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  • The Market Is Closing Down, The Farmers Are Being Encouraged, The Vegetables Are Being Thrown Due To Not Getting The Buyer, The Fields Are Also Getting Spoiled.

सब्जी की फसल तैयार:बाजार बंद होने से टूट रहा किसानों का हौसला; खरीदार नहीं मिलने से फेंकनी पड़ रही सब्जियां, खेतों में भी हो रही खराब

कोरबा6 महीने पहले
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  • करतला, कोरबा व पाली में आय का एकमात्र यही जरिया कई क्विंटल सब्जियां फेरी लगाकर बेचना आसान नहीं

सब्जी की अच्छी पैदावार और गर्मी के सीजन में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद से जिले के किसानों ने अपनी जमा पूंजी लगा दी थी। अब जब उन्हें बाजार में उतारने और मुनाफा कमाने का समय आया, तब उन्हें अपनी सब्जी को या तो खेतों में सड़ते देखना पड़ रहा है या फिर फेंकना।

4 महीने तक खेतों में पूरे परिवार के साथ मेहनत करने वाले किसानों की यह हालत किसी व्यक्तिगत कारणों की वजह से नहीं वरन कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन से हो गई है। बड़ी मात्रा में सब्जियां अब निकलने लगी हैं, लेकिन बाजार नहीं मिलने से किसान उसे बेच भी नहीं पा रहे हैं।

किसानों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान अब तक 7 से 8 टन सिर्फ टमाटर ही खेतों में पककर खराब हो गए हैं। किसानों की चिंता यह है कि मुनाफा तो दूर मूल लागत भी निकलना मुश्किल है। जिस फसल को लेने दिन-रात मेहनत किए, वही फसल अब उनके सामने बेकार हो रही है। इसे देखकर वे कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। कोरबा जिले में सबसे अधिक सब्जी की फसल करतला के किसान लेते हैं। उनके साथ ही कोरबा, पोड़ी उपरोड़ा, कटघोरा व पाली के किसान सब्जी की खेती करते हैं। सब्जी की फसल का रकबा 25 हजार हेक्टेयर तक है।

5 मई तक लॉकडाउन खुलेगा या नहीं, संशय

जिला प्रशासन ने लॉकडाउन की घोषणा 5 मई की रात 12 बजे तक की है। जो 12 अप्रैल को दोपहर बाद से लागू है। जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बुधवार को 1100 को पार कर गई है। ऐसे में 6 मई से किसानों को राहत मिल पाएगी या नहीं यह कहना अभी जल्दबाजी होगा। फिलहाल किसानों को जिला प्रशासन के अगले आदेश का इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया है।

फेकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं: मेलाराम

कोरकोमा के मेलाराम केशरवानी ने 5-6 एकड़ में सब्जी की खेती किए हैं। खीरा, मखना, कद्दू, मिर्ची की फसल लगी है। उन्होंने कहा कि 80 हजार से अधिक खर्च हो गए हैं। जब बेचने का समय आया तब लॉकडाउन लग गया। अब आप ही बताओ दो क्विंटल खीरा लेकर कहां-कहां घूमकर बेचूं। मैं तो बर्बाद हो गया हूं। फेंकू नहीं तो क्या करूं।

घर-घर घूमकर नहीं बेच पा रहे सब्जी : जीवन राम

करतला नवापारा के किसान जीवन राठिया ने बताया कि दो एकड़ में टमाटर, पत्तागोभी, मिर्ची, बैगन, बरबट्टी लगाए हैं। फसल तैयार हो चुकी है। सप्ताह में दो से तीन क्विंटल सब्जी निकल रही है। उसे बेचने के लिए बाजार नहीं मिल रहा है। इतनी सब्जी घर घर घूमकर नहीं बेच पा रहे हैं। आधे से अधिक सब्जी रखे रखे खराब हो रही है। अच्छी कमाई होगी सोचा था पर उल्टा हो रहा।

परिवार का खर्च कैसे चलेगा इससे परेशान हूं: राधेलाल

​​​​​​​कटघोरा घिनारा के किसान राधेलाल ने बताया कि वह कुछ ज्यादा ही सोच लिया था। 3 एकड़ में सब्जी की खेती के लिए डेढ़ लाख रुपए खर्च कर दिया हूं। सीजन में सब्जी को खराब होते देखना पड़ रहा है। थोड़ी बहुत सब्जी ही लोगों के घर घर जाकर बेच पा रहा हूं। स्थिति यह हो गई है कि परिवार का खर्च आगे कैसे चलेगा यह सोचकर परेशान हो गया हूं।

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