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लेमरू एलिफेंट रिजर्व:38 सौ वर्ग किमी का होगा दायरा, बांगो बांध और मांड नदी के कैचमेंट एरिया तक बढ़ाया जाएगा

कोरबाएक महीने पहले
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  • नए सिरे से बना रहे प्रस्ताव, अभी 4 वन मंडल के 109 गांव दायरे में आ रहे

प्रदेश के 4 वन मंडलों के 10 रेंज को शामिल कर प्रस्तावित लेमरू एलिफेंट रिजर्व का एक बार फिर दायरा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब 1995 वर्ग किलोमीटर से लगभग 3800 वर्ग किलोमीटर एरिया को शामिल किया जाएगा। इसमें बांगो बांध व मांड नदी के कैचमेंट एरिया को भी शामिल किया जाना है। इसके लिए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जिसकी वजह से अब तक नोटिफिकेशन नहीं हो सका है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद चौथी बार लेमरू एलिफेंट रिजर्व बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रारंभिक सर्वे में 4 वन मंडलों के क्षेत्र को शामिल किया गया था। लेकिन बीच में कोल ब्लाक आने की वजह से समस्या हो रही थी। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने प्रस्तावित रिजर्व से कोल ब्लाॅक की नीलामी सूची से हटाने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा था। इसके बाद कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी प्रदेश के 5 कोल ब्लाकों को नीलामी सूची से हटाने का आश्वासन दिया है। ये क्षेत्र में आ रहे थे।

कटघोरा बना हाथियों का नया ठिकाना, दो साल से नहीं हटे
कटघोरा वन मंडल अब हाथियों का नया ठिकाना बन गया है। इसी क्षेत्र में बांगो डुबान क्षेत्र है। केंदई परिक्षेत्र के कोरबी से लेकर ऐतमानगर, गुरसिया के आसपास ही हाथी घूमते रहे हैं। दो साल से हाथी यही जमे हुए हैं। कोरबा के बजाय अब कटघोरा में हाथी का उत्पात बढ़ गया है। पिछले सप्ताह ही हाथी ने एक महिला को कुचलकर मार डाला था।

20 साल में 64 लोगों की हो चुकी है मौत: जिले में 20 से हाथी घूम रहे हैं। हर साल हाथी हमले में ग्रामीणों की मौत होती है। अब तक 64 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही 30 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। साथ ही अलग-अलग कारणों से हाथियों की मौत भी हो रही है। इसी वजह से रिजर्व बनाने की तैयारी की जा रही है।

रिजर्व में पुनर्वास की जरूरत नहीं पड़ती
वन अधिकारियों के मुताबिक एलिफेंट रिजर्व के लिए गांवों के पुनर्वास की जरूरत नहीं होती। रिजर्व में हाथियों के पर्याप्त भोजन व पानी की व्यवस्था करनी पड़ेगी। भोजन के लिए पौधे व घास लगाई जाएंगे। हाथियों पर नजर रखने 24 घंटे अलग से कर्मचारी तैनात रहेंगे। इसमें प्रभावित गांवों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा।

बांगो का कैचमेंट एरिया केंदई व लेमरू परिक्षेत्र में
हसदेव बांगो बांध एतमानगर परिक्षेत्र में आता है। लेकिन इसका कैचमेंट एरिया केंदई से लेमरू परिक्षेत्र तक फैला हुआ है। साथ ही मांड नदी का कैचमेंट एरिया कुदमुरा क्षेत्र के साथ ही छाल परिक्षेत्र में आता है जो धरमजयगढ़ वन मंडल में शामिल है। साथ ही बोरो कापू क्षेत्र भी इससे प्रभावित होगा।

अभी 10 वन परिक्षेत्र और भी बढ़ाने की तैयारी
प्रस्तावित रिजर्व में 4 वन मंडल के 10 परिक्षेत्र शामिल हैं। जिसमें कोरबा के बालको, लेमरू, कुदमुरा, पसरखेत, धरमजयगढ़ के बोरो, धरमजयगढ़, कापू, सरगुजा के उदयपुर, लखनपुर व कटघोरा के ऐतमानगर को शामिल किया गया है। अब केंदई को भी शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।

एलिफेंट रिजर्व की रायपुर से चल रही प्रक्रिया: सीसीएफ
बिलासपुर रेंज के मुख्य वन संरक्षक अनिल सोनी का कहना है कि एलिफेंट रिजर्व की प्रक्रिया रायपुर से चल रही है। यहां से प्रस्ताव बनाकर पहले ही भेज दिया गया है। इसमें कितना समय लगेगा कहा नहीं जा सकता। इसकी मंजूरी वहीं से मिलेगी।

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