ओमिक्रॉन की आहट:14 वर्ष तक के 4.75 लाख बच्चे, डॉक्टर सिर्फ 15 सरकारी सेटअप में फिलहाल सिर्फ 42 बेड तैयार

बिलासपुर2 महीने पहले
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देश के अलग-अलग राज्यों से कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की आहत तेजी से सुनाई देने लगी है। एक्सपर्ट इसे कोविड की तीसरी लहर की आशंका बता रहे हैं। चारों तरफ से बढ़ रहे मामलों ने बिलासपुर की चिंता और बढ़ा दी क्योंकि अभी हमारे यहां पर्याप्त संसाधन नहीं हो पाए हैं। जिले में 0 से 14 वर्ष तक के 4.75 लाख बच्चे हैं। अनुमान है कि सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर ही मंडरा रहा है। दूसरी लहर के शांत होने के चार माह बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पाए। बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं है।

सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि जिले के सरकारी सेटअप में कुल 15 शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। 11 अकेले सिम्स मेडिकल कॉलेज के हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 4 चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं। सभी शहरी क्षेत्र में पदस्थ हैं। ग्रामीण क्षेत्र में एक भी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ की भी किल्लत है। अभी तक सिर्फ 42 बेड बच्चों के लिए तैयार हो पाए हैं।

आईसीएमआर गाइडलाइन के मुताबिक ही हर 50 बेड के अस्पताल पर 10 विशेषज्ञ, 15 ड्यूटी डॉक्टर और 75 स्टाफ नर्स जरूरी हैं। इतने की जरूरत है। संक्रमित होने के बाद बच्चों को क्या दवाइयां देनी हैं, गाइड लाइन जारी नहीं की है।स्वास्थ्य विभागके अफसरों का दावा है कि 108 एंबुलेंस को तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में हमारे पास 15 एंबुलेंस हैं। सभी गाड़ियों में बच्चों की किट उपलब्ध है। कहा जाए तो 5 एंबुलेंस पूरी तरह तैयार हैं। बेड की संख्या और बढ़ाई जा रही है।
सिम्स में अभी बन रही व्यवस्था
जिला अस्पताल में 42 बेड बच्चों के लिए तैयार हो चुके हैं, लेकिन सिम्स में अभी इंतजाम अधूरे हैं। कोविड अस्पताल के फस्ट फ्लोर में 12 आईसीयू और 30 ऑक्सीजन बेड रेडी हो चुके हैं। अन्य मरीजों के लिए 120 बेड तैयार हैं।

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