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बदइंतजामी:नलों के पानी में क्लोरीन गायब, सप्लाई की निगरानी के लिए लगाए अधिकांश कैमरे ठप

सूर्यकांत चतुर्वेदी | बिलासपुर10 दिन पहले
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कुदुदंड पंप हाउस: कैमरा, मॉनिटर बंद। - Dainik Bhaskar
कुदुदंड पंप हाउस: कैमरा, मॉनिटर बंद।
  • अवहेलना, टंकियों में क्लोरीन सप्लाई की मान्यता प्राप्त लैब से जांच के हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं

नगर निगम के नलों से सप्लाई होने वाले पानी में क्लोरीन गायब है। हानिकारक बैक्टीरिया को समाप्त करने, पेयजल की शुद्धता के लिए क्लोरीन मिलाना जरूरी है, लेकिन एेसा नहीं हो रहा है। पुराने नगर निगम की चुनिंदा पानी टंकियों में क्लोरीन की सप्लाई सुनिश्चित करने, निगरानी के लिए साल 2017 में लाखों के सीसी कैमरे लगाए गए।

इनमें से अधिकांश बंद हो चुके हैं। जो चालू हैं, उनकी मानिटरिंग करने का कोई सिस्टम नहीं है। ‘दैनिक भास्कर’ने इसकी जांच की तो पता चला कि क्लोरीन पर पैसे बराबर खर्च हो रहे हैं, परंतु टंकियों तक उसकी निर्धारित मात्रा पहुंचाने की प्रमाणिक व्यवस्था नहीं है। 3 साल पहले पेयजल संबंधी मामले को की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश में कहा था कि क्लोरीनयुक्त पेयजल सप्लाई नहीं कर पा रहे नगर निगमों को क्यों न भंग कर दिया जाए।

इसके बाद नगर निगम ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत जवाब में सीसी कैमरे लगाने, पद स्वीकृत करने, पेयजल की जांच के लिए मान्यता प्राप्त लैब की स्थापना आदि के प्रयासों के बारे में जानकारी दी, परंतु अब तक उन पर अमल नहीं हो पाया। ऐसे में निगम एरिया में सप्लाई हो रहे पेयजल की गुणवत्ता कितनी प्रमाणिक है, कहना मुश्किल है। तब जबकि बड़े एरिया की पाइप लाइनों में लीकेज है, नाले, नालियों के बीच से गुजरी पाइप लाइनें बदली नहीं गई हैं।

इनका कहना है
एमआईसी मेंबर मनीष गढ़ेवाल के मुताबिक वार्ड 67 में ट्यूबवेल सप्लाई है। नियमित रूप से क्लोरीन नहीं मिलाई जाती। पार्षद बनने के बाद से 3-4 बार खुद क्लोरीन मिलवा चुके हैं। एमआईसी सदस्य विजय केशरवानी का कहना है कि जुलाई में डायरिया फैला तब लिंगियाडीह में क्लोरीन डालने के निर्देश हुए। इससे पहले सप्लाई नहीं होती थी। एमआईसी सदस्य संध्या तिवारी के मुताबिक राजकिशोर नगर की टंकी में सीसी कैमरा नहीं लगा है।

सप्लाई होने वाले पानी में क्लोरीन का फील नहीं आ रहा। दयालबंद के पार्षद उमेश चंद्र कुमार के मुताबिक क्लोरीन नहीं मिलाई जा रही पर पानी पहले से ठीक है। पहले गंदा पानी आता था। पं देवकीनंदन दीक्षित नगर की पार्षद सीमा दुसेजा के मुताबिक वार्ड में 8 से अधिक ट्यूबवेल से सप्लाई होती है, परंतु इसमें क्लोरीन नहीं मिलाई जा रही।

जानिए क्लोरीन सप्लाई संबंधी 5 बड़ी कमियां
1. नल जल विभाग ने क्लोरीन सप्लाई की मानिटरिंग के लिए पुराने नगर निगम की 18 में से 8 पानी टंकियों के पास उन स्थानों पर सीसी कैमरे लगाए जहां से क्लोरीन टंकियों में भेजी जाती है। इनमें से कुदुदंड पंप हाउस, पटवारी ट्रेनिंग सेंटर, अशोकनगर, दयालबंद, राजकिशोर नगर के कैमरे बंद पाए गए। शांतिनगर, व्यापार विहार, शनिचरी, पीजीबीटी, नूतन कालोनी की पानी टंकियों के कैमरे चालू होने का दावा किया गया। व्यापार विहार में कैमरे चालू, माॅनिटरिंग बंद मिली।
2. नल जल विभाग से जोन की टंकियों में क्लोरीन सप्लाई के लिए भेजी जाती है, परंतु इसकी मानिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है कि कितनी क्लोरीन इस्तेमाल हुई?
3. निगम एरिया के 997 ट्यूबवेल में से अधिकांश सीधी सप्लाई वाले हैं, जिनमें डोजर पंप के जरिए क्लोरीन डालने की कोई व्यवस्था नहीं है।
4. हाईकोर्ट ने पेयजल में क्लोरीन की मात्रा की जांच के लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब की स्थापना के निर्देश दिए थे, परंतु न तो पीएचई और न ही नगर निगम के पास एेसी कोई लैब है।
5. टंकियों से सप्लाई के आखिरी छोर के सैंपल की जांच में .2 पीपीपीएम से कम क्लोरीन नहीं होनी चाहिए। पर ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलिंग नहीं होती। सैंपलिंग में इस बिन्दु की पड़ताल भी नहीं हो रही।

पंचायत क्षेत्रों में क्लोरीन सप्लाई की जानकारी नहीं
ईई अजय श्रीवासन के मुताबिक पानी टंकियों में जोन के माध्यम से क्लोरीन सप्लाई की जा रही है। एक लाख लीटर पर एक लीटर क्लोरीन मिलाई जा रही है। मानिटरिंग के िलए कैमरे लगाए गए हैं। इसमें कुछ सुधरवाए जा रहे हैं। क्लोरीन के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। 997 ट्यूबवेल में से टंकियों को भरने के लिए इस्तेमाल होने वाले 387 ट्यूबवेल में क्लोरीन सप्लाई हो रही है। पंचायत क्षेत्रों के ट्यूबवेल में क्लोरीन सप्लाई की जानकारी नहीं है। जोन से ब्यौरा मंगवाया जा रहा है।

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