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CGRMMU में गड़बड़ी:MMBS की जगह होम्योपैथी डॉक्टर से उपचार, जिनके नाम दिए वह भी गलत; हाईकोर्ट ने ठेका कंपनी और सरकार से जवाब मांगा

बिलासपुर7 दिन पहले
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्र में चलाई जा रही मेडिकल मोबाइल यूनिट में अनियमितता मिलने पर राज्य सरकार और ठेका कंपनी से जवाब तलब किया है। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्र में चलाई जा रही मेडिकल मोबाइल यूनिट में अनियमितता मिलने पर राज्य सरकार और ठेका कंपनी से जवाब तलब किया है।
  • ग्रामीण मोबाइल मेडिकल यूनिट में आर्थिक अनियमितता और अनुसूचित क्षेत्र के लोगों की जान से खिलवाड़
  • शिकायत पर जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं, बिलासपुर हाईकोर्ट से कार्रवाई करने की मांग को लेकर याचिका

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना ग्रामीण मोबाइल मेडिकल यूनिट (RMMU) में आर्थिक अनियमितता और आदिवासियों की जान से खिलवाड़ा करने का मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद हाईकोर्ट ने ठेका कंपनी से जवाब मांगने के साथ ही राज्य सरकार से तीन सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की बेंच में हुई।

रायपुर के रहने वाले संजय तिवारी ने अधिवक्ता हरि अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसमें बताया कि राज्य सरकार ने अनुसूचित क्षेत्र के 16 जिलों के लिए RMMU योजना बनाई। इसके लिए टेंडर जारी किया जिससे अनुसूचित क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा घर में मिल सके। विभिन्न नियम शर्तों वाले इस टेंडर को जय अंबे इमरजेंसी सर्विस लिमिटेड कंसोटियम सम्मान फाउंडेशन ने प्राप्त किया है।

जिन एंबुलेंस का चलना बताया, वह खड़ी मिलीं
शासन ने ठेके के लिए कई शर्ते रखी हैं। इनमें हर एंबुलेंस में MBBS डॉक्टर व नर्सिंग टीम होनी चाहिए। एंबुलेंस साल 2017 से पुरानी नहीं, 30 मरीजों की जांच प्रति दिन करना होगा। इन शर्तों पर ठेका कंपनी ने 2018 में 5 साल के लिए एग्रीमेंट किया। कुछ दिनों बाद याचिकाकर्ता ने पाया कि इसमें अनियमितता हो रही है। जिन गाड़ियों को चलना बता रहे हैं, वह खड़ी हैं, इलाज नहीं हो रहा, डॉक्टर व उपकरण की कमी है, पुरानी एंबुलेंस का इस्तेमाल हो रहा है।

नोडल अधिकारी ने जांच कर 30 जुलाई को रिपोर्ट भेज दी
नोडल अधिकारी ने जांच कर 30 जुलाई 2020 को रिपोर्ट संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं को भेजी। जहां MBBS रखने थे वहां होम्योपैथी और डेंटल डॉक्टर रखे गए हैं। जिनका नाम दिया गया है, वह भी गलत हैं। मई और जून 2020 का सर्वे भी किया गया। इसमें पाया गया कि कंपनी 787 दिन का बिल पेश की है जबकि GPS लोकेशन में 319 दिन ही वाहन चलने का पता चला। सितंबर 2019 से जून 20 तक 97 मरीज ही OPD पहुंचे। हाईकोर्ट से इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करवाने की मांग की गई है।

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