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स्वीडन व एसईसीएल की मदद से बनेगा पर्यटन स्थल:बंद कोयला खदान की मानिकपुर पोखरी अब बनेगी खूबसूरत झील

कोरबा9 दिन पहले
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48 मीलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडार है। - Dainik Bhaskar
48 मीलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडार है।

खूबसूरत झील सी नजर आने वाली यह तस्वीर दरअसल 30 साल पहले बंद हो चुकी मानिकपुर खुली कोयला खदान की है। यह कोयला खदान कोरबा क्षेत्र को देश का प्रमुख कोयला उत्पादक जिला बनाने की शुरुआत का पहला चरण (पायलट क्वारी-सबसे पहली खदान) रही है।

रेलवे स्टेशन की सेकेंड एंट्री गेट व बंद हो चुकी इस कोयला खदान के बीच बायपास रोड सीमा रेखा सी है। सड़क के दूसरे तरफ बंद पड़ी यह खदान अब एक बड़ी वाटरबॉडी का रूप ले चुकी है, जिसे अब मानिकपुर पोखरी के रूप में जाना जाता है। इसके दूसरे सिरे पर एसईसीएल मानिकपुर कालोनी होकर खदान जाने वाली रोड है। यूं यह शहर के बीच स्थित है।

लंबाई 1 किमी, चौड़ाई 300 मी.
वर्ष 1966 में सोवियत रूस के तकनीकी परामर्श से कोयला उत्खनन शुरू हुआ था। 24 साल बाद 100 मीटर नीचे खुदाई से भू-जल स्रोत से इतना पानी निकला कि बड़े मोटर पंप भी खाली नहीं कर सके। कई मशीनें पानी में डूब गईं। 1990-91 में खदान बंद कर दिया। अब इसमें सालभर पानी रहता है। इसकी लंबाई एक किलोमीटर व चौड़ाई 300 मीटर से अधिक है।

जल्द शुरू होगी विकास की प्रक्रिया
स्वीडन एम्बेसी के डिप्टी हेड आफ मिशन गौतम भट्टाचार्य 26 मार्च को कोरबा प्रवास पर आए थे। कलेक्टर किरण काैशल व एसईसीएल के अधिकारियों ने इसका अवलोकन किया। स्वीडन एम्बेसी व एसईसीएल ने संयुक्त रूप से इसका विकास करने की बात कही है।

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