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ये सिस्टम का अमानवीय चेहरा है:छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने दर्द से पीड़ित प्रसूता को कहा- पहले कोरोना जांच कराओ; लाइन में लगी तो डिलीवरी हो गई

कोरबा4 महीने पहले
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घटना छत्तीसगढ़ में कोरबा के जिला अस्पताल की है। सिविल सर्जन डॉ.अरुण तिवारी का कहना है कि पहले भी गर्भवती महिला पॉजिटिव मिल चुकी हैं, इसलिए काेराेना की जांच जरूरी है। - Dainik Bhaskar
घटना छत्तीसगढ़ में कोरबा के जिला अस्पताल की है। सिविल सर्जन डॉ.अरुण तिवारी का कहना है कि पहले भी गर्भवती महिला पॉजिटिव मिल चुकी हैं, इसलिए काेराेना की जांच जरूरी है।

ये तस्वीर छत्तीसगढ़ में कोरबा के जिला अस्पताल की है, जहां सरकारी सिस्टम का एक अमानवीय चेहरा सामने आया। हॉस्पिटल में नकटीखार निवासी गर्भवती गनेशिया बाई मंझवार (27) को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। पति देवानंद मंझवार की सूचना पर महतारी एक्सप्रेस महिला को लेकर जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड पहुंची। वहां नर्स और कर्मचारियों ने प्रसूता को भर्ती करने की बजाय पहले कोरोना जांच कराकर आने को कहा।

इसके बाद ये लोग जिला अस्पताल परिसर में ही स्थित कोरोना जांच केंद्र पहुंचे, तब सुबह लगभग साढ़े आठ बज रहे थे। कोरोना जांच केंद्र 9 बजे शुरू होता है। देवानंद ने बताया कि कोरोना जांच के लिए लाइन में लग गए। इस बीच प्रसूता दर्द से चीखने लगी और कुछ मिनटों में ही वहीं प्रसव हो गया। तब एक व्हील चेयर में उसे बिठाकर मेटरनिटी वार्ड ले गए।

बाद में कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई
बाद में इनकी कोरोना जांच की गई, जिसमें मां और नवजात शिशु दोनों ही निगेटिव पाए गए। दोनों ही स्वस्थ हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ.अरुण तिवारी का कहना है कि पहले भी गर्भवती महिला पॉजिटिव मिल चुकी हैं, इसलिए काेराेना की जांच जरूरी है।

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