लॉकडाउन का सदुपयोग / बच्चे चित्र बना रहे तो दादा-दादी से सुन रहे प्रेरक कहानियां

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दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

कोरबा. लॉकडाउन की वजह से आंगनबाड़ी केन्द्र बंद है। कार्यकर्ता बच्चों को पोषण आहार दे रही हैं। घर में ही बच्चों का बेहतर परवरिश हो, उनका बौद्धिक विकास व सीखने की प्रक्रिया बाधित न हो। इसके लिए बच्चों के साथ ही अभिभावकों के लिए चकमक अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत सप्ताहभर का कार्यक्रम जारी किया गया है। जिसके तहत बच्चे अभिभावकों के साथ कभी चित्र बनाना सीख रहे हैं तो कहीं दादा-दादी से प्रेरक कहानियां सुन रहे हैं।  सोमवार को ड्रा, स्केच, पेंट करें सूर्योदय या इंद्रधनुषी निराली छठा, मिट्टी से खिलौने बनाना और अभिनय करते हुए गाना गाओ कार्यक्रम किया जाएगा। इसी तरह मंगलवार को कागज पर अंगूठे से छाप लगा कर चित्र बनाना, पत्ते से आकृति बनाओ, पत्ते पे रंग लगा कर कागज पर चिपकाए, रंगोली बनाओ, बुधवार को चित्र बनाओ, रंग भरो, मां-पिताजी, दादा-दादी, भैया-दीदी के साथ बाल गीत गाए, माता-पिता के साथ पेड़ पौधों की फोटो खींचे कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी एपी किस्पोट्टा ने बताया कि चकमक अभियान बच्चों के लिए अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण मंच है, परिवार के साथ मिलकर हंसी-खुशी से सीखने-सिखाने का अवसर है। 
अभिभावकों को भी कार्यक्रम से जुड़ने कर रहे प्रेरित 
बच्चों को घरों में ही पारिवारिक सदस्यों के साथ माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी के साथ रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रख कर सिखाने की पहल की जा रही है। पारिवारिक सदस्यों को बच्चों के साथ आनंदपूर्ण गतिविधियां करायी जा रही है। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास की प्रक्रिया को घर तक बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से तैयार किए गए सजग कार्यक्रम की शुरूआत की गई है।

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