कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा:1330 नए मरीज; 37 की मृत्यु, सिर्फ 20 दिन में जिले में मिले 15 हजार संक्रमित, ऑक्सीजन बेड के लिए हाहाकार

बिलासपुर7 महीने पहले
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जमीन पर ऑक्सीजन, चूंकि अस्पताल के सभी बिस्तर फुल है इसलिए गंभीर मरीज को जमीन पर ही ऑक्सीजन लगा दी। - Dainik Bhaskar
जमीन पर ऑक्सीजन, चूंकि अस्पताल के सभी बिस्तर फुल है इसलिए गंभीर मरीज को जमीन पर ही ऑक्सीजन लगा दी।
  • हर रोज सैकड़ों मरीज इलाज की उम्मीद लेकर निजी और सरकारी अस्पताल पहुंच रहे
  • 20 अप्रैल को रिकॉर्ड 6584 ठीक हुए

बिलासपुर में कोरोना बेकाबू है। हर दिन नया रिकॉर्ड बन रहा है। मंगलवार को पहली बार एक दिन में 1330 नए कोरोना मरीजों की पहचान हुई। नए मरीजों को मिलाकर कुल रोगियों की संख्या 38637 पर पहुंच गई। 20 दिन में 15275 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं। जबकि शुरुआती समय में यानी पहली लहर में 15 हजार रोगी मिलने में 224 दिन लगे थे। इन्हीं 20 दिन में ठीक होने वालों के आंकड़े 6584 हैं। जबकि मृत्यु की बात करें तो 20 दिन में 407 मरीजों को हमने खाेया। दम तोड़ने वालों में 290 मरीज जिले थे वहीं 117 प्रदेश के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे।

37 की मौत, 8 की उम्र 45 वर्ष से कम थी
शहर के अस्पतालों में गुरुवार को 37 मरीजों की मृत्यु हुई। 31 मृतक बिलासपुर जिले के निवासी थे। दूसरे जिले के 6 मरीजों का इलाज शहर में चल रहा था। चिंता की बात है कि दम तोड़ने वालों में 8 मरीजों की उम्र 45 से कम थी। 20 दिन में दम तोड़ने वालों में 77 की उम्र 45 से कम थी। जिले में हुई 31 मौतों को मिलाकर अब तक 607 मरीज दम तोड़ चुके हैं। अप्रैल के 20 दिन में जिले के 290 सहित कुल 407 मरीजों को हमने खोया है।

9440 एक्टिव केस, अब तक 28581 ठीक हुए
इधर एक्टिव केस लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं रिकवरी घट रही है। मंगलवार को 672 मरीज डिस्चार्ज हुए तो ठीक होने वालों की संख्या 28581 पर पहुंच गई। वहीं 9440 मरीज घर और अस्पतालों में कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। एक अप्रैल को जिले में रिकवरी दर 93.05 प्रतिशत थी। 20 अप्रैल को यह घटकर 73.97 फीसदी पर आ पहुंची है। 15 दिन में 16.09 फीसदी रिकवरी गिरी है।

बिना इलाज लौटाया, दोपहर 12 बजे गंभीर हालत में परिजन महिला काे लेकर सिम्स पहुंचे तो कर्मचारियों ने बेड फुल होने की बात कहते हुए लौटा दिया।
बिना इलाज लौटाया, दोपहर 12 बजे गंभीर हालत में परिजन महिला काे लेकर सिम्स पहुंचे तो कर्मचारियों ने बेड फुल होने की बात कहते हुए लौटा दिया।

2615 लोगों ने लगवाई कोरोना वैक्सीन, सोमवार को 3393 को लगे थे टीके
जिले में सोमवार को 148 सेंटरों में टीके लगाए गए। दिनभर में 11920 लोगों को टीके लगाने का टारगेट रखा था। सिर्फ 2615 लोगों ने वैक्सीन लगवाई। पिछले एक सप्ताह से रोज टीके कम लग रहे हैं। सोमवार को 3393 लोगों ने टीके लगवाए थे। वहीं रविवार को 3809 लोगों ने वैक्सीन लगवाई थी। 1591 ने पहले डोज की वैक्सीन लगवाई। तो दूसरा डोज लगवाने वाले 1024 लोग थे। सबसे ज्यादा 45 वर्ष वाले 1144 लोगों ने पहला डोज लगवाया तो 320 ने दूसरा डोज लगवाया। 398 बुजर्गों ने पहले और 620 ने दूसरे डोज की वैक्सीन लगवाई। 26 फ्रंट लाइन वॉरियर्स ने पहला, 49 ने दूसरा डोज लगवाया। इसी तरह 3 हेल्थ वर्कर्स ने पहला और 35 ने दूसरे डोज का इंजेक्शन लगवाया।

