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अनदेखी:पानी और मेंटेनेंस का चार्ज पूरा वसूल रहा हाउसिंग बोर्ड लेकिन फ्लैट वाली कॉलोनियों में नहीं कराता मरम्मत

कोरबा4 दिन पहले
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  • अधिकांश मकानों में रहते हैं किराएदार, इससे खुद का मकान नहीं होने से चाहकर भी नहीं करा पाते मरम्मत

हाउसिंग बोर्ड द्वारा निगम क्षेत्र में बनाई गई फ्लैट वाली आवासीय काॅलोनियों की स्थिति बहुत ही कम समय में जर्जर होने लगी है। मकानों में दरारें आना जहां सामान्य बात है, वहीं पीने के पानी के लिए बिछाई गई पाइप लाइनों में टूट-फूट होने से मकानों की दीवारें अंदर ही अंदर खोखली होने लगी हैं। इसके बाद भी हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी शिकायतों के बाद भी दुरुस्त करने की दिशा में सोचना लगभग बंद ही कर दिए हैं। इससे अब वहां रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। पाइप लिकेज की बात हो या सीढ़ियों के टूटने-फूटने की, इसका काम भी विभाग नहीं कराता है। सीढ़ियों के ऊपर बने छज्जे कब गिर जाएं, कुछ नहीं कह सकते। काॅलोनियों में सार्वजनिक रूप से आने वाली समस्या की ओर वहां रहने वालों का भी ध्यान नहीं जाता। इससे जिसे परेशानी होती है, वे ही लोग आगे आते हैं, लेकिन उनकी भी विभाग में सुनवाई नहीं होती। मजेदार बात यह है कि हाउसिगं बोर्ड हर मकान मालिक से अब पानी के अलावा मेंटेनेंस चार्ज भी वसूलने लगा है। इसके बाद भी मरम्मत नहीं करा रहा है।

सबसे खराब स्थिति निगम क्षेत्र में बनी काॅलोनियों की, ज्यादातर जर्जर
जिले में अब तक बनी काॅलोनियों में सबसे कम समय में सबसे अधिक खराब स्थिति निगम क्षेत्र में बनी काॅलोनियों की हो चुकी है। अधिकतम 15 तो न्यूनतम 7 साल की काॅलोनियों के मकान देखने से ऐसा लगता है कि 30 से अधिक के हो गए हैं। इनमें बरबसपुर में बने 168, खरमोरा में 180, जेंजरा में 155, रामपुर में 516 और गोकुलनगर में बने 168 मकान शामिल हैं। इन काॅलोनियों में बढ़ती समस्या से साफ पता चलता है कि विभाग ने निर्माण के समय उचित माॅनिटरिंग नहीं की होगी।

मकान मालिक नहीं रहते, किराए में रहने वाले नहीं देते ध्यान
हाउसिंग बोर्ड की कोई भी काॅलोनी क्यों न हो। अधिकांश ऐसे लोगों ने मकान लिया हैं, जिन्हें उसकी जरूरत ही नहीं है। वे मकान को देखने तक नहीं आते। ऊपर से किराए में देकर सिर्फ राशि वसूलने तक ही सीमित हैं। ऐसे में उनके मकान से शुरू होने वाली समस्या से अगल-बगल के लोगों की परेशानी शुरू हो जाती है। इसके समाधान के लिए वे लोग ध्यान नहीं देते। शिकायत करने पर विभाग के लोग भी आगे नहीं आते हैं, जिसके कारण अधिकांश मकानों की छत अंतिम स्टेज में पहुंच चुकी है।

पाइप लिकेज होने के कारण छत पर बिखरते रहता है पानी
काॅलोनियों में जहां के लोगों में सामंजस्य है, वहां टंकियों से ओवरफ्लो रोकने के लिए फुटबाल लगा रखे हैं, लेकिन जहां लोगों में तालमेल नहीं है या मकान लेने वाले लोग रहते ही नहीं हैं। वहां की पाइप लिकेज होने के कारण सप्लाई के दौरान पानी छत पर फैलता रहता है। इसकी शिकायत करने पर हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता है। अब ऐसे में या तो आप स्वयं के खर्चे पर बनवाएं या फिर विभाग के सामने गिड़गिड़ाएं।

जानिए... कहां क्या समस्या है, जो नहीं हो रही दुरुस्त
दादरखुर्द : यह काॅलोनी लगभग 12 साल पुरानी है। यहां पानी के लिए बना ओवरहेड टंैक ही जर्जर हो चुका है। उसका छज्जा भी टूट चुका है। वहां रहने वाले राजेश्वर ने बताया कि विभाग के लोग उदासीन हैं। काम ही नहीं कराना चाह रहे।
गोकुलनगर: रविन्द्र कुमार ने बताया कि उनके ब्लाॅक में 12 मकान हैं, जिसमें सिर्फ 5 लोग मकान मालिक हैं और 7 किराएदार। सभी की राय एक नहीं बनने से छत पर पानी फैलते रहता है। शिकायत पर विभाग भी ध्यान नहीं देता है।
रामपुर: कभी सफाई नहीं होती। नालियां जाम हैं। रजनीश सारथी ने बताया कि छत पर बिछाई गई मेन पाइप लिकेज है। मरम्मत नहीं होने से पानी लोगों के घरों में पहुंचने लगा है। शिकायत करने के बाद भी उसे बदला नहीं जा सका है। विभाग काम नहीं करना चाहता है।

शिकायत पर कराते हैं काम: ईई बंजारे
हाउसिंग बोर्ड कोरबा के ईई एलपी बंजारे ने कहा कि जिस किसी भी काॅलोनी से शिकायत आती है, वहां मरम्मत कराते हैं। ऐसी समस्या जो लोगों के व्यक्तिगत मकान की होती है, उसे उन्हें खुद कराना पड़ता है। मेंटेनेंस चार्ज की राशि भी लोग नहीं जमा करते हैं। इसलिए कभी-कभी काम कराने में दिक्कत आती है।

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