तैयारियों में जुटी समितियां:नवरात्र के पहले दिन से दरबारों में पहुंचने लगी भक्तों की भीड़

कोरबा16 दिन पहले
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  • पंडालों में बंगाली कल्चर से होगी पूजा, षष्ठी को मूर्तियों की स्थापना, दशमी तक आराधना

कोरोना काल में दूसरी बार शारदीय नवरात्र शुरू हो गई है। पहले दिन जिले के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मनोकामना ज्योत कलश भी जगमगाने लगे हैं। पर शहर के हर मोहल्लों में पंडाल लगाकर देवी मां की मूर्ति स्थापना कर दशमी तक होने वाली पूजा की कमी इस बार बनी हुई है।

यह जरूर है कि जिन मोहल्लों व कालोनियों में वर्षों पुरानी मूर्ति स्थापना व पूजन अर्चना की परंपरा है, और बंगाली संस्कृति हावी रहती है उन स्थलों पर देवी मूर्ति स्थापना की तैयारी शुरू हो गई है। इन पंडालों में आयोजन समितियों की ओर से षष्ठी के दिन माता की मूर्ति स्थापित कर पूजा की परंपरा निभाई जाएगी। मां दुर्गा का अवतरण धरती पर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए बुधवार की दोपहर ही हो गया है। गुरुवार को घट स्थापना के साथ उनके 9 रूपों की पूजा शुरू हो गई है। देवी मंदिरों में भक्तों द्वारा जलने वाले मनोकामना ज्योत कलश भी देर रात तक लोग पहुंचकर जलाते रहे। मां सर्वमंगला मंदिर, मां भवानी मंदिर, मां मड़वारानी, मां कोसगाई दाई, मां दीपेश्वर दीपका, मां चोढ़ारानी, मां मातिन दाई समेत अन्य देवी मंदिरों में भक्तों के नाम की ज्योत प्रज्जवलित हो गई है। मुहूर्त के अनुसार घट स्थापना कर लोग अपने अपने घरों में भी देवी मां की पूजा में जुट गए हैं।

पूजन सामग्री विक्रेताओं की उम्मीद टूटी
जिला प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार देवी मंदिरों में कोई भी श्रद्धालु पूजन सामग्री माता को नहीं अर्पित कर सकेंगे। इसका खामियाजा मंदिरों के आसपास पूजन सामग्री की दुकान सजाने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोग मंदिर पहुंच तो रहे हैं, देवी मां का दर्शन भी कर रहे हैं, लेकिन पूजन सामग्री के बिना ही। ऐसे में पूजन सामग्री विक्रेताओं ने जो उम्मीद संजोए थे वह टूटती नजर आ रही है।

प्रशासन की शर्त सख्त होने से आयोजक हटे पीछे
जिला प्रशासन द्वारा कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए देवी प्रतिमा स्थापना व पूजन के लिए शर्त थोपी गई है। इसके कारण बीते साल की तरह इस नवरात्र में भी अधिकांश दुर्गा पूजा उत्सव समितियों द्वारा केवल औपचारिकता ही निभाई जा रही है। आयोजन के लिए अनुमति लेने से लेकर प्रोटोकाल का पालन करना सभी के लिए आसान नहीं रह गया है। यही वजह है कि जहां भव्य आयोजन होते थे, वहां शांति बनी हुई है। इसके बाद भी लोग नियमों का पालन करते हुए मां के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

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