ऑक्सीजन बेड के लिए हाहाकार
पूरे बिलासपुर में ऑक्सीजन बेड के लिए हाहाकार मचा है। अस्पतालों के बाद मरीज को लेकर परिजन भर्ती करने के लिए गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। हर रोज सैकड़ों मरीज इलाज की उम्मीद लेकर निजी और सरकारी अस्पताल पहुंच रहे लेकिन उन्हें बेड खाली नहीं है कहकर लौटा दिया जा रहा है। मंगलवार को सिम्स में ऐसा ही विचलित कर देने वाला दृश्य सामने आया। तालापारा की रहने वाली विमला की सांस फूल रही थी। परिजन उसे लेकर सिम्स पहुंचे। इलाज की गुहार लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी। कोरोना ओपीडी से मरीज को कैजुअल्टी जाने कहा। वहां से कोरोना ओपीडी भेज दिया। एक घंटे तक महिला भर्ती करने के लिए परेशान होती रही लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। रिसदा के रहने वाले 67 साल के राजेंद्र की तबीयत बिगड़ती तो परिजन उन्हें भर्ती करने के लिए ऑक्सीजन अस्पतालों में बेड ढूंढ रहे थे। लेकिन कहीं भी उन्हें बेड नहीं मिल पाया। दिनभर परिजन बेड के लिए परेशान होते रहे। इधर कुछ लोगों ने अस्पतालों से उम्मीद करना भी छोड़ दिया है। लोग अब खुद ही ऑक्सीजन की व्यवस्था में जुट गए। घर पर ही मरीज को ऑक्सीजन लगा रहे हैं।

रिकॉर्ड में 43 बेड खाली हकीकत में एक भी नहीं
इधर पूरे जिले में कोरोना के इलाज के लिए 1686 बिस्तर हैं। 331 ऑक्सीजन बेड हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 43 ऑक्सीजन बेड खाली दिख रहे हैं लेकिन हकीकत में एक भी नहीं है। 535 जरनल बेड हैं, 356 खाली दिख रहे। जरनल बिस्तरों पर तो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। लेकिन कई जगह जरनल भी खाली नहीं हैं। एचडीयू 302 बिस्तर हैं। सिर्फ दो खाली दिख रहे हैं लेकिन हैं एक भी नहीं। 518 आईसीयू बिस्तर में से 9 बेड खाली दिख रहे हैं। इधर 113 वेंटिलेटर हैं और सिर्फ 15 खाली दिख रहे हैं लेकिन मिलते किसी को नहीं हैं।

इधर मरीजों की चीखें, दवाइयां तक देने वाला कोई नहीं
सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी में जिन मरीजों को भर्ती किया है उनकी चीखें सुनिए। दवाइयां नहीं मिलने से रोगी किस तरह परेशान हैं। शंकर नगर के रहने वाले 64 वर्षीय लक्षण राम को यहां कोविड केयर सेंटर में भर्ती तो कर लिया लेकिन यहां देखरेख करने वाला कोई नहीं। मरीज के बेटे ने बताया कि गुहार लगाने के बाद भी दवाइयां नहीं पहुंच रहीं। रात में तो कोई सुनने वाला है ही नहीं। इधर चकरभाठा के रहने वाले 35 वर्षीय नंद राम धुरी का कहना है कि जब से आया हूं सिर्फ बिनती कर रहा हूं कि दवाइयां दे दो, पानी दे दो।

कंट्रोल रूम में फोन कर लोग मांग रहे ऑक्सीजन, अधिकारियों ने कहा-नहीं दे सकते, फोन न करें
जिले में संचालित अस्पतालों में आक्सीजन के सुलभ वितरण व परिवहन सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया गया है। आक्सीजन की कमी से जूझ रहे मरीजों के परिजन इस समिति के अधिकारियों को फोन कर आक्सीजन सिलेंडर की लगातार मांग कर रहे हैं। इससे अधिकारी परेशान हो गए हैं। यही वजह है कि उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि समिति का काम राज्य स्तर से लिक्विड गैस प्राप्त करना और स्थानीय आक्सीजन गैस सप्लायर के माध्यम से उक्त लिक्विड गैस से आक्सीजन गैस तैयार कराकर सिलेंडर में भरवाकर चिकित्सालयों में उपलब्ध कराना है।

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