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सुरक्षा में शिक्षा विभाग की अनदेखी:बिना मॉस्क प्रवेश नहीं, पर जिले के सबसे बड़े सरकारी स्कूल में टेम्प्रेचर मापने थर्मल स्केनर नहीं

कोरबा3 दिन पहले
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  • कक्षा 9वीं से 12वीं तक जिले में हैं करीब 54 हजार छात्र और 3 हजार शिक्षक, कोरोना लक्षण वालों को स्कूल में आने पर पाबंदी पर नहीं हो रही जांच

प्रदेश के कुछ स्कूलों में शिक्षक और छात्रों के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि स्कूल में कोरोना से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। अभी कक्षा 9वीं से 12वीं तक की क्लास शुरू हुई है। जिले में सरकारी और निजी सभी स्कूलों को मिला लें तो इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या करीब 54 हजार है। वहीं इन कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या भी 3 हजार के लगभग है। कहा जा रहा है कि कोरोना के लक्षण वाले शिक्षक या छात्रों को स्कूल आने की मनाही है, ऐसे में जिन्हें सर्दी-खांसी और बुखार है, उन्हें घर में रहने की हिदायत दी गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि खासकर सरकारी स्कूलों में टेंप्रेचर नापने थर्मल स्केनर नहीं है। हालांकि डीईओ सतीश कुमार पाण्डेय का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में यह है। लेकिन जब भास्कर टीम ने जिले के सबसे बड़े सरकारी स्कूल जाकर देखा तो वहां थर्मल स्केनर नहीं था। साथ ही स्कूल स्टाफ ने बताया कि परीक्षा के समय जरूर थर्मल स्केनर था, लेकिन उसके बाद से नहीं है। जिले की स्कूलों में यदि कक्षा पहली से बारहवीं तक के छात्रों की संख्या देखी जाए तो एक लाख 21 हजार है। वहीं निजी स्कूलों में 4 हजार और सरकारी स्कूलों में 7 हजार शिक्षक-शिक्षिकाएं पढ़ाते हैं।

अभी छात्रों को नहीं लगा कोरोना का टीका, खतरा
राज्य शासन के आदेश के बाद हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल की कक्षाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन अब भी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में छात्र-छात्राएं नहीं आ रहे हैं। सरकारी स्कूल खुले 7 दिन गुजर गए। कोरोना संक्रमण को रोकने स्कूलों में मॉस्क पहनकर आना जरूरी किया है। साथ ही सैनिटाइज करने के बाद ही स्कूलों में प्रवेश दिया जा रहा है, लेकिन किसी भी स्कूल में थर्मल स्केनर से टेम्प्रेचर जांच करने मशीन नहीं है। अभी छात्रों को कोरोना का टीका भी नहीं लगा है। एक निजी और एक सरकारी स्कूल में जाकर देखने पर इसका खुलासा हुआ।

गवर्नमेंट स्कूल: सर्दी-खांसी होने पर छात्रों को अलग बिठाने की व्यवस्था
गवर्नमेंट हायर सेकंडरी स्कूल कोरबा में कक्षा 9वीं से 12वीं तक 800 छात्र-छात्राएं हैं। अभी 60 फीसदी छात्र स्कूल आ रहे हैं। स्कूल में प्रवेश करते समय शिक्षक यहां देखते हैं कि छात्र मॉस्क लगाए हैं कि नहीं। इसके बाद उनके हाथ सेनेटाइज कर अंदर प्रवेश दिया गया। कक्षा में एक साथ बैठने की मनाही है। इससे एक बेंच पर एक ही छात्र को बैठा रहे हैं, लेकिन थर्मल स्केनर की व्यवस्था नहीं है। शिक्षक छात्रों से पूछते हैं कि किसी को सर्दी-खांसी तो नहीं है। यहां ऐसे छात्रों के लिए अलग से बिठाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन अब तक ऐसा छात्र नहीं मिला है।

प्राइवेट स्कूल: सेंट जेवियर में छात्रों की ग्रुप एक्टिवटी को किया बंद
सेंट जेवियर पब्लिक स्कूल में कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक 400 छात्र हैं, लेकिन दो दिनों में छात्रों के आने का प्रतिशत बढ़ा है। पहले दिन 65 प्रतिशत तो शुक्रवार को 85 प्रतिशत उपस्थिति छात्रों की रही। यहां किसी तरह की ग्रुप एक्टिविटी नहीं कराई जा रही है। छात्रों को क्लास से बाहर निकलने नहीं दिया जाता। बीच-बीच में थर्मल स्केनर से शरीर के तापमान की जांच होती है, लेकिन स्कूल की छुट्‌टी होते ही बाहर निकलने पर छात्र मॉस्क निकाल देते हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लिया डाटा जांच होनी चाहिए: डीईओ
"डीईओ सतीश कुमार पाण्डेय ने कहा कि अभी जो कक्षाएं लग रही हैं, उसके शिक्षक व छात्र-छात्राओं को पूरी तरह से सावधानी बरतने के निर्देश हैं। अधिकांश स्कूलों में थर्मल स्केनर होने का उन्होंने दावा भी किया। उन्होंने कहा स्कूल में मास्क पहनना जरूरी है। एक दिक्कत जरूर सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने में आ रही है। कोरोना के लक्षण वाले छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को अलग रहने की हिदायत दी गई है। वहीं उन्हें टेस्ट कराने के बाद ही स्कूल आना चाहिए। डीईओ ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को हमने टीचर का डाटा दिया है। सभी शिक्षकों का नहीं लेकिन रेंडमली जांच की जानी चाहिए।"

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