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जिला अस्पताल के कोरोना जांच केंद्र का हाल:जांच के चक्कर में मरीज जमीन पर, न बैठने और न ही लेटने की मिल रही जगह

कोरबा8 महीने पहले
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जांच केंद्र में जांच कराने पहुंचा मरीज इस तरह जमीन पर लेटा रहा। - Dainik Bhaskar
जांच केंद्र में जांच कराने पहुंचा मरीज इस तरह जमीन पर लेटा रहा।
  • निजी अस्पतालों में इलाज से पहले मांग रहे कोरोना रिपोर्ट, इसलिए केंद्र तक ले जाना मजबूरी

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला अस्पताल परिसर में कोरोना जांच केंद्र खोला गया है, जहां एंटीजन टेस्ट से जांच कर तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। इसलिए लोग सीधे पहुंचकर जांच करा रहे हैं। इसके अलावा निजी अस्पतालों में सीधे भर्ती नहीं लेने पर मरीजों को लेकर उनके परिजन भी जांच कराने केंद्र में पहुंचते हैं। ज्यादातर मरीज लक्षणात्मक अर्थात बीपी-शुगर, निमोनिया, श्वांस रोग, टीबी व अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित होते हैं, लेकिन उनके लिए जांच केंद्र में सुविधा का रोना है। क्योंकि ऐसे गंभीर मरीजों के लिए जांच केंद्र या आसपास न तो बैठने और न ही लेटने की सुविधा है। ऐसे में बैठने में असमर्थ मरीजों को केंद्र के आसपास जमीन पर लेटना पड़ रहा है। परिजन भी सुविधा के अभाव में जांच होने और रिपोर्ट मिलने तक आंखों के सामने यह देखने को मजबूर होना पड़ता है, जबकि गंभीर समेत गर्भवती, बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग से जांच में प्राथमिकता या आराम करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

अस्पतालों में भर्ती होने दें कोरोना रिपोर्ट
कोरोना संक्रमण के चलते मरीजों की मुसीबत बढ़ा दी है। पहले जहां निजी अस्पतालों में सीधे इलाज होता था, वहीं अब संक्रमण से बचने पहले कोरोना रिपोर्ट लाने को कहा जाता है। भले ही मरीज की हालत गंभीर क्यों न हों, जब तक कोरोना टेस्ट रिपोर्ट नहीं मिलती, निजी अस्पतालों में भर्ती भी नहीं किया जाता है। शहर के निजी सेंटर में शुल्क देना पड़ता है, इसलिए गरीब व मध्यम वर्ग के मरीज जांच कराने के लिए जिला अस्पताल के जांच केंद्र में पहुंचते हैं।

2 घंटे फर्श पर लेटा रहा बुजुर्ग मरीज
करतला निवासी 60 वर्षीय एक मरीज को टीबी है। उसकी तबियत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर कोसाबाड़ी के एक निजी अस्पताल में पहुंचे थे, जहां से पहले कोरोना टेस्ट कराने को कहा गया। परिजन ऑटो में मरीज को लेकर जिला अस्पताल परिसर के जांच केंद्र पहुंचे, जहां जांच में समय लगने की बात पर ऑटो चालक छोड़कर चला गया। इसके बाद जांच और रिपोर्ट आने तक 2 घंटे बुजुर्ग मरीज पास ही फर्श पर लेटा रहा।

रात में भटके, 112 की मदद से प्रसव
सीएसईबी काॅलोनी निवासी गर्भवती अनिता भारद्वाज को पीड़ा उठने पर परिजन निजी अस्पताल ले गए, जहां भर्ती लेने से पहले कोरोना टेस्ट कराने को कहा। रात को कोरोना जांच कहां कराते इसलिए वे ढोढ़ीपारा के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां दरवाजा खुला नहीं। फिर अन्य निजी अस्पताल गए तो वहां से भी लौटा दिया। परिजन ने 112 से संपर्क किया तब पुलिस के प्रयास से गीतादेवी हॉस्पिटल में प्रसव हुआ।

सोशल डिस्टेंसिंग नहीं, कोरोना जांच रहे या बांट रहे: जिला अस्पताल परिसर में अस्पताल चौकी के पीछे मां यशोदा वात्सल भवन में खुले कोरोना जांच केंद्र में जांच के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है, लेकिन यहां की व्यवस्था से स्थिति ऐसी है कि कर्मचारी कोरोना जांच रहे हैं या बांट रहे हैं यह समझ नहीं आता। क्योंकि न तो यहां पंजीयन काउंटर के बाहर जांच कराने पहुंचे लोगों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन होता है और न ही जांच में कोरोना पॉजिटिव मिले मरीजों को अलग से चिन्हित कर कोविड हॉस्पिटल या होम आइसोलेट करने की व्यवस्था।

रोजाना 200 लोगों की जांच, 25 फीसदी पॉजिटिव
जिला अस्पताल परिसर के जांच केंद्र के आंकड़े के अनुसार प्रतिदिन वहां करीब 200 लोग कोरोना जांच कराने पहुंचते हैं। इनमें से औसतन 25 फीसदी अर्थात 50 मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। इसके अलावा जिला अस्पताल के अंदर भी अलग से एंटीजन टेस्ट की जाती है। इसमें वहां अस्पताल के आईपीडी में इलाज कराने पहुंचे या आइसोलेशन वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों व उनके परिजन की कोरोना जांच की जाती है।

सवाल पूछने पर सीएस बोले- करेंगे व्यवस्था
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एके तिवारी के मुताबिक कोरोना सैंपल कलेक्शन बूथ में कोरोना जांच के लिए पहुंचने वाले मरीजों के लिए जरूरी व्यवस्था की गई है। एंटीजन टेस्ट से जांच होने से रिपोर्ट जल्द मिल जाता है। गंभीर मरीजों को यदि परेशानी हो रही है तो इसके लिए सुविधा बढ़ाई जाएगी। जांच के दौरान उन्हें प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जाएगा।

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