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डिमांड में इजाफा:करतला ब्लॉक के ब्लैक राइस की मांग दक्षिण भारत तक पहुंची, कारोबार 35 लाख के पार

कोरबाएक महीने पहले
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  • 5 किसानों से हुई थी शुरुआत, अब 10 गांवों के 300 किसान ले रहे फसल

करतला ब्लॉक में काजू के उत्पादन के बाद ब्लैक राइस की खेती में भी अपनी नई पहचान बनाई है। तीन साल पहले 5 किसानों ने 10 हजार रुपए की बीज लेकर खेती की शुरुआत की थी। अब 10 गांवों के 300 किसान ब्लैक राइस की फसल ले रहे हैं। इस साल 35 लाख तक कारोबार पहुंच गया है। धान की डिमांड दक्षिण भारत तक है। मार्केट मिलने से अब 1 करोड़ तक का कारोबार होने की उम्मीद है। अभी पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में धान की आपूर्ति कर रहे हैं। इसी महीने 30 टन धान भेजा गया। अभी खरीफ धान 28 से 30 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। साथ ही पैकेजिंग कर मार्केट में भी पहुंचा रहे हैं। किसानों के समूह महामाया बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति लंबे समय से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग-अलग फसलों की खेती करने प्रोत्साहित कर रही है। इसमें नाबार्ड का भी सहयोग है। यहां के किसानों ने काजू का प्रोसेसिंग यूनिट आपस में सहयोग राशि से किया है। 10 गांव नवापारा, घिनारा, नोनदरहा, मदवानी, रामपुर, कोई, बोतली, टेंगनमार, केराकछार के किसान 200 एकड़ में ब्लैक राइस की परंपरागत खेती कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष लाखन सिंह का कहना है कि शुरुआत में मार्केट की जरूरत थी। इस साल पहली बार दक्षिण भारत से डिमांड आई है। आनजेनिक फूड प्राइवेट लिमिटेड कलकत्ता ने भी अनुबंध किया है। यह किसानों के लिए बड़ी बात है। इससे और भी किसान प्रोत्साहित होंगे। जो फायदा समिति को होता है उसे किसानों में ही बांटा जाता है। साथ ही धान की कीमत भी अच्छी मिल जाती है। अभी 40 से 45 टन धान निकल रहा था। इस साल 70 से 80 टन तक उत्पादन होने की संभावना है।

यहां की धान की फसल धमतरी से बेहतर, इसलिए डिमांड ज्यादा
मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव गजेंद्र चंद्राकर का कहना है कि करतला के धान की क्वालिटी धमतरी से भी बेहतर है। इसकी गुणवत्ता भी ठीक है। यहां के किसान परंपरागत खेती करते हैं। साथ ही श्री पद्धति से खेती कर किसान अधिक उत्पादन कर रहे हैं। यह बेहतर प्रयास है। परंपरागत खेती से एकड़ में 12 से 13 क्विंटल व श्री पद्धति से 18 क्विंटल तक धान का उत्पादन होता है।

ब्लैक राइस को बेचने से 5 गुना तक फायदा उठा रहे किसान
नोनदरहा के किसान बेदराम राठिया ने बताया कि धान में अभी किलो में 6 से 7 रुपए फायदा मिल रहा है। लेकिन चावल में अधिक फायदा है। इसमें 5 गुना तक फायदा मिलता है। क्योंकि इसका रेट 300 रुपए किलो है। एक किसान को एकड़ में 45 हजार रुपए तक मिल रहा है। दूसरे धान की खेती में लागत अधिक होने से मात्र 25 से 30 हजार रुपए ही मिलता था। इसी वजह से चावल को बेचने के लिए पैकेजिंग की शुरुआत की है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक है ये चावल ब्लैक राइस इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक है। साथ ही शुगर व बीपी वालों के लिए यह उपयोगी है। इसी वजह से इसकी डिमांड अधिक है। यहां के किसान पैकेजिंग कर चावल को 300 रुपए में मार्केट में उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर मार्केटिंग कंपनियां इसी चावल को 390 रुपए में ऑनलाइन बेच रही हैं। यहां के किसान भी अब ऑनलाइन कारोबार की शुरुआत करने वाले हैं।

राइस मिल लग जाए तो किसानों को मिलेगा अधिक फायदा
समिति के अध्यक्ष लाखन सिंह राठिया का कहना है कि धान का कारोबार करने के साथ ही चावल भी पैकेजिंग कर मार्केट में पहुंचा रहे हैं। लेकिन अभी सबसे अधिक परेशानी राइस मिल का नहीं होना है। क्षेत्र में एक भी राइस मिल नहीं है। इस वजह से किसान राइस मिल लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए प्रशासन से सहयोग मांगेगे। अगर राइस मिल लग जाता है तो और भी अच्छी प्रजाति के चावल का उत्पादन करेंगे।

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