सिस्टम से फिर हार गई जिंदगी:​​​​​​​बिलासपुर में जिला अस्पताल के दरवाजे पर डेढ़ घंटे तड़पती रही महिला; पहले तो गार्ड ने गेट नहीं खोला, जब डॉक्टर पहुंचे तब तक मौत हो चुकी थी

​​​​​​​बिलासपुर5 महीने पहले

छत्तीसगढ़ में फिर एक जिंदगी सिस्टम के सामने हार गई। बिलासपुर के जिला अस्पताल (कोविड अस्पताल) के दरवाजे पर महिला डेढ़ घंटे तक तड़पती रही। पहले तो गार्ड ने गेट ही नहीं खोला। परिजनों के SDM से बात करने के बाद किसी तरह गेट खुला। इसके बाद एंबुलेंस अंदर गई, लेकिन महिला को भर्ती कराने के लिए कोई नीचे ही नहीं आया। पत्रकारों ने कॉल किया तो डॉक्टर नीचे आए, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।

बिल्हा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला में कोविड के लक्षण देख डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
बिल्हा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला में कोविड के लक्षण देख डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

दरअसल, बिल्हा के गांव भंवरा भाठा निवासी मां श्याम बाई (55) की तबीयत बुधवार को अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें लेकर बिल्हा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गए थे। वहां महिला में कोविड के लक्षण देख डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। एंबुलेंस से परिजन श्यामा बाई को कोविड अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन गार्ड ने गेट ही नहीं खोला। करीब आधे घंटे तक यह सब चलता रहा। इसके बाद उनके बड़े बेटे ने SDM को कॉल किया।

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SDM के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन ने खुलवाया गेट

SDM ऑफिस से अस्पताल को निर्देश मिलने के बाद गार्ड ने गेट खोला और ऊपर बनाए गए कोविड वार्ड में सूचना दी। इसके बाद करीब एक घंटे तक अंदर दरवाजे पर एंबुलेंस खड़ी रहीं, लेकिन कोई भी मरीज को लेने के लिए नहीं आया। अंदर महिला दर्द से तड़प रही थी। इस बीच जानकारी मिलने पर पत्रकारों ने अस्पताल के कोविड इंचार्ज डॉ. अनिल गुप्ता को सूचना दी। वह स्टाफ के साथ नीचे आए, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।

श्यामा बाई के बेटे धीरज ने बताया, SDM ऑफिस से अस्पताल को निर्देश मिलने के बाद गार्ड ने गेट खोला और ऊपर बनाए गए कोविड वार्ड में सूचना दी। इसके बाद करीब एक घंटे तक अंदर दरवाजे पर एंबुलेंस खड़ी रहीं, लेकिन कोई भी मरीज को लेने के लिए नहीं आया।
श्यामा बाई के बेटे धीरज ने बताया, SDM ऑफिस से अस्पताल को निर्देश मिलने के बाद गार्ड ने गेट खोला और ऊपर बनाए गए कोविड वार्ड में सूचना दी। इसके बाद करीब एक घंटे तक अंदर दरवाजे पर एंबुलेंस खड़ी रहीं, लेकिन कोई भी मरीज को लेने के लिए नहीं आया।

बेटा बोला- पता है कोरोना के चलते दिक्कतें हैं, लेकिन गाइड तो करते

वहीं श्यामा बाई के बेटे धीरज मानिकपुरी ने बताया कि उनकी मां एंबुलेंस के अंदर ही तड़पती रहीं, लेकिन अस्पताल का कोई स्टाफ मदद के लिए नहीं आया। उन्होंने कहा कि पता है कि कोरोना संक्रमण के चलते बहुत दिक्कत है। बेड नहीं हैं, डॉक्टर, मरीज, स्वास्थ्यकर्मी सब परेशान है, लेकिन मां की कंडीशन देखना चाहिए थी। वह सीरियस थीं। कुछ गाइड करते, हमें ही बताते कि क्या करो। बेड नहीं था तो कहीं और ले जाने के लिए कहते।

डॉ. गुप्ता बोले- ऊपर बेड खाली नहीं था। क्रिटिकल मरीज के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ तैयारी कर रहे था। सीरियस मरीज को गेट पर लाकर खड़े हो जाएंगे तो उनकी गलती है।
डॉ. गुप्ता बोले- ऊपर बेड खाली नहीं था। क्रिटिकल मरीज के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ तैयारी कर रहे था। सीरियस मरीज को गेट पर लाकर खड़े हो जाएंगे तो उनकी गलती है।

डॉक्टर बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं है कि मरीज कब आया

गार्ड की ओर से ऊपर अस्पताल स्टाफ को सूचना दी जाती है। कहां दिक्कत हुई यह जांच का विषय है। मुझे कोई जानकारी नहीं है कि मरीज कब लाया गया। आपसे सूचना मिली तो 10 मिनट में पहुंचा, पर उनकी मौत हो चुकी थी। सुपरवाइजर को भी नहीं पता था कि कोई गंभीर मरीज लाया जा रहा है। नियमानुसार, CHC और PHC को मरीज भेजते समय सूचना देनी चाहिए थी। ऊपर बेड खाली नहीं था। क्रिटिकल मरीज के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ तैयारी कर रहे था। सीरियस मरीज को गेट पर लाकर खड़े हो जाएंगे तो उनकी गलती है।
- डॉ. अनिल गुप्ता, कोविड इंचार्ज, जिला अस्पताल, बिलासपुर

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