समिति की कोर कमेटी भंग:कमजोर पड़ी रेल संघर्ष समिति, जब अफसर चाहेंगे तभी मिलेगी कोरबा को यात्री गाड़ी

कोरबा2 महीने पहले
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विगत 4 सालों से यात्री सुविधाओं के विस्तार, नई ट्रेनों को चलाने समेत यात्रियों के हित से जुड़ी मांगों को लेकर संघर्ष करने वाली रेल संघर्ष समिति लोगों का समर्थन नहीं मिलने से कमजोर पड़ गई है। आंदोलन ही नहीं अब समिति की होने वाली बैठकों से भी दूरी बनाने लगे हैं। जिसे देखते हुए गुरुवार को रेल संघर्ष समिति की कोर कमेटी को भंग कर दिया गया। कोरबा में रेलवे का इतिहास 62 साल पुराना है।

इन 62 सालों में कोरबा से रेलवे को राजस्व के रूप में साल दर साल आय बढ़ती चली गई है। बीते साल तक कोरबा की भागीदारी सालाना 6 हजार करोड़ से अधिक थी, जो दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की आय में सर्वाधिक हिस्सा कोरबा से देश के राजस्व खाते में पहुंच रहा है। उसके अनुरूप अगर यात्री सुविधाओं, ट्रेनों के विस्तार, नए रूट पर ट्रेनों के चलाने की बात ही क्यों न हो इन सभी में कोरबा सबसे पीछे खड़ा है।

लोगों की परेशानियों को देखते हुए जहां शहर के कुछ युवाओं ने सोशल प्लेटफार्म पर रेल संघर्ष समिति का गठन कर मांगों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। संगठन से 400 से अधिक जुड़ चुके थे, लेकिन अब इनको भी कोई लेना-देना नहीं है, यही कारण है कि न तो लोग आंदोलनों में शामिल हो रहे हैं और न ही बैठकों में, जिसका फायदा रेलवे प्रशासन उठाता जा रहा है।

ट्रेन चाहिए तो आगे आएं वरना बंद होने की स्थिति
दपूम रेलवे बिलासपुर जोन के एक अफसर ने अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर पहले ही बताया था कि ट्रेन चाहिए तो जनप्रतिनिधियों को आगे आना होगा। अन्यथा जो ट्रेन चल रही हैं उनसे भी कोरबा के लोगों को हाथ धोना पड़ जाएगा। उन्होंने कहा आपके जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र के विकास से कोई लेना नहीं देना है।

पड़ोसी जिलों के जनप्रतिनिधियों से लेनी होगी सीख, जैसा वे चाहते हैं, वैसा ही करता है वहां का रेलवे प्रशासन

कोरबा जिले के जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी जिलों के जनप्रतिनिधियों से सीख लेनी चाहिए। रेल मामलों से जुड़ा कोई भी आंदोलन क्यों न हो हमारे जनप्रतिनिधियों की भूमिका होती ही नहीं है। वे सिर्फ व सिर्फ अपने मतलब के आंदोलनों को ही हवा देते हैं। यही कारण है कोरबावासी मिलने वाली रेल सुविधाओं से वंचित हैं। चांपा-जांजगीर की बात करें या सक्ती, खरसिया की, अंबिकापुर हो या बिलासपुर वहां के जनप्रतिनिधि जो चाहते हैं, रेलवे प्रशासन को वैसा करना पड़ता है।

सड़क से है परेशानी, रेलवे भी नहीं दे रहा राहत, समर्थन के अभाव में कमजोर पड़ गई है रेल संघर्ष समिति

कोरबा जिले में सड़कों की हालत अब तक नहीं सुधर सकी है। इससे हर कोई आवागमन करने में पेरशान हो रहा है। उपर से रेलवे द्वारा मिली हुई ट्रेनों को भी बंद रखा गया है, इससे लोगों की परेशानी और भी बढ़ती जा रही है। इन मांगों पर अगर समय रहते जिले लोग नहीं जागे तो वह दिन दूर नहीं कि कोरबा से यात्री ट्रेनों के स्थान पर केवल मालगाड़ी ही दौड़ती दिखें‌गी। रेल संघर्ष समिति ने इस दिशा में काफी प्रयास किए, पर समर्थन के अभाव में कमजोर हो गई है। इसलिए अफसर नहीं सुन रहे हैं।

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