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ग्राउंड रिपोर्ट:फैक्ट्रियों में सौ फीसदी उत्पादन, काम पर मजदूर उद्योगपति व कर्मी नहीं चाहते कि लॉकडाउन लगे

बिलासपुर3 दिन पहले
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  • कोरोना में 6 माह तक उद्योग हुए थे प्रभावित, अभी भी केवल 50 फीसदी कर पा रहे उत्पादन
  • लॉकडाउन के बाद दोबारा मजदूर नहीं आए, जो ठहरे अब यहां से जाना नहीं चाहते हैं

औद्योगिक क्षेत्र की लगभग सभी फैक्ट्रियों में सौ फीसदी उत्पादन हो रहा है। अपवाद को छोड़ दें तो सभी मजदूर मास्क में नजर आ रहे हैं और उद्योगपति लॉकडाउन लगने पर भी उद्योगों को छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे दुर्ग, बेमेतरा और रायपुर में फैक्ट्रियों को लॉकडाउन के दायरे में नहीं रखा गया, उसी तरह यदि बिलासपुर में लॉकडाउन लगता है तो उन्हें उम्मीद है कि यहां के उद्योगों को बंद नहीं किया जाएगा। पिछले साल सर्वाधिक असर वाले सेक्टर में उद्योग भी शामिल थे।

कोरोना काल में करीब 6 माह तक प्रभावित रही सिरगिट्‌टी, तिफरा और सिलपहरी की फैक्ट्रियों के संचालक हो या फिर मजदूर, उन्होंने कोरोना के साथ जीना सीख लिया है। एक समय जहां सन्नाटा पसरा रहता था, वह अब गुलजार हैं। उद्योगों के बाहर गाड़ियों की लाइन लगी है और मजदूर भी उत्साह में नजर आ रहे हैं। भास्कर ने सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र में जाकर हालात का जायजा लिया। दोपहर एक बजे श्री दुर्गा ऑयल मिल के बाहर गाड़ियों की कतार थी। कोड़ा और भूसी की गाड़ियां खाली होने के लिए वहां खड़ी थी। पेंड्रा से कोड़ा लेकर आए ड्राइवर ने बताया कि जैसे-जैसे नंबर आता है, गाड़ियां खाली होती है। अब सब कुछ ठीक है। मजदूरों ने बताया कि जो मजदूर बाहर से आते थे, वे अब नहीं आए हैं। कुछ फैक्ट्रियों में जरूर कुछ संख्या मे हैं लेकिन वे भी लौटना नहीं चाहते क्योंकि वे जान गए हैं कि लौटने से नुकसान ही होना है।

बंद से स्थाई व दिहाड़ी मजदूर होंगे प्रभावित
जिले में छोटे-छोटे उद्योग, गृह उद्योग व कारखानों को मिलाकर करीब 1000 उद्योग हैं। कोरोना ने बड़े-बड़े उद्योग धंधे वालों से लेकर महिला एवं कुटीर उद्योग वालों तक को खासा नुकसान पहुंचाया था। लॉकडाउन हुआ तो 10 हजार मजदूर सीधे प्रभावित होंगे। वहीं रिक्शा, ऑटो, टेम्पो, मालवाहक सहित हजारों दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।

बिना मास्क के प्रवेश नहीं: केडिया
छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया ने बताया कि बिना मास्क के मजदूरों को फैक्ट्रियों में प्रवेश नहीं मिल रहा है। तीन चौथाई फैक्ट्रियों में बाहरी मजदूरों पर निर्भरता को खत्म करते हुए स्थानीय मजदूरों को स्किल्ड कर लिया है।

फैक्ट्रियों के बाहर से बोर्ड गायब
कोरोना से बचाव के लिए संचालकों ने उद्योगों के बाहर बोर्ड लगाए थे। नोटिस भी चिपकवाया था। भास्कर ने छाबड़ा मार्बल एंड टाइल्स इंडस्ट्रीज, हॉटलाइन इंडस्ट्रीज, साहू इंडस्ट्रीज, डीके इंडस्ट्रीज का जायजा लिया लेकिन वहां न नोटिस था और बोर्ड।

दफ्तरों में मास्क नहीं लगाने पर जुर्माने का पोस्टर चिपका, कुर्सियां बाहर निकाली गईं
शहर के सरकारी दफ्तरों में मास्क नहीं लगाने पर 500 रुपए जुर्माने का पोस्टर चिपका दिया गया है। वहीं कुछ विभागों ने तो कुर्सियां तक बाहर रख दी है ताकि आने वाले कार्यालय के बाहर ही बैठें। संक्रमण के भय से अधिकारी-कर्मचारी कूलर और एयर कंडीशन भी नहीं चला रहे हैं। कोरोना का असर सरकारी दफ्तरों में नजर आ रहा है। अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने तीन दिन पहले ही 50 फीसदी कर्मचारियों की उपस्थिति का आग्रह कलेक्टर से किया था, हालांकि अभी तक ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है पर कुछ कर्मचारी कोरोना के भय से दफ्तरों से दूरी बनाने में जुट गए हैं। इधर सबसे ज्यादा असर पड़ा है लोगों पर, वे कम संख्या में दफ्तरों में आ रहे हैं। पहले की तरह उनकी संख्या नहीं रही।

लॉकडाउन का डर: शहर छोड़कर गया ठेले वाला
लॉकडाउन होने का डर छोटे मोटे धंधा करनेवालों को सबसे अधिक सता रहा है। मुंगेली जिले का एक ठेलेवाला अपना पूरा सामान गाड़ी में भरकर अपने गांव घर जा रहा है। यहां किराए के मकान में रहता था। ठेला भी ले जा रहा है ताकि आगे वह अपने गांव में धंधा कर सके।

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