स्वास्थ्य से खिलवाड़ / 3 साल पहले 21 करोड़ का बजट, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन नहीं लगी

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में पिछले ढाई साल से सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें बंद पड़ी हैं। तीन साल से खरीदी की प्रक्रियाएं चल रही हैं, पर खरीदी अभी तक नहीं हो पाई है। आरोप है कि यहां बड़े पदों पर बैठे कुछ लाेग और चंद कर्मचारी यह नहीं चाहते कि मशीनें शुरू हों। इसलिए मशीनों की खरीदी को अटकाने का खेल सालों से चल रहा है। इन्होंने ही पहले भारतीय जनता पार्टी और अब कांग्रेस की सरकार को गुमराह करना शुरू कर दिया है। खरीदी को लेकर कई तरह के बहाने गिना रहे हैं। डीएमई डॉ. एसएल आदिले का कहना है कि इसकी दोनों तरह की मशीन जर्मनी से आनी है। विप्रो जीई नामक एक कंपनी को इसका टेंडर दिया जा चुका है। वर्क आर्डर भी कर दिया गया है। पर आगे इसे लाने और लगाने में अभी छह महीनों का वक्त बताया जा रहा। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में भी यहां के मरीजों को बाहर ही जांच करानी पड़ेगी। और इसके एवज में निजी नर्सिंग होम या दूसरे जगहों पर दोगुने पैसे चुकाने होंगे। 
बात साल 2016-17 की है। तब डीन के प्रभार में डॉ. विष्णु दत्त थे और मेडिकल सुपरिटेंडेंट की जिम्मेदारी डॉ. रमणेश मूर्ति को सौंपी गई। यहां रखी पुरानी सीटी और एमआरआई मशीनें खराब हो गई थीं। इसलिए ही इन्होंने मिलकर सरकार के समक्ष नई मशीनें लाने का प्रस्ताव रखा। स्वशायी समिति की बैठक हुई। यहां के मेंबरों ने एसईसीएल को इन मशीनों के लिए चिट्टी बाजी कर पैसों की मांग की। इसके लिए 21 करोड़ रुपए का बजट तय हुआ। पहले इसकी खरीदी एसईसीएल को करनी थी। इसके लिए उन्होंने टेंडर भी करवाया। पर खरीदी को लेकर किसी ने टेंडर में रुचि नहीं दिखाई। इस प्रक्रिया में सालभर गुजर गए। और एसईसीएल के खरीदी को लेकर हाथ खड़े कर दिए। वर्ष 2018 में इसके पैसे सिम्स प्रबंधन को दिए गए। सरकार ने तय किया कि इसकी खरीदी सीजीएमएससी के माध्यम से करवाई जाए। वहां से भी इसके लिए टेंडर जारी हुए। किसी ने इस टेंडर खरीदी करने की इच्छा नहीं जताई और मामला रुका रहा। डॉ. दत्त और मूर्ति के हटने के बाद वर्ष 2018-19 में सिम्स के वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी प्रक्रियाएं बढ़ाईं। इनमें एमएस डॉ. पुनीत भारद्वाज और डीन डॉ. पीके पात्रा शामिल हैं। इसके बाद खरीदी का पूरा मामला सिम्स प्रबंधन को सौंपा गया। खरीदी की औपचारिकताएं हुईं, पर अभी तक स्थिति जस की तस है। डीएमई डॉ. एसएल आदिले यह जरूर कह रहे कि इसका टेंडर पूरा कर लिया गया है। खरीदी का वर्क आर्डर हो चुका है, पर मशीनें कब आएंगी, मरीजों के लिए यह कब शुरू होंगी? इस सवाल पर वे इसे लगने में छह महीने का वक्त बता रहे हैं। उनके मुताबिक यह मशीन जर्मनी से आएंगी। इसलिए ही लेटलतीफी लगना लाजिमी है। फिर वे इसके सेटअप बनाने और मशीनों को इंस्टाल करने के अलावा डॉक्टरों की नियुक्ति करने की बात कह रहे हैं। 

सब ने उलझाया मामला
पहले जिस ई मार्केट प्लेस यानी (जैम पोर्टल) को सरकारी विभागों में सामान खरीदी के लिए अधिकृत किया, उसमें कई संसाधनों की खरीदी का ऑप्शन ही नहीं था। एसईसीएल, सीजीएमससी, सिम्स सभी ने नियमों के हिसाब से इस पोर्टल में खरीदी की प्रक्रियाएं बढ़ाईं थीं। पर किसी ठेकेदार या बड़ी कंपनी ने खरीदी में रुचि नहीं दिखाई और मामला उलझा रहा। 

पुराने डॉक्टरों पर मढ़ते रहे दोष
सिम्स में डॉक्टरों के बीच गुटबाजी ने सालों तक मरीजों का परेशान कर रखा था। कुछ पुराने पदाधिकारी जो चाहते थे सिम्स का भला हो, जिन्होंने सीटी स्कैन, एमआरआई मशीनों की खरीदी का प्रस्ताव बढ़ाया। उनका ही यहां पदस्थ कुछ डॉक्टरों ने तबादला करवा दिया। उनके जाने के बाद सिम्स की स्थिति और खराब है। सवाल उठ रहे कि इसका दोषी कौन है? दो साल से मामले को अटकाकर रखा जा रहा है?

चार कलेक्टर बदले, अस्पताल में स्थापित नहीं हो पाईं मशीनें 
सीटी और एमआरआई मशीनों की खरीदी का प्रस्ताव वर्ष 2016-17 में शुरू हुआ। तब तत्कालीन कलेक्टर अबलगन पी ने इसकी प्रक्रियाएं शुरू करवाईं। उनके जाने के बाद तत्कालीन कलेक्टर दयानंद पी ने ज्वानिंग दी। उन्होंने भी मामले की गंभीरता को समझा, पर मशीनों की खरीदी नहीं करवा सके। फिर डॉ. संजय अलंग बिलासपुर के कलेक्टर बने। इनके कार्यकाल में भी खरीदी की औपचारिकताएं चलती रहीं। अब सारांश मित्तर यहां प्रशासन के मुखिया बनकर पहुंचे हैं। कुल मिलाकर चार कलेक्टर बदल गए। पर अभी तक खरीदी की प्रक्रिया अटकी है। 

जर्मनी से आएगी मशीन, छह महीने और लगेंगे : सीटी स्कैन और एमआरआई की मशीन भारत नहीं बनती। इसे जर्मनी से मंगाना होगा। टेंडर हो गया है। वर्कऑर्डर भी कर दिया गया है। इसे स्थापित करने और इसका पूरा सेटअप तैयार करने में छह महीने का वक्त और लगेगा। सिम्स में मरीजों को हो रही परेशानी की जानकारी मुझे है। जल्द सब ठीक होगा। 
-डॉ. एसएल आदिले, डीएमई, छत्तीसगढ़

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