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उरगा के तिलकेजा गांव का मामला:अंत्येष्टि की तैयारी के दौरान अम्मा के हिले हाथ-पैर जिंदा होने की आस में परिजन ले गए अस्पताल, मौत

कोरबा25 दिन पहले
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  • हलचल देख गांव के डॉक्टर को बुलाया, उसने भी बताया जिंदा हैं अम्मा
  • 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को जिला अस्पताल ले गए, यहां डॉक्टर ने मृत घाेषित कर दिया

तिलकेजा गांव में एक बुजुर्ग महिला की अंत्येष्टी की तैयारी के दाैरान उसके शरीर में हलचल हुई तो परिजन ने गांव के प्राइवेट डाॅक्टर काे दिखाया ताे उसने जीवित हाेना बताया। गम में डूबे परिजन ईश्वर का चमत्कार मानकर खुश हाे गए और उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाॅक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घाेषित किया ताे परिवार की खुशियां फिर से मातम में बदल गई।

उरगा थाना अंतर्गत तिलकेजा गांव की 80 वर्षीय संतराबाई खरे काे बुधवार काे परिजन ने शहर के काेसाबाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। शुक्रवार शाम परिजन उसे मृत मानकर घर ले गए। शनिवार सुबह परिजन गमगीन माहाैल में महिला की अंत्येष्टी में जुट गए। महिला काे नहलाकर शरीर पर हल्दी लगाने के साथ ही कफन ढंका जा रहा था। इस दाैरान परिजन काे महिला के शरीर में हलचल दिखी। हाथ-पैर हल्के-हल्के हिलने लगे, मुंह भी खुलने लगा था। परिजन ने गांव के रिश्तेदारी में आने वाले प्राइवेट डाॅक्टर काे बुलाया। उसने जांच के बाद उसे जीवित बताया। परिजन गाड़ी का इंतजाम कर महिला काे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डाॅक्टर ने जांच के बा उसे मृत घाेषित कर दिया। इसके बाद परिजन महिला के शव काे वापस लेकर गांव लाैटे और मुक्तिधाम में अंत्येष्टि की।

पहले गीतादेवी मेमोरियल अस्पताल में वेंटिलेटर में चल रहा था महिला का इलाज

आराेप-जीवित हाेने के बाद भी मृत बता साैंपा
मृतका संतराबाई के पाेते गाैतम कुमार खरे ने निजी अस्पताल पर आराेप लगाया है। उनके मुताबिक अस्पताल में इलाज का खर्च 70 हजार रुपए मांगा गया। गरीब परिवार हाेने की बात कहने पर मुश्किल से पैसा कम किया गया। वहीं संतराबाई के जीवित हालत में हाेते हुए उसे मृत बताकर ले जाने काे कहा गया। शुक्रवार की शाम वे उन्हें मृत मानकर वे घर ले गए। अंधेरा हाेने के कारण रातभर उन्हें घर पर रखकर राेते रहे। शनिवार सुबह अंत्येष्टी की तैयारी कर रहे थे, तब शरीर में हलचल हाेने पर उसके जीवित हाेने का पता चला, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचते तक माैत हाे गई। यदि शुक्रवार शाम निजी अस्पताल से जीवित हाेने का पता चलता ताे वे दूसरे अस्पताल ले जाकर उसकी जान बचा सकते थे।

आराेप निराधार, जीवित हालत में किया डिस्चार्ज
गीतादेवी मेमाेरियल हाॅस्पिटल के प्रवक्ता स्वप्निल झा ने कहा संतराबाई के परिजन का आराेप निराधार है। बुधवार सुबह महिला काे अचेत अवस्था में अस्पताल लाए थे। स्थिति नाजुक थी। वेंटिलेटर में उसका इलाज चल रहा था। शुक्रवार शाम तक 62,900 रुपए का बिल बना था। परिजन ने खर्च नहीं उठा पाने की बात कह 21 हजार जमा किए और डिस्चार्ज करने कहा। बिना इलाज के जान का खतरा हाेने की समझाइश दी थी, फिर भी वे नहीं माने। संतराबाई के बेटे दाऊराम ने इसके लिए डाॅक्टरी सलाह के खिलाफ छुट्टी का सहमति-पत्र भरकर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कराया। उनकी हालत देख फीस में अस्पताल प्रबंधन ने 41 हजार की छूट दी। सभी कागजात की काॅपी अस्पताल में उपलब्ध है। परिजन काे भी ये दस्तावेज दिए हैं।

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