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राहत:10 साल बाद बिलासपुर डेंगू मुक्त, 2020 में एक भी मरीज नहीं मिला

बिलासपुर3 महीने पहले
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  • 2018 में सबसे ज्यादा 75 और 2019 में 19 मरीज मिले, कोरोना में सफाई पर ध्यान देने का नतीजा

बिलासपुर साल 2020 में डेंगू मुक्त रहा है। 10 वर्ष में पहली बार ऐसा मौका मिला जब डेंगू की चपेट में कोई नहीं आया। 2010 से लेकर 2019 तक लगातार डेंगू के मरीज मिले। वर्ष 2020 में संख्या शून्य थी। बीते पूरे वर्ष में 23 डेंगू संदेही मिले थे। जिनकी एलाइजा जांच की गई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। जबकि पिछले वर्ष डेंगू के मरीज मिले थे। डेंगू रोगी नहीं मिलने का मुख्य कारण साफ-सफाई और खुद की सुरक्षा का ध्यान रखना एक्सपर्ट डॉक्टर बता रहे हैं। कोरोना के कारण लोगों का आना-जाना कम हुआ तो लाेकल ट्रांसमिशन नहीं हुआ। ये भी डेंगू से सुरक्षित रहने की वजह है। डॉक्टर अखिलेश देवरस का कहना है कि कोरोना से बचने के लिए लोगों ने खुद की सेहत पर ज्यादा ध्यान दिया है। घरों से जरूरत पर ही निकले। बाहर का खानपान कम किया। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया। जिसके कारण लोग डेंगू की चपेट में नहीं आए। कोरोना-कोल में शहर की साफ-सफाई व्यवस्था भी बेहतर रही। जिसके कारण मच्छरों का प्रकोप कम रहा, जिसके कारण डेंगू की बीमारी नहीं हुई। आगे भी लोगों को इसी तरह स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए ताकि वे बीमार न हों।

बाहर से लोग कम आए इसलिए
सीएमएचओ डॉक्टर प्रमोद महाजन ने बताया कि बाहर से डेंगू प्रभावित व्यक्तियों के आने की संख्या कम रही। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होता है। मच्छर के भीतर डेन वायरस होता है। जब ये मच्छर किसी डेंगू प्रभावित व्यक्ति को काटेगा तो डेन वायरस एक्टिव हो जाता है। इसके बाद जब भी वह किसी अन्य व्यक्ति को काटेगा तो उसे डेंगू हो जाता है। 3 सप्ताह तक ये मच्छर जिंदा रहता है। एडीज मच्छर को अंडे से मच्छर बनने तक 10 दिन का समय लगता है।

2018 में चार मरीजों की मौत हुई थी
शहर में पिछले सात सालों के दौरान सबसे ज्यादा डेंगू के केस 2018 में सामने आए थे। इस दौरान 168 संदेही मिले थे। 75 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। चार मरीजों की मौत भी हुई थी।

लक्षण... ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार

  • मसूड़ों व नाक से खून बहना। ठंड लगने के बाद तेज बुखार होना।
  • आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना। चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना।
  • कमजोरी लगना, भूख न लगना, जी मित-लाना और मुंह का स्वाद खराब होना। गले में दर्द
  • ब्लड प्लेटलेट काउंट जांच कराने पर तेजी से कम होते हैं।

मलेरिया के 57 मरीज मिले
मलेरिया की बात करें तो 2020 में 57 लोग मलेरिया की चपेट में आए और सभी ठीक हो गए। गौरला, पेंड्रा-मरवाही अलग जिला बनने के बाद बिलासपुर की सुरक्षा और बढ़ गई है। क्योंकि सबसे ज्यादा केस जीपीएम में ही मिलते थे। राहत की बात है कि पिछले छह सालों में जिले में मलेरिया से एक भी मौतें नहीं हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कह रहे हैं कि जिले में 2015 से लेकर अक्टूबर 2020 इन छह वर्षों में 6936 लोग मलेरिया की चपेट में आए हैं।

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