छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित अरपा नदी के संरक्षण और संवर्धन को लेकर अब कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके लिए सोमवार को कलेक्ट्रेट के मंथन सभा कक्ष में अफसरों ने बैठक ली। इसमें हाईकोर्ट से गठित न्यायमित्रों ने अरपा के उद्गम स्थल से अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया। तब अफसरों ने 26 नवंबर को मौका निरीक्षण कर कार्रवाई करने का फैसला लिया। इसके साथ ही अरपा नदी को बचाने के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाने को लेकर भी चर्चा की और अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए भी कठोर व समुचित उपाय करने की बात कही।
अरपा नदी के संरक्षण और संवर्धन को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित न्यायमित्रों ने अरपा की बदहाली को लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने कलेक्टर सहित अफसरों को अरपा को संरक्षित करने के लिए बनाई गई कार्ययोजना की जानकारी मांगी थी। अब इस केस की फिर से सुनवाई होने वाली है। यही वजह है कि कोर्ट में जवाब देने से पहले अफसरों ने अरपा को संरक्षित करने के लिए कार्य योजना बनाने बैठक बुलाई।
अफसरों ने अरपा को संवारने का किया दावा
इस बैठक में अफसरों ने जिला स्तर पर नगर निगम की ओर से दूषित जल को ट्रीटमेंट के बाद नदी में छोड़ने, सिंचाई विभाग की ओर से जल को संरक्षित करने के लिए निर्माण के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना, वन विभाग की ओर से नरवा प्रोजेक्ट तहत मृदा क्षरण को रोकने, नदी में जल प्रवाह को निरंतर बनाए रखने के लिए निर्माण और वृक्षारोपण के लिए कार्ययोजना बनाने की जानकारी दी। इसी तरह जिला पंचायत की ओर से मनरेगा के तहत जल संरक्षण एवं भू - जल स्तर के संवर्धन के लिए कार्ययोजना बनाने की बात कही। खनिज विभाग ने अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने, मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना तहत नदी के किनारे तट वृक्षारोपण कार्ययोजना, उद्योग विभाग की ओर से फिल्टरेशन के बाद दूषित जल का निराकरण, पर्यावरण विभाग की ओर से भू-जल स्तर के मापन की विस्तृत कार्ययोजना बनाने की बात कही गई।
न्यायमित्रों ने कहा- अरपा के उद्गम स्थल को पहले बचाएं अफसर
इस बैठक में हाईकोर्ट से गठित न्याय मित्र वाय सी शर्मा , एएस कछवाहा, यूएनएस देव , पीएल चंद्राकर , सीके केशरवानी, स्वर्ण कुमार चंदेल , याचिकाकर्ता अरविंद कुमार शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सबसे पहले अरपा नदी के उद्गम स्थल को संवारने की जरूरत है, जिस पर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके चलते वहां अवैध कब्जा हो रहा है। इस पर अफसरों ने 26 नवंबर को मौका निरीक्षण सहित अतिक्रमण हटाए जाने का फैसला लिया।
CM सलाहकार ने अरपा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और सदस्यों की ली बैठक
इधर, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने भी सोमवार को अरपा विकास प्राधिकरण के पदाधिकारियों की बैठक ली। इसमें प्राधिकरण के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अभयनारायण राय, सदस्य महेश दुबे, नरेंद्र बोलर और आशा पांडेय के साथ ही जिला प्रशासन के अफसर मौजूद रहे। उन्होंने अरपा में चल रहे विकास कार्य, एनीकट के निर्माण कार्य और प्रदूषित जल के निस्तार के लिए नालों का निर्माण, जलकुंभी एवं उथली होने से नदी को बचाने सघन वृक्षारोपण कर कटाव रोकने के ठोस उपाय करने के निर्देश दिए।
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