बिलासपुर के मुरितराम का जज्बा:6 साल की उम्र में चेचक ने छीन ली दोनों आंखें, दृष्टिहीन होकर भी सवार रहे बच्चों का भविष्य; दे रहे निशुल्क शिक्षा

बिलासपुर3 महीने पहले
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मुरितराम रोज इस तरह से बच्चों की क्लास लेते हैं। - Dainik Bhaskar
मुरितराम रोज इस तरह से बच्चों की क्लास लेते हैं।

बिलासपुर के मुरितराम कश्यप शिक्षा की अलख जगाने आसपास के बच्चों को फ्री में ट्यूशन दे रहे हैं। जिससे गरीब और लाचार बच्चे पढ़ाई से वंचित न रह जाएं और वे अपने शहर, प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकें। मुरितराम दृष्टिहीन हैं, उनकी दोनों आंखों की रोशनी चेचक की वजह से 6 साल की उम्र में ही चली गई थी। इसके बावजूद उनके बच्चों को पढ़ाने का जज्बा कम नहीं हुआ है।

पढ़ाई के दौरान चेयर केनिन का काम सीखा

मुरितराम कश्यप(63) बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र के रहने वाले हैं। मुरितराम रेलवे के रिटायर कर्मचारी हैं। सर्विस के दौरान ही उन्होंने शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने की मन में ठान लिया था। यही कारण है कि जब भी मौका मिला वे शिक्षा का दान करने से हिचके नहीं। उन्होंने बताया कि 6 साल की उम्र में ही उन्हें चेचक हुआ था। चेचक की वजह से ही उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी। तब वे जांजगीर जिले के मलदा गांव में अपने माता-पिता के साथ रहते थे। पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण मैट्रिक से आगे पढ़ नहीं पाए। मुरितराम में पढ़ाई करने की बचपन से ही ललक थी। इस कारण वे बिलासपुर के जूनी लाइन स्थित शासकीय ब्रेल स्कूल में आकर पढ़ाई करने लगे। वहीं हॉस्टल में रहते-रहते उन्होंने चेयर केनिन का काम भी सीख लिया था।

मुरितराम के पास इस तरह से करीब 20 बच्चे पढ़ते हैं।
मुरितराम के पास इस तरह से करीब 20 बच्चे पढ़ते हैं।

रेलवे के अधिकारी ने दिया जॉब का ऑफर

उसी समय रेलवे के एक बड़े अधिकारी स्कूल घूमने पहुंचे थे। मूरितराम को काम करता देख उन्हें रेलवे में जॉब का ऑफर दिया और रेलवे में चेयर केनिन के काम में लगा दिया। फिर उन्होंने नौकरी करते-करते ही मैट्रिक की परीक्षा पास की। पर पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके।

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बड़े-बड़े पदों पर काबिज हैं उनसे पढ़े बच्चे

मुरितराम ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ते हैं और बच्चों को पढ़ाते भी हैं। उनके पास पढ़ने वाले बच्चे सामान्य हैं, वे दिव्यांग नहीं हैं। मुरितराम पहले बच्चों के स्कूल सब्जेक्ट की बुक ब्रेल लिपि में लेते हैं। फिर उसका अध्ययन कर बच्चों को पढ़ाते हैं। उनका कहना है कि वह कम पढ़े हैं, लेकिन उनके पढ़ाए बच्चे आज बड़े-बड़े पोस्ट पर सर्विस कर रहे हैं। मुरितराम ने बताया कि वो पिछले 10 सालों से इसी तरह गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं। उनके पास इन दिनों करीब 20 बच्चे पढ़ते हैं।

पत्नी ने कहा-सुखमय बीत रहा जीवन
शिक्षक की पत्नी मीना कश्यप(56) ने बताया कि जब उनकी शादी हुई थी तो दोनों पति-पत्नी के अलावा उनके साथ कोई नहीं रहता था। तब पति के ड्यूटी जाने आने पर उनके बारे में चिंता होती थी। फिर बाद में उन्हें समझ आया कि उनके पति को सहारे की जरूरत नहीं है। वे खुद अपना सारा काम कर लेते हैं। मीना ने बताया कि हमें कोई दिक्कत नहीं है और जीवन सुखमय बीत रहा है।

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बेटा बोला-जो अधिकांश सक्षम पिता नहीं कर पाते, मेरे पिता ने किया

मुरितराम के चार बच्चे हैं, दो लड़के और दो लड़की। उनके बेटा विकास(28) ने बताया कि उन्हें गर्व होता है कि उनके पापा ने दिव्यांग होकर भी इतने अच्छे से उनकी परवरिश की है। उसे अपने दोस्तों को घर लाकर अपने पिता से मिलवाने पर गर्व महसूस होता है। क्योंकि अधिकांश पिता शारीरिक रूप से सक्षम होते हुए भी अपने बच्चों की परवरिश अच्छे से नहीं कर पाते, पर उनके पिता ने दिव्यांग होते हुए भी अपना फर्ज निभाया है। विकास खनिज विभाग में क्लर्क काम करते हैं। वहीं उनसे पढ़ने वाली छात्रा ने बताया कि उसने कई जगह ट्यूशन ली है, यहां उसे जितना अच्छे से समझ आता है, कहीं और ऐसी पढ़ाई नहीं होती।

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