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46 बस कंडम:ट्रांसपोर्ट सोसाइटी ने कहा- बसें हो गई खस्ताहाल, सड़क पर चलाने के लिए बनाकर दो

कोरबाएक महीने पहले
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  • दुर्गाम्बा कंपनी ने सिटी बस चलाने से किया इनकार, बसों के कई पार्ट्स गायब

कोरोना काल में ट्रेन, निजी बसें समेत सभी यात्री परिवहन सुविधा शुरू हो चुकी है, लेकिन शुरू नहीं हो सका है तो वह है सिटी बस सेवा। जनता के लिए सुलभ व सस्ती सुविधा सिटी बसें लॉकडाउन के बाद से अब तक 10 माह से जमनीपाली स्थित प्रतीक्षा डिपो में खड़ी है। सभी 46 बसें मरम्मत के अभाव में कंडम हो चुकी है। इनमें 8 एसी बसें भी हैं। 10 बसों के टायर व अन्य पार्ट्स भी पार हो गए हैं।

कुछ बसें डिस्क के सहारे खड़ी हैं। तो कुछ की बैटरी नहीं है। सुरक्षा के लिए डिपो के मेन गेट पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, लेकिन अंदर बसों के सामान कहां गए, यह उसे भी नहीं पता है। ऐसे में सिटी बसों को सड़क पर उतारने से पहले मरम्मत करानी होगी। इसमें 50 लाख से अधिक का खर्च आएगा।

इस खर्चे को देखते हुए सिटी बस ऑपरेटर दुर्गाम्बा कंपनी ने अब आगे बस संचालन से इंकार कर दिया है। दूसरी ओर कोरबा अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सोसाइटी (केएपीटीएस) ने कंपनी को सभी बसों को ठीक कर सड़क पर चलने लायक बनाकर देने को पत्र लिखा है। इसके बाद ही सोसाइटी आगे का विचार करेगी।

बिना खर्च किए टरमिनेट होना चाहती है कंपनी, खर्च 50 लाख

सोसाइटी के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लॉकडाउन के बाद सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सिटी बस संचालन के लिए दुर्गाम्बा कंपनी तैयार नहीं हो रही थी। इसके लिए रियायत मांगी जा रही थी, लेकिन अनुबंध के तहत रियायत नहीं दी जा सकती थी।

अब उसे ही मुद्दा बनाकर दुर्गाम्बा कंपनी आगे सिटी बस संचालन से इंकार करते हुए खर्च से बचना चाह रही है। क्योंकि सिटी बसों को सड़क पर उतारने में करीब 50 लाख रुपए तक अनुमानित लागत है। मरम्मत के लिए तैयार नहीं होने पर प्रशासनिक स्तर पर कंपनी से वसूली की कार्रवाई की जा सकती है।

ड्राइवर-कंडेक्टर समेत अन्य कर्मचारी हो गए बेरोजगार

सिटी बस सेवा के संचालन के लिए दुर्गाम्बा कंपनी में कार्यरत 45 ड्राइवर और इतने ही कंडक्टर समेत मैनेजर, सुपरवाइजर, मैकेनिक कोरोना काल से अब तक बेरोजगार हैं। उन्हें उम्मीद थी कि लॉकडाउन के दौरान का वेतन उन्हें मिलेगा और इसके बाद बस संचालन शुरू होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कंपनी के अधिकारी भी डिपो छोड़ चले गए। ऐसे में अब ज्यादातर कर्मी मजदूरी या सब्जी बेचकर परिवार चला रहे हैं। सिटी बस में ड्राइवर रहे सुरेश के मुताबिक कुछ माह तक वे प्रदर्शन करते रहे, लेकिन प्रशासन ने भी उनकी नहीं सुनी। ऐसे में निराश होकर दूसरा विकल्प तलाशना पड़ा।

सस्ती परिवहन सुविधा नहीं यात्री हो गए हैं बे‘बस’

शहरी क्षेत्र में सस्ती व सुलभ यात्री परिवहन सुविधा के लिए सरकार की योजना के तहत सिटी बस सेवा जिले में शुरू हुई। संचालन की जिम्मेदारी कर्नाटक की कंपनी दुर्गाम्बा ट्रांसपोर्ट को दी गई। शहर से सभी उपनगरीय क्षेत्रों के अलावा कटघोरा, चांपा, हरदीबाजार के बीच सिटी बसों के चलने से यात्रियों को सुविधा मिल रही थी, लेकिन जब सिटी बसें नहीं चल रही है, तब यात्री परेशान है। निजी बसों समेत ऑटो में अधिक किराया वसूला जा रहा है।

दुर्गाम्बा कंपनी को पत्र लिख मरम्मत कराने का निर्देश

कोरबा अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सोसाइटी के नोडल अधिकारी ग्यास अहमद के मुताबिक दुर्गाम्बा कंपनी को सिटी बस संचालन के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। कंपनी ने अब बस संचालन में असमर्थता जताई है। जबकि डिपो में खड़े-खड़े मरम्मत के अभाव में लगभग सभी बसों में खराबी आ गई है। इसलिए कंपनी को सभी बस का मरम्मत कराने का निर्देश दिया गया है। बसों को सड़क पर चलने लायक बनाकर देने के बाद ही आगे सोसाइटी विचार करेगी।

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