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विरोध:कोल सचिव से श्रमिक नेता बोले- सरकार को बता दीजिए हड़ताल होगी

कोरबा4 महीने पहले
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  • कोल सचिव ने वार्ता कर हड़ताल टालने की कोशिश, लेकिन संगठन नहीं माने

एसईसीएल सहित कोल इंडिया के सभी कोयला खदानों में 2, 3 व 4 जुलाई को प्रस्तावित 72 घंटे की हड़ताल को सरकार टालने की कोशिश में लगी रही। मंगलवार की सुबह 11 बजे कोयला सचिव अनिल कुमार जैन के साथ एटक, सीटू, बीएमएस और एचएमएस ने वार्ता की। कोल सचिव ने यूनियनों से हड़ताल टालने के लिए आग्रह किया। उनको यह बताने की भी कोशिश की कि कमर्शियल माइनिंग से कोल इंडिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन ट्रेड यूनियन के नेता अपनी मांग पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि सरकार कमर्शियल माइनिंग का फैसला वापस ले तभी हड़ताल टालने का फैसला होगा। वार्ता विफल होने पर यूनियन के नेताओं ने कोल सचिव से कहा कि सरकार को बता दीजिए तीन दिन की हड़ताल तो होकर रहेगी। बैठक में कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल भी उपस्थित रहे। संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने सरकार से दो टूक कहा है कि कमर्शियल माइनिंग पर कोई समझौता नहीं करेंगे। केंद्रीय नेताओं का ये भी कहना है कि पीएम को पहले कमर्शियल माइनिंग को लेकर पुनर्विचार करने की जरूरत है। इधर पूरे कोयला उद्योग में गेट मीटिंग, सम्मेलन के माध्यम से जनजागरण का अभियान चालू है।

इंटक को नहीं बुलाने पर जताया गया एतराज
कोयला मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी राम सिरोमनी सरोज ने 29 जून को सूचना जारी की कि 30 जून को कोल सचिव के साथ सेंट्रल ट्रेड यूनियन नेताओं की वर्चुअल मीटिंग होगी। जिसमें बीएमएस से बीके राय, एटक से रमेंद्र कुमार, एचएमएस से नाथूलाल पांडेय व सीटू से डीडी रामानंदन को बुलाया गया। लेकिन इंटक को नहीं बुलाया। जबकि हड़ताल नोटिस इंटक ने भी दिया है। इसे लेकर मीटिंग में शामिल दूसरे यूनियनों ने एतराज जताया। लेकिन कोयला सचिव ने इस पर कानूनी पहलुओं का हवाला दिया।

कमर्शियल माइनिंग पर पहले भी किया था विरोध 
सरकार पिछले दो वर्ष से कमर्शियल माइनिंग की कोशिश में लगी थी। 2018 में जब कमर्शियल माइनिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो ट्रेड यूनियनों ने 16 अप्रैल 2018 को एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था। उस समय विरोध को देखते हुए कमर्शियल माइनिंग रुक गई थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार ने पहले कोल सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई का निर्णय लिया। इसके बाद अब कोल ब्लॉक निजी क्षेत्रों के लिए खोलने को लेकर कानून भी बना दिया। इसे लेकर विरोध हो रहा है।

वार्ता विफल, अब कोयला मंत्री भी कर सकते हैं चर्चा
ट्रेड यूनियनों की कोयला सचिव अनिल कुमार जैन के साथ वार्ता विफल होने के बाद से सरकार की चिंता और बढ़ गई है। केंद्रीय नेताओं का कहना है कि श्रमिक संघ अपनी बात पर कायम रहे। सचिव श्रम संघों की बात कोयला मंत्री को बताएंगे। ऐसे में इस बात की संभावना है कि अब कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी खुद ही यूनियनों के साथ चर्चा कर सकते हैं। हालांकि अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसकी सिर्फ संभावना ही जताई जा रही है।

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