प्रेगनेंसी में असावधानी वजह:सालाना 6 लाख बच्चों का जन्म, 100 में 16 शिशु कम वजन के, 28 दिन के अंदर 3% और सालभर में 4.33% की मौत

बिलासपुरएक महीने पहलेलेखक: राजू शर्मा
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स्वास्थ्य विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े, नियमित चेकअप नहीं और आहार नहीं मिलने से बच्चों पर असर - Dainik Bhaskar
स्वास्थ्य विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े, नियमित चेकअप नहीं और आहार नहीं मिलने से बच्चों पर असर

छत्तीसगढ़ में 100 में 16 बच्चे कमजोर पैदा हो रहे हैं। जन्म के बाद इन बच्चों का वजन 2.50 किलोग्राम से कम है। जबकि सामान्य नवजात शिशु का औसत वजन 3 किलोग्राम के आसपास रहता है। लो बर्थ वेट बेबी काफी नाजुक होते हैं। डॉक्टर सामान्य बच्चों से ज्यादा इनकी देखरेख कर रहे हैं। इसके बाद भी अधिकांश बच्चों की मृत्यु हो रही है। प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर वर्ष प्रदेश में 6 लाख से अधिक बच्चों का जन्म हो रहा है।

इसमें 3% यानी 18 हजार नवजात जिनकी जन्म के 28 दिन के अंदर मृत्यु हो रही है। वहीं 4.33% यानी 26 हजार बच्चों की मृत्यु जन्म के एक साल के अंदर हो रही है। 16% यानी 96 हजार से अधिक शिशु कमजोर पैदा हो रहे हैं। यानी इनका वजन 2.50 किलोग्राम से कम है। ये बच्चे क्यों कमजोर पैदा हो रहे हैं? इस बारे में एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान मां का नियमित चेकअप नहीं कराना और खान-पान पर ध्यान नहीं देना मुख्य कारण है।

शुरुआत से कमजोर होने वाले अधिकांश बच्चों की मृत्यु हो जाती है। जो जीवित रहते हैं उनका शरीर अन्य बच्चों की तरह विकसित नहीं हो पाता। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान बेहतर खान-पान और रूटीन चेकअप करवाने से हेल्दी बच्चा पैदा होने की संभावना है।

निमोनिया और डायरिया से एक वर्ष के भीतर जा रही जान
अब एक साल वाले बच्चों की जान जाने का मुख्य कारण है निमोनिया और डायरिया। ये दोनों बीमारी बच्चों को ज्यादा होती है, इससे उनकी मृत्यु हो रही है। तीसरा कारण है कुपोषण और चौथे में अन्य।

सिर्फ 10% बच्चों को मिल रहा संतुलित आहार
2.50 किलोग्राम से कम वजन वाले शिशु इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि छत्तीसगढ़ की 30% मम्मियां ही अंडर-बेट यानी कम वजन वाली हैं। 35% नाटी हैं। कम वजन और कम उंचाई होने के कारण बच्चे भी कमजोर पैदा हो रहे हैं। एक कारण यह भी है कि प्रदेश में गर्भ के भीतर 10% बच्चों को संतुलित आहार मिल रहा है। 90% बच्चों को पर्याप्त आहार नहीं मिल रहा है। इसका मुख्य कारण गरीबी और जानकारी का आभाव है।

एक्सपर्ट व्यू- समय से पहले जन्म से मौत

बच्चों की मृत्यु के तीन मुख्य कारण हैं। समय से पहले यानी 37 हफ्ते के अंदर नवजात का जन्म होना। दूसरा कारण है बर्थ एसफिक्सिया। यानी ऐसी जगह डिलिवरी होना जहां डॉक्टर नहीं है। ऑक्सीजन नहीं मिलने से बच्चे की मृत्यु हो रही। तीसरा कारण है इंफेक्शन। यानी जन्म के बाद साफ-सफाई से बच्चे की नाल काटनी चाहिए और शरीर की अन्य सफाई है जो नहीं हो पाती। - डॉ. सुशील कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ, सेंट्रल एग्जीक्यूटिव आईएपी

इंस्टीट्यूशनल को बढ़ावा दिया जा रहा
शासन का प्रयास है कि डिलिवरी अस्पतालों में ही हो। इंस्टीट्यूशनल डिलिवरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही प्रसव पूर्व जांच को नियमित करने और कोई गंभीरता होने पर रोगी को रेफर करने के लिए के शहर से लेकर गांवों तक हमारे स्वास्थ्य कर्यकर्ता कार्य कर रहे हैं। - डॉ. सुभाष मिश्रा, प्रवक्ता, छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग