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मूर्तिकारों का दर्द:गणेश चतुर्थी 10 को; अब तक 5 फीसदी मूर्तियां भी बुक नहीं हुईं, इधर कर्जदार करने लगे तकादा

कोरबा20 दिन पहले
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गणेश जी की मूर्ति को अंतिम टच देती युवती। - Dainik Bhaskar
गणेश जी की मूर्ति को अंतिम टच देती युवती।
  • उधार में रुपए लेकर मूर्तियां बनाकर खरीदारों के आने का कर रहे इंतजार, मूर्ति निर्माण की लागत भी बढ़ी
  • डर- मूर्तियां नहीं बिकीं तो वे हो जाएंगे कर्जदार, उम्मीद... कम से कम लागत ही निकल जाए

गणेश चतुर्थी 10 सितंबर को है। इस दौरान मूर्तियों की डिमांड बढ़ जाती है। मूर्तिकार भी महीनों पहले से जुट जाते हैं। हर बार गणेश चतुर्थी से एक पखवाड़ा पहले ही बुकिंग भी शुरू हो जाती थी। इस बार मूर्तियों की बुकिंग कराने वाले कम लोग ही पहुंच रहे हैं, त्योहार को अब महज 3 दिन बाकी हैं।

मूर्तियों की 5 फीसदी बुकिंग भी लोग नहीं करा पाए हैं। इस कारण अंदर ही अंदर मूर्तिकार सहमे हुए हैं। फिर भी वे टूटे नहीं हैं, उनका कहना है कि उनकी किस्मत में मायूसी ही लिखी होगी तो हम क्या कर सकते हैं। अभी त्योहार में 3 दिन बाकी हैं। इसमें जो होगा, अच्छा ही होगा। सोमवार को सीतामढ़ी स्थिति मूर्तिकारों के ठिकानों पर जाकर उनके हालात देखने को मिला। सामने से ये मूर्तिकार भले ही खुश नजर आ रहे थे, लेकिन अंदर से वे सहमे हुए दिखे। कोरोना महामारी के कारण हर तरह के कारोबार प्रभावित हुए हैं।

इससे त्योहारों से जुड़े कारोबार भी अछूते नहीं रहे। महामारी में दो साल से कारोबार चौपट हो रहा है। इस साल भी मूर्तिकारों को नुकसान हो रहा है। बड़ी मूर्तियों की मांग नहीं है, छोटी मूर्ति पर उन्हें आय की उम्मीद है, लेकिन इन मूर्तियों की भी डिमांड अब तक तेज नहीं होने से लागत निकलने की चिंता सताने लगी है। मूर्तिकारों ने बताया कि उन्हें जिन छोटी मूर्तियों से कमाई की उम्मीद है, उसकी भी बाजार में मांग पहले जैसी नहीं है।

जानिए... किस तरह की परेशानी से गुजर रहे हैं मूर्तिकार

एक लाख रुपए खर्च कर 300 मूर्तियां बना लिए हैं, परिवार के 6 सदस्य 15 दिन से जुटे
सीतामढ़ी में 45 साल से मिट्टी की मूर्तियां गढ़ने वाली बुधवारा बाई प्रजापति का कहना है कि कोविड महामारी में छोटी मूर्तियों की अधिक डिमांड आएगी यह सोचकर एक लाख रुपए कर्ज लेकर 300 मूर्तियां बना ली हैं। इसमें परिवार के 6 सदस्य 15 दिन से लगे हुए हैं। खरीदने वाले अब तक सामने नहीं आए हैं। बुधवारा बाई हिम्मत नहीं हारी हैं, उन्हें उम्मीद है गणेश चतुर्थी के दिन उनकी सभी मूर्तियां बिक जाएंगी।

डेढ़ हजार की मिट्टी 3 हजार में खरीदनी पड़ी है अब तक न मूर्तियां बिकी न बुकिंग ही हुई
बुधवार साय भी 450 मूर्तियां बना चुके हैं। डेढ़ हजार ट्रैक्टर की मिट्टी इस बार 3 हजार रुपए में खरीदनी पड़ी है। सीजन में इस व्यवसाय से परिवार का भरण-पोषण होता है। बीते साल की तरह इस बार भी लगता है, उनकी उम्मीदें टूट जाएंगी। परिवार के 8 सदस्य 20 दिनों से दिन-रात मूर्तियां बना रहे हैं। गणेश पूजा शुरू होने में 3 दिन बाकी हैं, लेकिन अब तक मूर्तियां नहीं ही बिक पाई और न ही किसी ने बुकिंग कराई है।

इस बार नुकसान हुआ तो टूट जाएंगी उम्मीदें लोग आते हैं, कीमत पूछकर चले जाते हैं
मूर्तिकार अमृतलाल प्रजापति का कहना है कि इस बार अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। ऐसा नहीं हुआ तो उनके परिवार का हर सदस्य टूट जाएगा। सामान्य सीजन में इस व्यवसाय से एक से डेढ़ लाख रुपए मिल जाते थे। पर बीते साल कोरोना महामारी के कारण मूर्तियां ही नहीं बनाए। इस बार 80 हजार रुपए कर्ज ले कर मूर्तियां बनाए हैं। अब तक जो लोग आ रहे हैं, सिर्फ देखने व कीमत पूछने वाले हैं।

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