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राजनीति की भेंट चढ़ी परियोजना !:सत्ता बदली तो पेंड्रा रोड से गेवरा रोड रेल कॉरिडोर का काम हुआ बंद; 200 करोड़ से ज्यादा खर्च होने के बाद भी उड़ रही धूल

बिलासपुरएक महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में पेंड्रा रोड से गेवरा रोड रेल कॉरिडोर बनने का काम साल 2018 के बाद से बंद है। तब तक इस पर 200 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं परियोजना का बजट भी 400 करोड़ रुपए बढ़ गया है। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ में पेंड्रा रोड से गेवरा रोड रेल कॉरिडोर बनने का काम साल 2018 के बाद से बंद है। तब तक इस पर 200 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं परियोजना का बजट भी 400 करोड़ रुपए बढ़ गया है।
  • कॉरिडोर बनने के बाद कोरबा से कोयला दिल्ली ले जाने के लिए 100 किमी का सफर कम होता
  • 2015 में बजट मंजूरी मिली, 2016 में काम शुरू हुआ और 2018 में ठेकेदार ने बंद कर दिया

छत्तीसगढ़ में सत्ता बदलने के बाद 1700 करोड़ की लागत से बनने वाला पेंड्रा रोड से गेवरा रोड रेल कॉरिडोर निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया है। परियोजना पर 200 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब 2 साल से वहां धूल उड़ रही है। इसकी लागत में भी करीब 400 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है, वहीं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। वहीं ठेका लेने वाली कंपनी के काम बंद करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दरअसल, कोरबा से कोयला परिवहन को सस्ता बनाने के उद्देश्य से साल 2015 में पेंड्रा रोड से गेवरा रोड तक 115 किमी लंबी रेल लाइन बिछाने के लिए बजट में मंजूरी मिली थी। PPP मॉडल पर बनने वाले इस रेल कॉरिडोर को प्रदेश सरकार, SECL और रेलवे मिलकर बना रहे थे। निर्माण कार्य का ठेका इरकॉन कंपनी को मिला था। उसने काम भी शुरू कर दिया और अविभाजित बिलासपुर जिले के 459 हेक्टेयर में पेड़ों की कटाई भी कर दी गई।

ठेका कंपनी ने BJP नेता के बेटो को दिया था पेटी कांट्रेक्ट
इसके बाद गड्‌ढा खोदने और ट्रैक व्यवस्थित करने के साथ टनल बनाने का भी काम हुआ। इसी बीच साल 2018 में विधानसभा चुनाव के परिणाम आए और सत्ता भाजपा के हाथ से निकल कर कांग्रेस के हाथ में चली गई। इसके बाद रेलवे लाइन का काम भी अधर में लटक गया। बताया जा रहा है कि इरकॉन कंपनी ने पेटी कांट्रेक्टर के तौर पर BJP के एक वरिष्ठ नेता के बेटे को काम दिया था, लेकिन वह बीच में ही छोड़कर भाग निकला।

परियोजना से जुड़ी खास बातें

  • कोरबा से दिल्ली के लिए कोयला परिवहन करने के उद्देश्य से इस रेलवे कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा था।
  • अभी बिलासपुर से पेंड्रा होते हुए दिल्ली का सफर मालगाड़ी तय करती है।
  • इस ट्रैक के बनने से जहां 100 किमी का सफर कम होता, वहीं ट्रैक पर गाड़ियों का बोझ कम होता और लागत भी घटती।
  • इसके लिए सरकार ने साल 2014 में योजना बनाई थी। साल 2015 में इसके लिए बजट में मंजूरी मिली।
  • फिर सरकार बदलने के बाद 2018 में काम बंद हो गया। इसके चलते 1700 करोड़ की परियोजना अब 2100 करोड़ तक पहुंच गई है।

पिछले दो साल से काम पूरी तरह से रुका है। प्रोजेक्ट की लागत अब 17 सौ करोड़ से बढ़कर 21 सौ करोड़ रुपए हो गई है। अब अगर इसका काम नहीं शुरू हुआ तो प्रदेश और यहां की जनता का भारी नुकसान होगा।
- अमित जोगी, प्रदेश अध्यक्ष JCCJ

इस लाइन को अब गेवरारोड से बढ़ाकर उरगा तक किया जा रहा है। इसका दोबारा टेंडर निकालने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
- जयसिंह अग्रवाल, राजस्व मंत्री, छत्तीसगढ़

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