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धर्म :आज से सभी मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा विराम, व्रत-कथा का महत्व

कोरबा15 दिन पहले
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  • देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह के साथ पुन: शुरू हो जाएंगे शुभ कार्य
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देवशयनी एकादशी 1 जुलाई को है। इस दिन से भगवान विष्णु अगले 4 महीने तक विश्राम की मुद्रा में रहेंगे। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी मंगलवार को शाम 7.49 बजे से शुरू होकर 1 जुलाई को शाम 5.30 बजे तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु के शयनकाल अवधि में अर्थात अगले 4 माह तक कोई भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं करना चाहिए। इस दौरान व्रत, कथा, गंगा स्नान, पूजा, तर्पण आदि करने से पुण्य मिलता है। ज्योतिष पं.विवेकशील पाण्डेय के अनुसार इस बार 1 जुलाई से 25 नवंबर तक देवगणों का विश्रामकाल रहेगा। चतुर्मास तक विश्राम में रहने के कारण कोई भी विवाह, मुंडन संस्कार अथवा गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह के साथ भगवान के जागृत होते ही मांगलिक कार्यों पर लगने वाला विराम समाप्त हो जाएगा। इस एकादशी को आषाढ़ी एकादशी भी कहा जाता है। ज्योतिष पाण्डेय ने बताया कि इस बार देवों के विश्राम का काल 4 नहीं बल्कि अधिमास के कारण 5 माह तक लोगों को मांगलिक कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ेगा। 

दान, धर्म ध्यान व साधना का माह है अधिकमास 
चातुर्मास को हिंदू धर्म में व्रत, भक्ति व शुभ कर्म का मास कहा गया है। ध्यान व साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह अहम होता है। देवों की कृपा पाने के लिए लोगों को इस पूरे मास के दौरान व्रत, कथा, गंगा स्तान, पूजा तर्पण आदि करना चाहिए। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी के बीच अधिमास होने से दान, ध्यान, धर्म व साधना का विशेष महत्व होता है। ऐसा करने वालों को न केवल मानसिक शांति वरन सामाजिक सुख समृद्धि का भी योग रहता है।

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