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धोखाधड़ी:धान खरीदी घोटाले में एफआईआर के बाद देवेंद्र पांडेय फरार, 5 हजार का इनाम

कोरबा3 महीने पहले
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  • 8 साल पहले के मामले में एक करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप, तब पांडेय थे जिला सहकारी बैंक बिलासपुर का अध्यक्ष

भाजपा नेता देवेंद्र पांडेय की गिरफ्तारी के लिए कोरबा पुलिस ने 5 हजार रुपए के ईनाम की घोषणा की है। वर्ष 2012 में सोहागपुर (उरगा) में धान खरीदी के दौरान हुए घोटाले मामले में न्यायालय के आदेश पर नामजद होने से बाद से फरार है। एसपी अभिषेक मीणा के मुताबिक देवेंद्र पांडेय के गिरफ्तारी के लिए उसे फरार आरोपी घोषित किया गया है।

दरअसल धोखाधड़ी के उक्त मामले में धान खरीदी केंद्र से जुड़े 5 कर्मचारियों को पुलिस ने आरोपी बनाया था। प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट सीमा प्रताप चंद्रा के न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। जिसमें अभियोजन की ओर से आरोपियों के खिलाफ प्रर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। जिस पर मजिस्ट्रेट ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया। दूसरी ओर उन्होंने घोटाले के दौरान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर के अध्यक्ष रहे देवेंद्र पांडेय की भूमिका संदिग्ध बताते हुए पुलिस को विवेचना कर अग्रिम कार्रवाई का आदेश दिया। इसकी जानकारी मिलने के बाद से देवेंद्र पांडेय फरार है। पुलिस ने नामजद आरोपी बनाने के बाद देवेंद्र पांडेय की गिरफ्तारी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी।

धान खरीदी में घोटाले का मामला
सोहागपुर धान खरीदी केंद्र में 5 नवंबर 2011 से 15 फरवरी 2012 के बीच 445 किसान से 6 करोड़ 17 लाख 75 हजार 136 रुपए की धान खरीदी की गई थी। रिकार्ड में 4 करोड़ 51 लाख 80 हजार की खरीदी दिखाई। इस तरह 1 करोड़ 10 लाख 61 हजार 576 रुपए का घोटाला सामने आया था। मामले में जुलाई 2012 में एफआईआर कराई गई। पुलिस ने इसके लिए सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष गणेश प्रताप सिंह, केंद्र प्रभारी बुटुक राम सिदार, कम्प्यूटर आपरेटर खगेश सिंह कंवर, समिति प्रबंधक बजूर सिंह राज व नोडल अधिकारी दादूलाल टंडन को आरोपी बनाया था।

क्वारेंटाइन का बहाना, फिर फरार
पुलिस के मुताबिक कोर्ट के आदेश पर 1 माह पहले धान घोटाला मामले में देवेंद्र पांडेय की भूमिका की विवेचना के लिए नोटिस भेजकर थाना बुलाया था। लेकिन उसने अपने भाई के कोरोना संक्रमित होने की वजह से होम क्वारेंटाइन होने का बहाना बनाया। बाद में बयान देने आने की बात कहते हुए गिरफ्तारी से बचने देवेंद्र पांडेय फरार हो गया। पुलिस ने घंटाघर व पुरानी बस्ती के अलावा रायपुर स्थित उसके मकान में दबिश दी लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही है। लेकिन वह लोकेशन बदल रहा है।

मारपीट के केस में हुआ था गिरफ्तार
सितंबर 2020 में रामपुर विधायक व पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के पुत्र संदीप कंवर से मारपीट के आरोप में देवेंद्र पांडेय व उसके पुत्र शिवम पांडेय के खिलाफ रामपुर चौकी में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले में गिरफ्तारी के लिए ननकीराम कंवर ने आंदोलन की चेतावनी दी थी। जिसके बाद पुलिस ने देवेंद्र पांडेय व शिवम पांडेय को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। देवेंद्र पांडेय पहले ननकीराम कंवर का बेहद करीबी था। लेकिन उनके बीच सृष्टि हॉस्पिटल का विवाद आने पर दूरियां बन गई।

ईओडब्ल्यू को जांच की स्वीकृति
देवेंद्र पांडेय के खिलाफ राज्य शासन ने ईओडब्ल्यू को जांच करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। ईओडब्ल्यू ने एक दशक पहले देवेंद्र पाण्डेय व सहकारी बैंक के तत्कालीन सीईओ डीसी ठाकरे के खिलाफ प्रारंभिक जांच के बाद केस दर्ज किया था लेकिन जांच शुरू नहीं हो सकी थी। शासन से इसके लिए स्वीकृति मांगी गई थी। पिछले दिनों रामपुर विधायक कंवर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा था। जिसके बाद शासन की ओर से सहकारिता विभाग के अवर सचिव एसके सिंह ने ईओडब्ल्यू रायपुर के पुलिस अधीक्षक को जांच की अनुमति प्रदान की है।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज, अब हाईकोर्ट में प्रयास: धोखाधड़ी के मामले में आरोपी के रूप में नामजद किए जाने के बाद से फरार देवेंद्र पांडेय की ओर से जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका लगी थी। जो खारिज हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दी है। साइबर सेल की टीम को भी जांच में लगाया गया है।

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