3 सप्ताह में तैयारी पूरी कर देनी हाेगी रिपाेर्ट:फैकल्टी-स्टाफ की कमी बनी वजह, काेरबा को मेडिकल काॅलेज में नहीं मिली मान्यता

काेरबा2 महीने पहले
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  • नेशनल मेडिकल कमीशन ने जारी की प्रारंभिक रिपाेर्ट, काेरबा का परफार्मेंस अन्य दाेनाें काॅलेज से बेहतर, तीनाें काे फिर माैका

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से जारी प्रारंभिक रिपाेर्ट में काेरबा मेडिकल काॅलेज समेत प्रदेश के तीनाें नए मेडिकल काॅलेज काे फैकल्टी और स्टाफ की कमी के कारण मान्यता नहीं मिल सकी है। हालांकि कमीशन ने तीनाें काॅलेज काे कमी काे दूर करने 3 सप्ताह का माैका दिया है। साथ ही मेडिकल काॅलेज प्रबंधन अब स्टाफ की कमी काे दूर करने की तैयारियाें में जुट गए हैं।

हालांकि कमीशन के रूख से काेरबा मेडिकल काॅलेज काे इसी वर्ष अनुमति मिलने की ज्यादा संभावना दिख रही है। प्रदेश में कोरबा, महासमुंद और कांकेर में खुले 3 नए सरकारी मेडिकल काॅलेज काे नेशनल मेडिकल कमीशन ने एमबीबीएस की पढ़ाई (चिकित्सा शिक्षा) के लिए मान्यता नहीं दी है। हालांकि अंकाें के आधार पर तीनाें काॅलेज काे कमीशन ने कमी दूर कर तैयारी पूरी करने एक और माैका जरूर दिया है। इसके लिए 3 सप्ताह अर्थात 21 दिन का समय दिया है। कमी दूर कर कमीशन काे 10 अक्टूबर तक रिपाेर्ट भेजनी है। स्टाफ की कमी के मामले में काेरबा मेडिकल काॅलेज में 42 प्रतिशत की कमी पाई गई है, जबकि महासमुंद और कांकेर में 90 प्रतिशत से ज्यादा कमी मिली है।

मान्यता करीब, स्टाफ की कमी दूर करने मिला माैका
काेरबा मेडिकल काॅलेज के डीन डाॅ. वायडी बड़गईया के मुताबिक नेशनल मेडिकल कमीशन ने प्रारंभिक रिपाेर्ट के आधार पर काॅलेज मान्यता के करीब है। रिपाेर्ट में सिर्फ स्टाफ की कमी का उल्लेख है, जिसे दूर करने 3 सप्ताह का समय दिया है। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। तय स्टाफ व फैकल्टी की नियुक्ति करवाकर रिपाेर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद निश्चित ही चिकित्सा शिक्षा के लिए मान्यता मिल जाएगी।

एसआर-जेआर में 10 डाॅक्टराें ने दी ज्वाइनिंग
नेशनल मेडिकल कमीशन ने प्रदेश के तीनाें नए मेडिकल काॅलेज में फैकल्टी की कमी हाेना पाया। हालांकि काेरबा काॅलेज का सबसे आखिर में निरीक्षण हाेने की वजह से यहां पदस्थ किए गए 51 फैकल्टीज में 50 फीसदी ने ज्वाइनिंग दे दी। इसलिए इस कमी के मामले में कुछ हद तक काेरबा काॅलेज काे राहत मिल गई। जिन फैकल्टी ने अब तक ज्वाइनिंग नहीं दी है, अब उन्हें नाेटिस भेजा है। वहीं एसआर-जेआर (सीनियर रेसीडेंट व जूनियर रेसीडेंट) बनाए गए 18 डाॅक्टराें में 8 ने ज्वाइनिंग नहीं दी है। उन्हें भी डीएमई ने जल्द ज्वाइनिंग का निर्देश दिया है। वहीं 13 नए डाॅक्टराें की पाेस्टिंग की जा रही है।

जानिए... क्या है कमी और इसे कैसे दूर किया जाएगा
स्टाफ की कमी: नेशनल मेडिकल कमीशन ने काेरबा मेडिकल काॅलेज का एक माह पहले निरीक्षण किया था। तब मेडिकल काॅलेज के लिए आधारभूत संरचना-संसाधन, फैकल्टी की उपलब्धता, स्टाफ (मैनपावर) समेत अन्य जरूरी जानकारी ली थी। इसमें स्टाफ की 40 प्रतिशत कमी पाई गई है। इसके पीछे एक वजह यह है कि मेडिकल काॅलेज की तैयारी में प्रबंधन ने जाेर लगाया, लेकिन शासन-प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। पर्याप्त समय हाेने के बाद मेडिकल काॅलेज के लिए स्टाफ की कमी दूर नहीं की गई। शासन ने नई भर्ती की अनुमति भी नहीं दी और न ही फैकल्टीज की तरह कर्मचारियाें की पदस्थापना की गई। अब मेडिकल काॅलेज प्रबंधन द्वारा संविदा और आउटसाेर्सिंग के जरिए कर्मचारियाें की भर्ती कर स्टाफ की कमी काे दूर किया जाएगा।

संभावना: काेरबा काे बिना निरीक्षण मान्यता
चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अधिकारी के मुताबिक एनएमसी की प्रारंभिक रिपाेर्ट में तीनाें नए सरकारी मेडिकल काॅलेज में स्टाफ की कमी अहम है, जो कॉलेज में कार्यालय, अस्पताल व लैब के लिए जरूरी है। महासमुंद व कांकेर में फैकल्टी और स्टाफ के अलावा अन्य कमियां हैं। काेरबा में सिर्फ स्टाफ की कमी है। इसलिए तीनाें काॅलेज काे कमी दूर कर 10 अक्टूबर तक रिपाेर्ट भेजनी हाेगी। काेरबा काॅलेज के लिए आवश्यक हाेने पर ही एनएमसी की टीम निरीक्षण करेगी नहीं ताे रिपाेर्ट के आधार पर ही मान्यता मिल जाएगी, जबकि महासमुंद-कांकेर काॅलेज में ज्यादा कमी हाेने से एनएमसी की टीम निरीक्षण के लिए आएगी।

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