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कई मामले पहुंचे हाइकोर्ट:समय पर नहीं मिल रही क्षतिपूर्ति राशि, सालसा की जानकारी में प्रदेश में 703 केस लंबित

बिलासपुर19 दिन पहले
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  • बच्चों, महिलाओं से जुड़े अपराध के लिए संशोधित होकर 2016 और 2018 में लागू नियमों का पालन नहीं हो रहा

पीड़ित क्षतिपूर्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की संस्था सालसा व राज्य सरकार के अलग-अलग प्रावधान और नियम बने हुए हैं। इसमें दुष्कर्म, हत्या, एसिड अटैक सहित अन्य अपराधों के पीडितों को क्षतिपूर्ति दिए जाने की व्यवस्था है। इसके सही संचालन नहीं होने के कारण प्रदेश में 703 पीड़ितों के केस लंबित हैं। इसमें 2021 के चार माह के 140 मामले हैं।

गंभीर घटनाओं से प्रभावित पीड़ित त्वरित न्याय न मिलने और मामलों की सुनवाई में देरी से तो परेशान हैं ही अब वे क्षतिपूर्ति न मिलने से भी हलाकान हो रहे हैं। आपराधिक घटनाओं के बाद पीड़ित को इलाज व पुनर्वास के लिए क्षतिपूर्ति दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए सबसे पहले पीड़ित क्षतिपूर्ति नियम 2011 जारी हुआ। इसके बाद संशोधन होकर 2013 और 2014 में भी जारी हुआ। वहीं 2016 में नालसा ने एसिड हमले के पीड़ितों के लिए विधिक सेवा योजना लागू की। संशोधन के बाद पीड़ित क्षतिपूर्ति नियम 2018 में लागू हुआ।

वहीं 2019 में एक अधिसूचना राज्य सरकार ने जारी किया इसमें भीड़ में हिंसा के लिए भी क्षतिपूर्ति देने की व्यवस्था की है। इन सभी नियमों में पीड़ितों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। इन सब के बाद भी पीड़ित क्षतिपूर्ति के लिए परेशान हैं। उन्हें राहत नहीं मिल रही है। अंतिम नियम के मुताबिक सबसे ज्यादा मामले बच्चे और महिलाओं से संबंधित आ रहे हैं। इसके लिए नियम और क्षतिपूर्ति तय है। इसके बाद भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास आने वाले आवेदनों को यह कहते हुए खारिज किया जा रहा है कि मामला निचली अदालतों में लंबित है, जबकि नियम है कि अगर घटना हुई है और पीड़ित ने अपराध दर्ज कराया है तो उसके जीवन यापन और जरूरतों के लिए अंतरिम क्षतिपूर्ति दी जाएगी व मामले की अंतिम सुनवाई के बाद निर्णय के दौरान उस राशि को समाहित किया जाएगा।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा आवेदन निचली अदालत में मामला लंबित है कहकर निरस्त कर दिया गया। इसको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पुनीत रूपारेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेमन उर्फ टेकराम विरुद्ध मध्यप्रदेश अब छत्तीसगढ़ के मामले में क्षतिपूर्ति गोवा राज्य की तरह सभी राज्यों को एक जैसा नियम बनाने और निपुन सक्सेना व अन्य विरुद्ध भारत सरकार के मामले में शीर्ष अदालत के न्याय दृष्टांत में पॉक्सो से संबंधित मामलों को 1 साल के भीतर खत्म करने और क्षतिपूर्ति की आधी राशि जरुरत के लिए दिए जाने का प्रावधान है।

एक साल में खत्म करने का प्रावधान
बच्चों व नाबालिग बालिकाओं से जुड़े अपराध दुष्कर्म आदि, महिलाओं के अपराध, अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति से संबंधित अपराधों को एक साल में खत्म करने का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट कई आदेशों में कर चुका है। इसके बाद भी बच्चों से जुड़े दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों की सुनवाई में देरी हो रही है। स्पीडी ट्रायल नहीं होने का फायदा अपराधी उठा रहे हैं।

रायपुर व जांजगीर के पीड़ित की अर्जी सालसा में लंबित
रायपुर में 2010 में एक व्यक्ति को जला दिया गया। उसके शरीर का 100 प्रतिशत हिस्सा जल गया था। इससे उसकी दोनों आंखें व एक कान खराब हो गया। पीड़ित ने रायपुर में आवेदन दिया जिसे नियम बनने से पहले की जानकारी देकर खारिज कर दिया गया। इलाज कराने में हो रही आर्थिक परेशानी के लिए अब प्राधिकरण में आवेदन दिया है। इसी तरह जांजगीर की दुष्कर्म पीड़िता ने अपील की है, जिसमें उसे मिले क्षतिपूर्ति के रूप में 1.50 लाख रुपए के स्थान पर 2.50 लाख रुपए दिए जाने का आदेश दिया गया।

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