पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भास्कर एक्सक्लूसिव:गरीब बनने की होड़; दो माह में 21 हजार आवेदन, 13059 के बने बीपीएल कार्ड, सबसे अधिक कोरबा के 7170 कार्ड

कोरबा16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
सोसाइटी में राशन लेने पहुंचे कार्ड धारी। - Dainik Bhaskar
सोसाइटी में राशन लेने पहुंचे कार्ड धारी।
  • जिले में बीपीएल कार्ड 2 लाख 52 हजार 227 हुए, एपीएल को जोड़ अगले माह तक यह संख्या 3 लाख होने का अनुमान

राज्य शासन ने जब से बीपीएल परिवारों को एक रुपए किलो में 35 किलो चावल देने की योजना लागू की है तब से गरीब बनने की लोगों मेें होड़ सी मची है। कोरोना काल में बीपीएल कार्ड बनवाने के लिए 21 हजार से अधिक आवेदन आए। जिसकी छानबीन के बाद 13 हजार 59 लोगों को बीपीएल कार्ड जारी किया गया है।

सबसे अधिक कोरबा शहरी क्षेत्र में 7170 लोगों को कार्ड जारी किया गया है। अब बीपीएल कार्डों की संख्या 2 लाख 52 हजार 227 तक पहुंच गई है। एपीएल कार्ड 39171 है। जिससे कार्डों की संख्या अब 2 लाख 91 हजार 398 है। अगले महीने तक कार्डों की संख्या 3 लाख के पार पहुंचने की संभावना है।

बीपीएल राशन कार्ड जारी करने के लिए जनगणना सूची में नाम जरुरी है। साथ ही आधार कार्ड व कार्डधारक का बैंक खाता नंबर लिया जाता है। कार्ड बनाने की जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्र में नगरीय निकायों को दी गई है। खाद्य विभाग मात्र डाटा एंट्री करता है। पूरे दस्तावेज होने के बाद भी कार्ड जारी किया जाता है।

आयुष्मान कार्ड की वजह से भी बढ़ी राशन कार्ड की उपयोगिता
आयुष्मान कार्ड में इलाज के लिए जो दस्तावेज मांगे जाते हैं उसमें राशन कार्ड भी शामिल है। आयुष्मान में 5 लाख तक का इलाज मुफ्त में होता है। इसी वजह से बीपीएल के साथ ही लोग एपीएल कार्ड बनवाने के लिए सामने आ रहे हैं। भले ही लोग सोसायटी से राशन न लें। लेकिन कार्ड बनवाकर रख रहे हैं ताकि काम आए। इस कारण राशन कार्ड के आवेदन बढ़े हैं।

मुफ्त में चावल देने की घोषणा के बाद से पंजीयन ने पकड़ी रफ्तार
शहरी क्षेत्र में जब से श्रमिक पंजीयन बनाकर बीपीएल कार्ड जारी किए जा रहे हैं तब से इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। कोरोना काल में सबसे अधिक कार्ड बनाने आवेदन आए हैं। इसका मुख्य कारण मुफ्त में चावल दिया जाना है। लोग पंचायतों के साथ ही पार्षदों के पास रोज आवेदन लेकर पहुंच रहे हैं। इसी वजह से ही राशन कार्डों की संख्या बढ़ती जा रही है।

एपीएल से भी नाम कटवाकर लोग बनवा रहे बीपीएल का कार्ड
शहरी क्षेत्र में लोग एपीएल से नाम कटवाकर बीपीएल कार्ड बनवा रहे हैं। इसका मुख्य कारण आसानी से श्रमिक पंजीयन कार्ड बनना है। बताया जाता है कि लोग पहले कार्ड निरस्त करने के लिए आवेदन देते हैं। इसके दो महीने बाद बीपीएल कार्ड बनवाने के लिए आवेदन करते हैं। दस्तावेज होने पर ऐसे लोगों को कार्ड भी जारी हो जाता है।

50 नई दुकानें खुलेंगी, पंचायतों की संख्या भी जिले में बढ़ गई
जिले में राशन दुकानों की संख्या 457 है। अब नए पंचायतें बनी हैं। वहां भी दुकानें खोली जानी हैं। साथ ही शहरी क्षेत्र में भी 50 नए दुकान खोलने की प्रक्रिया चल रही है। कार्डों की संख्या को देखते हुए नई दुकानें खोलने का निर्णय लिया गया था। हर पंचायत में एक दुकान खोलना जरुरी है। इससे हितग्राहियों को भी राहत होगी।

सीधी बात- जेके सिंह, जिला खाद्य अधिकारी

आवेदनों की स्क्रुटनी के बाद ही बनता है राशन कार्ड

राशन कार्डों की संख्या लगातार बढ़ रही है इसमें बीपीएल की संख्या अधिक होने का कारण क्या है ? - राशन कार्ड निकाय व पंचायत बनाते हैं। हमारे पास आवेदन आता है उसकी स्क्रूटनी करने के बाद ही एंट्री करते हैं। दस्तावेज कमी पाने पर निरस्त कर दिया जाता है।

शहरी क्षेत्र में बीपीएल कार्ड बढ़ने के क्या कारण हैं ? - अब श्रमिक पंजीयन कार्ड भी दस्तावेज में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन संबंधी प्रमाण पत्र लेते हैं। अगर दस्तावेज पूरे हैं तो हम राशन कार्ड बनाने किसी को रोक नहीं सकते।

एक साल में बीपीएल के साथ बढ़े एपीएल कार्डधारक
एक साल के भीतर ही बीपीएल के साथ एपीएल कार्ड भी बढ़े हैं। पहले 2 लाख 42 हजार 416 बीपीएल कार्ड थे। वह बढ़कर 2 लाख 52 हजार 229 हो गई है। साथ ही एपीएल कार्ड 33 हजार 897 से बढ़कर 39171 हो गई है। 11 हजार 85 से अधिक राशन कार्ड की संख्या बढ़ी है।

खबरें और भी हैं...