।

हसदेव एक्सप्रेस को लेकर अब तक नहीं मिला कोई निर्देेश: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के सीपीआरओ साकेत रंजन ने कहा है कि अब तक हसदेव एक्सप्रेस को चलाने के लिए बोर्ड से कोई निर्देश नहीं मिला है। जैसे ही बोर्ड की मंजूरी मिलेगी उसे शुरू कर दिया जाएगा। इसकी जानकारी भी समय रहते उपलब्ध करा दी जाएगी।

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