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दस्तावेज दफ्तर से गायब:बिलासपुर सर्किल ऑफिस में नहीं मिला जमीन अधिग्रहण का रिकॉर्ड फिर कैसे होगा सीमांकन

कोरबा18 दिन पहले
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हसदेव दर्री बराज का बंड बनाने 58 साल पहले काली मिट्टी खदान के लिए अधिग्रहित जमीन 14.720 हेक्टेयर का मुआवजा प्रकरण का ही दस्तावेज दफ्तर से गायब है। विभाग के अधिकारी बिलासपुर सर्किल ऑफिस और जांजगीर में रिकॉर्ड ढूंढने के लिए लगे थे ,लेकिन वहां भी नहीं मिल पाया।

राजस्व रिकार्ड में अभी भी जिनकी जमीन ली गई थी, उन्हीं का नाम दर्ज है। इससे जमीन की खरीदी-बिक्री भी हो रही है। नहर के लिए अधिग्रहित जमीन का भी रिकॉर्ड सिंचाई विभाग के पास नहीं है। हसदेव दर्री बराज के लिए वर्ष 1963 में काली मिट्टी खदान के लिए कोहड़िया के आगे बेलगिरी नाला के ऊपर की जमीन अधिग्रहित की थी। इसमें निजी जमीन के साथ सरकारी जमीन भी है। 3 माह पहले खाली पड़ी जमीन पर कुछ लोग राखड़ डंप करा रहे थे। हसदेव दर्री बराज संभाग के कार्यपालन अभियंता ने एसडीएम को आवेदन दिया कि विभाग की जमीन पर बिना अनुमति राखड व मिट्टी डाली जा रही है। एसडीएम ने नायब तहसीलदार डीआर ध्रुव के नेतृत्व में टीम गठित की थी। टीम ने जब मुआवजा बांटने का रिकॉर्ड मांगा तो पता चला कि विभाग के पास है ही नहीं। इसके बाद रिकॉर्ड ढूंढने के लिए अधिकारी लगे हुए हैं लेकिन कहीं नहीं मिल पाया। सिंचाई विभाग जिस जमीन को अपनी बता रहा है, उस जमीन पर अब तक 5 लोगों ने दावा किया है। इसमें नरेंद्र देवांगन, पूनम केंवट, शेख इस्माइल, अर्चना अग्रवाल और भावना गिरी शामिल हैं। इन लोगों ने जमीन का अपने नाम पर रजिस्ट्री होने का दस्तावेज राजस्व विभाग को सौंपा है। अभी और कई लोग जमीन पर दावा करने सक्रिय हो गए हैं।

कलेक्टोरेट से रिकॉर्ड लेने किया जा रहा प्रयास
हसदेव दर्री बराज उप संभाग के एसडीओ एसएन साय का कहना है कि मुआवजा बांटने का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। कलेक्टोरेट से रिकॉर्ड लेंगे । इसके बाद सीमांकन के लिए आवेदन लगाया जाएगा।

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