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बिजली उत्पादन पर मंडरा रहा संकट:कैप्टिव पावर प्लांटाें में कोयला की सप्लाई रुकी

काेरबा15 दिन पहले
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  • स्थिति नहीं सुधरी ताे उत्पादन बंद हाेने की शंका

प्रदेश में कई उद्योग हैं, जो अपनी जरूरत की बिजली खुद बनाते हैं, जिनकी संख्या 250 से अधिक है। ये उद्योग पिछले करीब एक पखवाड़े से काेयला संकट से जूझ रहे हैं। एसईसीएल की ओर से उद्योगों का फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए) नवीनीकरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई है। इससे कई कैप्टिव पावर प्लांटाें के सामने काेयला संकट गहरा गया है।

सीपीपी बंद होने से उद्योगों का संचालन भी बंद होने का खतरा है। कॉल सेक्टर के जानकारों के अनुसार एसईसीएल ने एफएसए की बजाए ई-ऑक्शन से कोयला आपूर्ति का निर्णय लिया गया, जो ऑक्शन किए जा रहे हैं, उससे कैप्टिव प्लांटाें के लिए उनकी जरूरत का एक फीसदी कोयला ही मिल सकता है, जाे बहुत कम है। इसे देखते हुए शासन स्तर पर पहल करने की मांग हाेने लगी है। एसईसीएल में जहां काेयला नहीं मिल रहा है, वहीं काेल इंडिया की दूसरी कंपनियाें कैप्टिव प्लांटाें काे काेयला उपलब्ध करा रही है। एेसे में काेल इंडिया के कंपनियाें की अलग-अलग नीति से भी सवाल उठ रहे हैं।

पावर कंपनी के प्लांटाें में काेयला संकट गहराया
कैप्टिव पावर प्लांटाें के सामने जहां काेयला संकट खड़ा हाे गया है। वहीं राज्य पावर जनरेशन कंपनी के बिजली प्लांटाें के काेल स्टाॅक में काेई सुधार नहीं हुआ है। एक कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में एचटीपीपी में 6 दिन का काेयला 96 हजार टन काेयला है। डीएसपीएम में 51 हजार टन 7 दिन का काेयला व मड़वा प्लांट में 48 हजार टन 4 दिन का काेयला है।

प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही
प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ी हुई है। बारिश नहीं हाेने के चलते बिजली की डिमांड में बढ़त देखी गई। पीक ऑवर में बिजली की मांग 4900 मेगावाट से पार चल गई थी। बिजली की मांग अब भी इसके आसपास ही बनी हुई है। दूसरी तरफ पावर प्लांटाें काे नियमित रूप से जरूरत के अनुसार काेयला नहीं मिलने से समस्या बनी हुई है। उत्पादन बाधित हाेने की आशंका भी है।

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