जमीन घोटाला:बिलासपुर में 179 एकड़ कोटवारी जमीन का बंदरबाट, सकरी में 73 एकड़ बिक गई

बिलासपुर2 महीने पहलेलेखक: आशीष दुबे
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  • सरकार ने जीवन यापन करने दी थी भूमि, कोटवारों ने जमीन दलालों से मिलकर किया खेल, शहर से लगी जमीनें बेच दीं

बिलासपुर जिले के 121 कोटवारों ने मिलकर 179 एकड़ सरकारी जमीनों का बंदरबाट कर दिया। यह जमीन करोड़ों रुपए की थी जिसे उन्होंने दूसरों को बेचकर उनके नाम पर कर दी है। यह जमीनें उन्हें बतौर जीवन यापन करने दी गई थीं। आंकड़े बता रहे हैं कि सबसे ज्यादा सकरी में कोटवारी जमीन बिकी है।

ऐसा इसलिए क्योंकि यह शहर से लगी जगह और फिलहाल निगम का हिस्सा भी। इसलिए जमीन दलाल और भू-माफियाओं की नजर इस क्षेत्र में जमी रही। जैसे ही मौका मिला उन्होंने कोटवारी जमीनों को खरीदने को लेकर भी कोई कसर नहीं छोड़ी। अब यहां इन जमीनों में कहीं दुकान बन चुकी है, कहीं मकान। सरकारी आदेश है ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री शून्य हो। कोटवारों को उनकी जमीन लौटाई जाए। जिसकी प्रक्रिया बढ़ा दी गई है। इसके बाद से ही जमीन दलाल और माफियाओं के बीच हड़कंप मचा है।दैनिक भास्कर ने पड़ताल में पाया कि सकरी क्षेत्र में कोटवार को आवंटित 161 एकड़ में 73 एकड़ जमीनें क्रय की गई हैं। जमीनों के खरीद फरोख्त में दूसरा नंबर मस्तूरी का है, जिसके बाद बिलासपुर और फिर दूसरे ब्लॉक का। सरकार कोटवारों को जमीनें आवंटित करती आ रही है।

साल 1950 में मालगुजारों ने भी उन्हें रहने बसने के लिए जमीनें दी हैं। इस जमीन को कोटवार लगातार बेचते रहे। स्थिति यह आ गई कि इनकी जमीनों में कहीं पर भवन खड़ा है तो कहीं पर दुकान चल रही। किसी जगह पर खेती भी हो रही है, लेकिन जमीन बिक चुकी इसलिए कोटवार मालिक नहीं कोई दूसरा व्यक्ति इसका स्वामी बन गया है। कोटवारों की स्थिति खराब हो गई है। उन्हें सरकार से न तो उस तरह से वेतन मिलता और ना ही उनके लिए किसी तरह का कोई इंतजाम है। चूंकि कोटवार सरकार का एक अहम अंग है। जो एक तरह से चुनाव और दूसरे सरकारी कामों में बेहतर तरीके से काम करते हैं, इसलिए ही सरकार ने उनकी जमीनों को दोबारा लौटाने का निर्णय लिया है। बिलासपुर जिले में पता चला है कि यहां 91 गांवों में कोटवारों की 179 एकड़ जमीन का बंदरबांट हुआ है। ऐसा इसलिए हुआ कि कोटवारों को जमीनों का मालिकाना हक दिया गया था, जिसका उन्होंने इंतजाम के हिसाब से इस्तेमाल भी कर लिया। लेकिन अब कोर्ट के एक फैसले के बाद अब राज्य सरकार ने इन जमीनों को दोबारा कोटवारों के नाम पर करने की प्रक्रिया बढ़ा रही है। जिसकी सूची तैयार कर ली गई है।

यह भी बड़ा सवाल: आखिर नामांतरण कैसे हो गया?
जिले में बड़ी संख्या में कोटवारों ने जमीनें बेची हैं। पर आश्चर्य की बात यह है कि जिन कोटवारों ने जमीन बेची उन्होंने पटवारी कार्यालय से ही सेवा भूमि के कागजात निकलवाए। क्यों पटवारियों ने इसे नहीं देखा? उप पंजीयकों ने भी कोई आपत्ति नहीं की? इसके बाद यह भी सवाल है कि आखिरकार सरकारी भूमि का नामांतरण आखिर कैसे दूसरे व्यक्ति के नाम पर हो गया, जबकि धारा 109 के प्रावधानों के अनुसार विधि पूर्वक हस्तांतरण होने पर ही नामांतरण का प्रावधान है। जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

जानिए, कहां कितनी खरीदी-बिक्री
बिलासपुर के 11 कोटवारों ने 9.7123 हेक्टेयर जमीन बेची है। बिल्हा के 29 कोटवारों ने 4.529 हेक्टेयर भूमि का पंजीयन किया है। मस्तूरी में 15 कोटवारों ने 9.462 हेक्टेयर जमीन बेच डाली है। तखतपुर में 13 कोटवारों ने 12.06 हेक्टेयर जमीन बेची है। कोटा में 7 कोटवारों ने 7.058 हेक्टेयर जमीन बेची है। रतनपुर और बेलगहना में फिलहाल कोई कोटवारी जमीन नहीं बेची गई है।

668 कोटवारों को दी गई 1343 एकड़ जमीन
बिलासपुर जिले के नौ विकासखंड में 706 गांव है। कोटवारों को इनके 91 गांवों में जमीनें आवंटित हुई थी। यहां ही 368 कोटवारों को कुल 1343 एकड़ जमीन दी गई थी। इनमें 121 कोटवारों ने 179 एकड़ सरकारी जमीनों का बंदरबांट किया है। सबसे ज्यादा सकरी के 74 गांव में 46 गावों में आवंटित हुई जमीनों को कोटवारों ने दूसरे से क्रय किया है। प्रशासन के अधिकारी इस आंकड़े को देखकर खुद ही हैरान हैं। बिलासपुर के 97 गांवों में 11 गांव की जमीन बिक गई है। यह भी आंकड़ा आश्चर्य करने वाला है।

सीधी बात; देवेंद्र पटेल, एसडीएम, बिलासपुर
कोटवारों को लौटाएंगे जमीन

​​​​​​​सपुर जिले में इतने बड़े पैमाने पर कोटवारों की जमीन कैसे बिक गई?
- इसे लेकर कोर्ट का निर्देश था। उन्हें मालिकाना हक मिला। जिसके बाद ही कोटवारों ने जमीनों को बेचना शुरू किया।
सरकारी निर्देश है, जमीनों की रजिस्ट्री शून्य कराएं, कोटवारों को उनकी जमीन लौटाएं, कैसे करेंगे?
-हमारे यहां इसकी प्रक्रिया तेज हो गई है। सारी रजिस्ट्री शून्य होंगी।
कोटवार की जमीन बिकने के बाद किसी जगह पर मकान बन गए हैं कहीं दुकान, कैसे हटाएंगे उन्हें?
- जहां परेशानी आएगी, कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। लेकिन सरकारी निर्देश हैं, पालन करवाकर रहेंगे।

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