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बाइपास सड़क स्थानीय राजनीति का शिकार:अपने खेतों से बाइपास निकालने कांग्रेसियों ने स्थल चयन रोका

लखनपुर18 दिन पहले
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शहर की बहुचर्चित बाइपास सड़क स्थानीय राजनीति का शिकार हो गई है। 3 साल पहले भाजपा शासनकाल में इसके निर्माण की स्वीकृत दी गई थी। इसके बाद से कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के आपसी गुटबाजी के कारण स्थल चयन की प्रक्रिया सुस्त पड़ी रही। अब जो स्थल चयनित किया है, वह शहर से 8 किमी दूर है। इसका स्थानीय लोगों को लाभ नहीं होगा।

लखनपुर भाजपा के मंडल अध्यक्ष दिनेश साहू ने बताया 2017 में तत्कालीन लोक निर्माण विभाग मंत्री राजेश मूणत से बाइपास सड़क निर्माण की मांग की थी। इस पर मंत्री ने स्वीकृति दी थी। इसके बाद लगभग ढाई सालों में कांग्रेस शासन के स्थानीय नेताओं की गुटबाजी व खींचतान से बाइपास का स्थल चयन करने में ढाई साल का समय लग गया।

अपने खेतों से बाइपास गुजारने के चक्कर में कांग्रेसी नेताओं ने यह समय बर्बाद करा दिया। उन्होंने बताया कांग्रेस के नेताओं ने सत्ता के नशे में अफसरों पर दबाव बना अपने खेतों की ओर बाइपास सड़क को टेढ़ा-मेढ़ा करते हुए पास कराया है। यह सड़क पहले ग्राम केवरा से होकर जय दुर्गा राइस मिल के आगे निकालने प्रस्तावित थी, लेकिन अब यह सड़क केवरा से होकर भरतपुर राजा खार कन्हार से होते हुए हंस दाढ़ निकलेगी। इसके सीमांकन का काम शुरू कर दिया है।

इस पर ग्राम केवरा और कुंवरपुर के ग्रामीणों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। प्रस्तावित इस बाइपास सड़क मार्ग में 90 प्रतिशत निजी भूमि पड़ रही है। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया लखनपुर से इतनी दूर बाईपास सड़क का निर्माण कराया जा रहा है कि कस्बे का पूरा बाजार ही समाप्त हो जाएगा।

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