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भ्रष्टाचार:बिल्डर व रसूखदारों के कहने पर जमीनों की हेराफेरी तहसीलदार, आरआई, पटवारी पर सांठगांठ के आरोप

बिलासपुर14 दिन पहलेलेखक: आशीष दुबे
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प्रतिकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतिकात्मक फोटो
  • क्या किसान की मौत से निकल पाएगा इस सिस्टम का इलाज?

तखतपुर के राजा कापा में पटवारी द्वारा रिश्वत लेने और किसान के आत्महत्या करने की घटना ने राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है। प्रश्न इस बात को लेकर है कि तहसीलों में आखिर आम पब्लिक का काम समय पर क्यों नहीं हो पाता है।

उन्हें छोटे-छाेटे कामों के लिए क्यों चक्कर लगवाए जाते हैं? ऋण पुस्तिका, फौती और नामांतरण सहित अन्य कामों के लिए क्यों उन्हें सही तरीके से जवाब नहीं मिलता? शायद इसी घुमाने की प्रवृत्ति के कारण आम आदमी दलाल तक पहुंचने के लिए मजबूर हो जाता है और कई बार पैसे देकर भी उनके काम समय पर नहीं हो पाते।

दैनिक भास्कर के पास तहसीलदार, आर आई और पटवारियों के उन कृत्यों की लंबी सूची है, जिनमें पब्लिक कलेक्टोरेट में बड़े अधिकारियों से काम कराने की गुहार लगा रही है। काम नहीं होने से परेशान क्षुब्ध व्यक्ति तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों की लगातार लंबी शिकायतें कर रही है।

कभी दस्तावेजों के साथ तो कभी लिखित तौर पर। पर कार्रवाई लगभग सब में अटकी है। कथित रूप से जांच चल रही है, पर यह कब तक यूं ही चलती रहेगी और कब आम आदमी को राजस्व अधिकारियों द्वारा जमीन के कामों में अंधेरगर्दी से मुक्ति मिलेगी। जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

बिलासपुर के कई अधिकारियों की दर्ज है दस्तावेजों में शिकायतें

केस-1: तहसीलदार ने बिल्डर के नाम चढ़ाई जमीन, पद का दुरुपयोग

कलेक्टोरेट में हुई पहली शिकायत पूर्व तहसीलदार टीआर भारद्वाज और सिरगिट्टी पटवारी अचला तंबोली की है। यहां संतराम यादव नाम के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि पूर्व तहसीलदार ने गलत तरीके से पद का दुरुपयोग कर एक खसरा नंबर की जमीन बिल्डर के नाम पर कर दी। यह शिकायत जमीन का खसरा नंबर 179/2 और 180/2 की हुई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि यहां खड़ी फसल पर सीमांकन के दौरान उनके द्वारा आपत्ति भी लगाई थी। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और इसे बिल्डर के नाम पर चढ़ा दिया गया।

कलेक्टोरेट में हुई पहली शिकायत पूर्व तहसीलदार टीआर भारद्वाज और सिरगिट्टी पटवारी अचला तंबोली की है। यहां संतराम यादव नाम के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि पूर्व तहसीलदार ने गलत तरीके से पद का दुरुपयोग कर एक खसरा नंबर की जमीन बिल्डर के नाम पर कर दी। यह शिकायत जमीन का खसरा नंबर 179/2 और 180/2 की हुई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि यहां खड़ी फसल पर सीमांकन के दौरान उनके द्वारा आपत्ति भी लगाई थी। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और इसे बिल्डर के नाम पर चढ़ा दिया गया।

केस-2: दो पूर्व एसडीएम और रीडर के खिलाफ भी जारी है जांच

कोटा के दो पूर्व एसडीएम राजेंद्र गुप्ता और डी डाहिर की शिकायत की जांच चल रही है। शिकायतकर्ता कस्तूरबा नगर के संतोष यादव है, जिन्होंने बताया है कि इन दोनों एसडीएम के कार्यकाल में कोटा में अवैध प्लाटिंग, पैसा लेकर भू-माफिया के पक्ष में काम करना और कीमती जमीनों में पैसे लेकर पैसे देने वालों के पक्ष में काम करने की बात कही गई है। इनके साथ एक रीडर निर्मल शुक्ला पर आरोप है कि इन्हें मलाईदार जगह में जानबूझकर रखा गया था जो अधिकारियों के काम करता आ रहा था। इस प्रकरण में भी जांच करने और सच्चाई सामने लाने की मांग हुई है।

केस-3: आदिवासी को जमीन बेचनी थी घुमाया, मंत्री से शिकायत

बिलासपुर तहसीलदार की राजस्व मंत्री से शिकायत हुई है। लिखा है कि उन्हें अपनी जमीन बेचनी थी। जमीन दुकाली बाई बेवा पीलूराम के नाम पर थी। इसे बेचने के लिए उन्होंने कलेक्टोरेट में आवेदन किया। चूंकि यह जमीन महमंद में है, इसलिए कलेक्टर ने कुछ रिपोर्ट बनाने के लिए यह मामला तहसीलदार को फारवर्ड किया। लेकिन वहां कई महीने गुजर गए, जिसके चलते जो जमीन खरीददार को बाहर से आना पड़ा और उसे काफी दिक्कत हुई। मामले में बसंत जांगड़े सहित अन्य लोगों ने मंत्री से गुहार लगाई है कि इस कठिन प्रक्रिया को संज्ञान में लिया जाए और तहसीलों में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि लोगों को जमीन के काम के संबंध में चक्कर लगाना नहीं पड़े।

केस-4: 40 साल से कब्जा, तहसीलदार ने हटा दिया

दूसरी शिकायत अतिरिक्त तहसीलदार गनियारी शिल्पा भगत की है। निरतू के मोहित सूर्यवंशी ने लिखा है कि निरतू भूमि खसरा नंबर 887/1 में मकान, बाड़ी और बाकी जगहों पर 40 साल से उनका कब्जा रहा। गांव के गौटिया दिलीप सोनी के कहे जाने पर अतिरिक्त तहसीलदार ने मामले में जमीन की नापजोख भी नहीं करवाई और मकान सहित बाड़ी और बाकी चीजें ढहा दीं। उन्होंने मामले की शिकायत कलेक्टोरेट में की है, जहां जांच जारी है।

केस-5: गलत तरीके से किया जमीन का आदेश

तीसरी शिकायत भी गनियारी की अतिरिक्त तहसीलदार शिल्पा भगत की है। आरोप लगा है कि लॉकडाउन की स्थिति में उन्होंने दुखवा के पक्ष में स्टांप पेपर और अन्य दस्तावेजों में कांट छांट कर आदेश पारित कर दिया। यहां दुखवा और मनहरण वगैरह के बीच जमीन का विवाद चल रहा था, जिसकी सही तरीके से सुनवाई नहीं हुई। यह आदेश 22 जुलाई 2020 का है, जिसे गलत तरीके से जारी करने के आरोप लगाया गया है।

कोई तहसीलदार के आदेश से असहमत है तो अपील कर सकता है

बिलासपुर के पूर्व तहसीलदार की शिकायत का मामला संज्ञान में है। उसमें आवेदक अपील में आ गया है। ऐसे ही वे लोग जो तहसीलदार के आदेश से असहमत हैं वे अपील कर सकते हैं। बाकी गड़बड़ी के मामलों की जांच होती है। शिकायत सही मिलने पर कार्रवाई भी करते हैं।

- देवेंद्र पटेल, एसडीएम, बिलासपुर

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