गिफ्ट का आइडिया कारगर:पूरे सप्ताह स्कूल आने पर देतेे हैं गिफ्ट, अब सभी बच्चे आने लगे

मैनपाट2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • शिक्षक ने अपने वेतन की राशि लगा बदली मैनपाट के जामझरिया मेंे सरकारी स्कूल की तस्वीर

सरगुजा के मैनपाट स्थित जामझरिया प्राथमिक स्कूल में एक दौर ऐसा था, जब बच्चे स्कूल ही नहीं जाते थे, लेकिन इस स्कूल की हालत यहां के शिक्षकों ने मिलकर बदल डाली। शिक्षक अरिविंद गुप्ता ने बताया जब उनकी नियुक्ति पहाड़ की तराई पर बसे गांव जामझरिया में हुई तो कुछ कर दिखाने का जज्बा लिए पदभार ग्रहण किए तब स्कूल में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर थी।

ज्वाइन करने के अगले ही दिन वे सुबह गांव में बच्चों के पालकों से मिलने पहुंचे, जो अति पिछड़ी जनजाति मांझी मंझवार लोग हैं, जो मेहनती तो हैं पर शिक्षा के महत्व को नहीं समझते थे। उन्हें जागरूक करने का सिलसिला चलता रहा। अरविंद रोज पालकों से मिलते और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाते और बच्चों को रोजाना स्कूल भेजने प्रेरित करते। यह कार्य निरंतर जारी रहा, जब तक कि बच्चों की उपस्थिति स्कूल में शत-प्रतिशत नही हो गई। उन्होंने बच्चों को उपहार देना शुरू किया, जो बच्चा पूरे सप्ताह स्कूल आते उन्हें उपहार देने लगे। यह आइडिया कारगर साबित हुआ।

धीरे-धीरे बच्चों की उपस्थिति बढ़ती गई। बच्चों को उपहार स्वरूप खिलौने, कपड़े, जूते, मिठाइयां, बैट-बॉल, चॉकलेट व अन्य सामग्री देते थे। घुमंतू बच्चों के लिए अभियान चलाया। इस कोशिश में पैसे की कमी एक बड़ा मसला था। इसके लिए विभाग से मिलने वाले बजट के साथ अरविंद ने वेतन का कुछ हिस्सा स्कूल के विकास में लगाने का निश्चय किया। इससे स्कूल का स्वरूप बदला। यही कारण है कि आज इस स्कूल में अत्याधुनिक तकनीक से बच्चों को पढ़ाया जाता है। इसकी चर्चा प्रदेश स्तर पर है। स्कूल को देखने के लिए मुख्य शिक्षा सचिव छत्तीसगढ़ शासन डॉ. आलोक शुक्ला भी आ चुके हैं।

मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण पुरस्कार भी मिल चुका
राज्यपाल पुरस्कार से अरविन्द गुप्ता को सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्तर की एप्प “द टीचर एप्प” में स्कूल की स्टोरी में अरविन्द गुप्ता की संघर्ष की कहानी पब्लिश हो चुकी है। स्कूल को मुख्यमंत्री निर्मल शाला अवार्ड व अरविन्द गुप्ता को मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण पुरस्कार मिल चुका है।

खबरें और भी हैं...